विज़ुअल पत्रकारिता की दुनिया बदलने वाली ग्राफ़िक्स तकनीक

किसी स्टोरी को समझाने के लिए ज़रूरी तस्वीरें कई बार कैमरामैन नहीं ले पाते हैं. बीबीसी संवाददाता निक हाएम ने बीबीसी की विज़ुअल पत्रकारिता यूनिट की एडिटर अमांडा फ्रैंसवर्थ से जानने की कोशिश की है कि जटिल स्टोरी को बताने के लिए वर्चुअल रियलिटी ग्राफ़िक्स टेक्नॉलॉजी किस तरह मददगार है.

सभी स्टोरी के लिए 3-डी ग्राफ़िक्स का इस्तेमाल ज़रूरी नहीं है. लेकिन जहां ज़रूरी हों वहां ये बेहद प्रभावी होते हैं. ख़ासकर उन मौकों पर जहां कोई चीज़ कैसी दिखती होगी, उसे समझाना की ज़रूरत हो.

उदाहरण के लिए, गहरे समुद्र के नीचे धरातल में जीवों के रहस्यमयी संसार की ख़ोजबीन के लिए क्या उपकरण इस्तेमाल किया जा रहा है?  मंगल ग्रह पर किस तरह छानबीन चल रही है? बैंक ऑफ़ इंग्लिश में गोल्ड बार रखने वाली तिजोरी के अंदर क्या हो सकता है? ऐसी चीज़ों को बीबीसी संवाददाताओं से बात करके स्पेशलिस्ट ग्राफ़िक डिज़ाइनर वास्तविक अंदाज़ में दिखा सकते हैं.

वर्चुअल रियलिटी ग्राफ़िक्स के इस्तेमाल के दो तरीके हैं- एक तो आपके आसपास कंप्यूटर जनित 3-डी तस्वीर बनाई जाती है, जिससे संवाददाता अचानक नए वातावरण में नज़र आने लगता है, वह मंगल ग्रह की सतह पर भी दिखाई दे सकता है या फिर दूसरा तरीका है जिसमें जटिल स्टोरी को सरल बनाने के लिए नक्शे या आंकड़ों के ग्राफिक्स का इस्तेमाल होता है.

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