टारगेट का इस्तेमाल करते हुए अपने डिजिटल परफ़ॉर्मेंस का विश्लेषण कैसे करें?

मरियम गंबारज़ादेह ग्रोथ एडिटर - बीबीसी वर्ल्ड सर्विस नियर ईस्ट हब

लेकिन डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की कामयाबी में कौन सी बातें शामिल हैं? हम इस बात का आंकलन कैसे करेंगे कि डिजिटल पहुंच और एंगेजमेंट के मामले में हम सही दिशा में और सही रफ़्तार से आगे बढ़ रहे हैं? या फिर हमें इस प्रक्रिया की रफ़्तार बढ़ाने के लिए कोई दूसरे कदम उठाने होंगे?

इन सभी सवालों का जवाब तलाशने के लिए हमें ग्रोथ में शामिल दूसरे बिंदुओं पर गौर करना होगा:

टारगेट या लक्ष्य

बीबीसी ने साल 2022 तक 50 करोड़ वैश्विक दर्शकों/पाठकों/श्रोताओं तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है और बीबीसी परिवार का हिस्सा होने के नाते वर्ल्ड सर्विस की भाषाओं को इस टारगेट तक पहुंचने को लेकर अपनी-अपनी भूमिका निभानी है. वर्ल्ड सर्विस की हर भाषा को अपने ख़ास डिजिटल टारगेट दिए गए हैं, जो इस बात का संकेत देते हैं कि उन्हें कितने लोगों (डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर मौजूद यूज़र) तक पहुंचना है या एंगेज करना है.

डिजिटल ग्रोथ और टारगेट पर क़रीब से निगाह डालते हैं:

ग्रोथ क्या है? आम तौर पर आकार में बढ़ने की प्रक्रिया को ग्रोथ कहते हैं और जब बात डिजिटल ग्रोथ की आती है, तो इसका मतलब है डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर मौजूद जिन लोगों (यूज़र) तक हम पहुंच रहे हैं या एंगेज कर रहे हैं, उनकी संख्या में इज़ाफ़ा होना. उदाहरण के तौर पर: पिछले दो महीने के दौरान वेबसाइट कंटेंट पढ़ने वाले आपके यूनीक यूज़र के साप्ताहिक आंकड़ों में 20 फ़ीसदी का उछाल आया है.

डिजिटल टारगेट क्या है? एक ख़ास समयावधि में आप अपने डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर किस स्तर का प्रदर्शन करना चाहते हैं, यही डिजिटल टारगेट है. उदाहरण के तौर पर: साल 2019 के अंत तक हर हफ़्ते आपका वेबसाइट कंटेंट पढ़ने-देखने वाले लोगों की तादाद 10 लाख यूनीक यूज़र तक पहुंच जाएगी. लेकिन कई बार ये बात हमें हैरत में डाल सकती है: 'अगर आपके डिजिटल नंबर बढ़ेंगे, तो आप अपने डिजिटल टारगेट तक पहुंच जाएंगे.'  इसे लेकर कुछ इस तरह की सलाह दी जाती है, 'टारगेट को लेकर ज़्यादा सोचने या परेशान होने की ज़रूरत नहीं है. अगर आपका फ़ोकस ग्रोथ पर रहा, तो कामयाबी मिलनी तय है.

मसलन, ग्रोथ एडिटर होने के नाते मैं एक टीम के साथ मिलकर वेबसाइट और सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर उनके प्रदर्शन में सुधार लाने की कोशिश कर रही हूं.

वेबसाइट पर साप्ताहिक ग्रोथ रेट औसतन 50 फ़ीसदी है और सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर साप्ताहिक ग्रोथ रेट औसतन 20 फ़ीसदी है.

इनमें से कौन सा प्लेटफ़ॉर्म ज़्यादा कामयाब दिख रहा है?

क्या आप नहीं चाहते कि मैं आपकी टीम से इस बारे में बातचीत करूं कि सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर उनकी रफ़्तार इतनी धीमी है, तो क्यों है?

अब इसमें एक और चीज़ जोड़ते हैं: उनके टारगेट

वेबसाइट पर हमारा औसत साप्ताहिक ग्रोथ रेट 50 फ़ीसदी है और ये दिए गए टारगेट से 60 फ़ीसदी कम है.

सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर हमारा औसत साप्ताहिक ग्रोथ रेट 20 फ़ीसदी है और इस मोर्चे पर हमने लक्ष्य हासिल कर लिया है या टारगेट मैच कर दिया है.

अब जानते हैं कि सलाह क्या होती है?

क्या मुझे अब भी टीम को अपने सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर प्रदर्शन सुधारने के लिए कहना चाहिए? या फिर उनकी वेबसाइट पर ग्रोथ को लेकर उठाए गए कदमों पर फ़ोकस करना चाहिए ताकि वो और ज़्यादा बेहतर नंबर तक पहुंच सकें.

टारगेट, ग्रोथ को आंकने का पैमाना हैं

डिजिटल ग्रोथ और डिजिटल टारगेट, दो पूरी तरह अलग-अलग चीज़ें हैं, लेकिन आपस में उनका गहरा नाता है. ग्रोथ के बिना हम अपने टारगेट तक नहीं पहुंच सकते.

लेकिन बिना टारगेट के, हमारे पास अपनी डिजिटल ग्रोथ को आंकने का कोई ढांचा ही नहीं होगा. इसके अलावा 'संख्या या आंकड़े बढ़ाने' से जुड़े ग्रोथ एक्शन/प्रोजेक्ट पर फ़ोकस कर आपको शायद सकारात्मक आंकड़े दिखने शुरू हो जाएं, लेकिन ये इस बात की गारंटी तब भी नहीं है कि आप अपने 'टारगेट तक पहुंच ही जाएंगे.'

और जब आप अपने लक्ष्य या मंज़िल तक पहुंच ही नहीं पाएंगे तो फिर एक्शन लेने का क्या फ़ायदा?

अपने डिजिटल प्रदर्शन में सुधार लाने का सबसे असरदार तरीका (पहला) अपने टारगेट और (दूसरा) मौजूदा ग्रोथ रेट के आधार पर अपने ग्रोथ एक्शन/प्रोजेक्ट तय करना है.

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