यूज़र्स से मिली फ़र्ज़ी तस्वीरों की जाँच

सोशल मीडिया पर दिखनेवाली तस्वीरें, वीडियो या दूसरी सामग्रियाँ सही हो भी सकती हैं, नहीं भी. ऐसे में इनके इस्तेमाल से पहले इनकी जाँच करना एक ज़िम्मेदारी का काम है. और कुछ उपायों से इनके बारे में और जानकारी जुटाई जा सकती है.

1. यूज़र को ईमेल

यूज़र को वापस ईमेल करें. उनके फ़ोन नंबर लें और यदि संभव हो तो उससे बात करें.

  • क्या वो तस्वीरों के बारे में और जानकारी दे सकते हैं? (क्या वो जो जवाब दे रहे हैं वो एजेंसियों पर आ रही जानकारियों से मेल खाता है?)
  • उनसे पूछें कि वे पहले कहाँ थे और अभी कहाँ हैं? (अगर वे कहते हैं कि वे किसी इंटरनेट कैफ़े में हैं तो गूगल में तस्वीर को सर्च करें)
  • उनसे पूछें कि तस्वीरें किसने लीं
  • पूछें कि तस्वीरें किस कैमरे या फ़ोन से ली गई थीं

2. तस्वीरों की एजेंसियों पर जाँच करें

क्या एक साधारण व्यक्ति के हिसाब से तस्वीरें बहुत ही अधिक अच्छी हैं? यदि संदेह हो, तो एल्विस, याहू या गूगल में सर्च करें – हो सकता है वहाँ आपको वैसी तस्वीरें मिल जाएँ.

3. क्या एक व्यक्ति इतनी सारी तस्वीरें ले सकता है?

अगर आपके पास बहुत सारी तस्वीरें भेजी गई हैं, तो ये सोचें कि क्या एक ही व्यक्ति सचमुच इतनी सारी जगहों पर जा सकता है?

4. पॉवर प्वाइंट? सतर्क हो जाएँ

यदि तस्वीरें पॉवर प्वाइंट स्लाइड शो की तरह भेजी गई हैं तो संदेह का कारण बनता है. शायद किसी ने विभिन्न स्रोतों से उन्हें जुटाकर उन्हें भेज दिया है.

 5. कुछ लिखा नहीं है. सतर्क हो जाएँ

सामान्यतः यदि किसी व्यक्ति ने कोई फ़ोटोग्राफ़ भेजने का कष्ट किया है तो वो उसके साथ कुछ न कुछ ज़रूर लिखकर भेजता है. यदि किसी तस्वीर के साथ कुछ नहीं लिखा है तो उससे बचना चाहिए. यदि किसी मेल में टेक्स्ट की जगह केवल सामान्य कोई पंक्ति लिखी हैं, जैसे – 'these are great pictures'  - तो सामान्यतः ऐसी तस्वीरें इंटरनेट से उठाई गई तस्वीरें होती हैं.

तस्वीरें सही हैं या नहीं इसका पता कुछ तकनीकी जाँचों से भी हो सकता है-

6. पिक्सेल की जाँच

तस्वीर की साइज़ – कैमरे में ली गई असल तस्वीरें हमेशा 2,000 x 1,200 या इससे अधिक पिक्सेल की होती हैं. इससे छोटी कोई भी तस्वीर दोबारा री-साइज़ की गई है.

यदि किसी तस्वीर में पिक्सेल विषम संख्या में हैं तो – हो सकता है कि उन्हें फ़ोटो एजेंसियों से उठाया गया है. जैसे, याहू न्यूज़ की तस्वीरें सामान्यतः 380x345 साइज़ की होती हैं.

आप तस्वीरों के एक्सिफ़ डाटा को भी देख सकते हैं जिनसे तस्वीर लेने के समय का पता चलता है.

7. अत्यधिक अच्छी तस्वीरें?

कई बार बहुत अच्छी तस्वीरें मिल सकती हैं मगर वो एजेंसियों पर कहीं नहीं दिखेंगी. ऐसे में हो सकता है कि उन्हें फ़ोटोशॉप जैसे सॉफ़्टवेयर में एडिट किया गया हो. ऐसी स्थिति में तस्वीरों को फ़ोटोशॉप में खोलकर ज़ूम करना चाहिए. फिर देखना चाहिए कि कहीं कोई बदलाव का स्पष्ट संकेत तो नहीं है.

मगर आपको हर बार इन सारी बातों की जाँच करना हो ये ज़रूरी नहीं, क्योंकि अंततः आपको तस्वीरों को इस्तेमाल भी करना है. लेकिन यदि ज़रा भी शक हो, तो जाँच ज़रूर करें.

तेज़ी बहुत महत्वपूर्ण है. अक्सर, यूज़र्स से मिली सामग्रियाँ आपके पास आने वाली सबसे पहली सामग्री होती है और आपका प्रयास होता है कि आप उसे सबसे पहले लगाएँ ताकि आप बाक़ी प्रकाशनों से आगे निकल जाएँ. ऐसे में आपके पास जाँच करने के लिए अधिक समय नहीं होता.

यूज़र्स के ईमेल की जाँच

फ़र्ज़ी नाम से भेजे गए ईमेल से भी समस्या हो सकती है. इसकी जाँच के लिए वही सब तरीक़े हैं जो उन सामान्य लोगों के साथ करने पड़ते हैं जो बीबीसी के पास फ़ोन कर दावा करते हैं कि उन्होंने कोई घटना होते हुए देखी है.

1. दोबारा ईमेल करें

यदि आप चाहते हैं कि जिस व्यक्ति ने आपको इस्तेमाल करने के लिए ईमेल से कोई समाचार या तस्वीर भेजी है, तो ये आवश्यक है कि आप उसे फ़ोन कर ये पता लगाएँ कि उसने सचमुच उस घटना को देखा है.

2. तस्वीरें माँगें

उनसे उनकी अपनी तस्वीर माँगें. यदि वो भेजते हैं तो इस बात की संभावना अधिक है कि वे सही हैं. मगर ब्रेकिंग न्यूज़ की स्थिति में शायद ऐसा संभव नहीं होगा.

3.  इंटरनेट पर उनका नाम सर्च करें

गूगल या किसी दूसरे सर्च इंजिन पर उनके नाम को सर्च करें, ख़ासतौर पर ये पता लगाने के लिए कि कहीं उस सामग्री का इस्तेमाल करवाने में उनका कोई एजेंडा तो नहीं. हो सकता है कि वो किसी अभियान का हिस्सा हों.

4.  फ़ोन का एरिया कोड देखें

वो जिस नंबर से फ़ोन कर रहे हैं उसका एरिया कोड और उनका ईमेल ऐड्रेस चेक करें. क्या वो सही हैं?

5.  विवरण माँगें

अगर आप उस ईमेल से भेजी सामग्री का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो उनसे और भी ब्यौरा माँगें. 

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