सोमवार, 11 अगस्त, 2008 को 07:35 GMT तक के समाचार
रेहान फ़ज़ल
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
अभिनव की प्रतिभा का अंदाज़ा 2004 के एथेंस ओलंपिक में ही हो गया था जब ओलंपिक रिकार्ड तोड़ने के बावजूद वो कोई पदक नहीं जीत पाए थे.
अट्ठाइस सितंबर, 1982 को जन्मे अभिनव ने बारह साल की उम्र में ही राइफ़ल थाम ली थी और तभी रोपड़ ज़िला निशानेबाज़ी चैंपियनशिप का ख़िताब अपने नाम कर लिया था.
अभिनव का अचूक निशाना देखकर मशहूर कोच लेफ़्टिंनेंट कर्नल जेएस ढिल्लों को लगा कि निशानेबाज़ी में अभिनव भारत का नाम रोशन कर सकते हैं.
सन् 2000 में सिडनी में हुए ओलंपिक में अभिनव भारत की ओर से भाग लेने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी थे जबकि सन् 2001 में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबलों में अभिनव ने छह स्वर्ण पदक जीते.
मैनचेस्टर में 2002 में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने एयर राइफ़ल पेयर्स में स्वर्ण और व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत पदक जीता था.
खेल रत्न
सन् 2001 में ही उन्हें अर्जुन पुरस्कार मिला और उसके एक साल बाद उन्हें भारत का सबसे बड़ा खेल पुरस्कार राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार मिला.
बीजिंग ओलंपिक में अभिनव को 10 मीटर एयर राइफ़ल में 700.5 अंकों के साथ स्वर्ण पदक मिला.
ये ओलंपिक खेलों में किसी भी भारतीय का पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक है. इससे पहले 1980 के मास्को ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम ने स्वर्ण पदक जीता था.
बिंद्रा ने यह उपलब्धि पीठ में दर्द होने के बावजूद प्राप्त की है. 27 अगस्त को उन्हें जर्मनी में डाक्टर को दिखाना है जो यह तय करेंगे कि उनकी पीठ का ऑपरेशन किया जाए या नहीं.