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शोएब अख़्तर के साथ एक मुलाक़ात
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बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम 'एक मुलाक़ात' में हम भारत के जाने-माने लोगों की ज़िंदगी के अनछुए पहलुओं से आपको अवगत
कराते हैं.
इस बार हमारे मेहमान हैं क्रिकेट जगत की एक बहुत ही ख़ास और चर्चित शख्सियत और दुनिया के सबसे तेज़ गेंदबाज़ों में शुमार किए जानेवाले पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब अख़्तर. शोएब ये बताएँ कि इतने दिनों तक इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का हंगामा रहा, लेकिन अब आईपीएल का सीज़न ख़त्म हो गया. आप वापस पाकिस्तान लौट रहे हैं. अब आपका अगला एजेंडा क्या है? अगला दौर मेरे ऊपर लगे बैन की इन्क़वायरी का है. वापस जाकर टेस्ट और वनडे क्रिकेट की प्रैक्टिस पर फ़ोकस करूँगा. ऊपर वाले से दुआ करूँगा कि मेरे ऊपर से प्रतिबंध हट जाए और मैं क्रिकेट खेल सकूँ. बाक़ी योजनाएं इसके बाद ही. अच्छा ये बताएँ कि क्या आपको अंदाज़ा था कि आईपीएल में आपकी टीम कोलकाता नाइट राइडर्स और क्रिकेट को चाहने वाले आपको इस तरह पलकों में बिठाएंगे. सच बताइएगा? वास्तव में मुझे अंदाज़ा नहीं था कि लोग मुझे इतना प्यार और सम्मान देंगे. हालाँकि मुझे पता है कि भारत के लोग और खासकर बंगाल के लोग बहुत ही क्रिकेट प्रेमी हैं. इसके अलावा मेरी टीम और मैनेजमेंट के साथ शाहरूख़ ख़ान ने मुझे बहुत ही सपोर्ट किया. मेरे बुरे वक़्त में उन्होंनें मेरा साथ दिया. मैंने भी जितना हो सकता था ड्रेसिंग रूम में अपनी टीम मेंबरों का सहयोग किया. ड्रेसिंग रूम में किस तरह सहयोग करते हैं आप? क्रिकेट से संबंधित कई तकनीकी बातें होती हैं और सीनियर खिलाड़ी होने के नाते मैंने जितना हो सकता था, अपने अनुभवों को नए खिलाड़ियों के साथ बाँटा, कोशिश रहती थी कि उत्साहजनक माहौल बना रहे. हमारे ड्रेसिंगरूम में मनोरंजन, गीत संगीत का मौहाल रहता था. फिर टीम के मालिक शाहरूख़ ख़ान भी बेहद सुलझे हुए इंसान हैं, उनके साथ भी बड़ा दोस्ताना व्यवहार रहता था. उन्होंने हमेशा हमारा उत्साह बढ़ाया, और हमें उम्मीद है कि अगली बार हम ज़रूर आईपीएल में जीत हासिल करने वाली टीम बनेंगे. शोएब अपनी पसंद का एक गाना बताइए? कई गाने हैं मझे पसंद हैं. लेकिन नुसरत फ़तेह अली ख़ान के गीत और गज़लें मुझे पसंद हैं. इसके अलावा नए फ़िल्मी गानों में दर्द-ए-डिस्को अच्छा लगता है. शाहरूख़ तो एक स्टार हैं लेकिन शोएब भी कोई कम स्टार नहीं. इसके अलावा आपकी टीम के कप्तान सौरव गांगुली भी एक बड़े खिलाड़ी हैं, तो क्या समीकरण रहते थे आप लोगों के बीच में क्योंकि अभी तक तो आप लोग परस्पर विरोधी टीमों के सदस्य थे? वास्तव में ये बड़ा ही आश्चर्यजनक था. लेकिन ये सच था कि हम एक ही टीम के रूप में खेल रहे थे. लेकिन गांगुली ने मुझे बड़ा सपोर्ट किया और ध्यान रखा. वो मैदान में और मैदान के बाहर भी एक अच्छे कप्तान हैं. वे मुझे मैच विनर के तौर पर देखते थे. और अल्लाह का शुक्र है कि मैंने गेंदबाज़ी की बदौलत टीम को एक मैच भी जिता दिया. हालांकि मैं जिन हालातों में खेलने के लिए पाकिस्तान से आया था तो इतना तैयार नहीं था. ये तो सच है. लेकिन एक हैरानी की बात थी कि ललित मोदी से लेकर शाहरूख़ ख़ान तक सभी लोग आपका बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे. ऐसा माहौल था कि जैसे शादी में दूल्हे का इंतज़ार होता है? बस क्या कह सकता हूँ. ऊपर वाले की दुआएँ हैं. अच्छा ये बताएँ कि आपके नाम के साथ दुनिया के एक तेज़ गेंदबाज़ का जो टैग लगा है तो उसके पीछे कितनी मेहनत रही है आपकी? देखिए यहाँ मैं थोड़ा आपके सवाल में सुधार करना चाहूँगा, क्योंकि मुझे लगता है कि मैं दुनिया का सबसे तेज़ गेंदबाज़ हूँ. ठीक बात है. आप वाकई सबसे ते़ज़ गेंदबाज़ हैं. ये बताइए कि आपने कब सोचा था कि सबसे तेज़ गेंदबाज़ बनना है?
मेरा शुरू से मानना था कि ऐसा काम किया जाए जिससे और लोगों से अलग पहचान बनाऊँ. हालांकि मैं कई सारे ऐसे काम करता हूँ जो सबसे अलग हो जाते हैं. मुझे लगता था कि मैं वसीम अक़रम और वक़ार यूनुस से तेज़ गेंदबाज़ बन सकता था. मैंने सोच रखा था कि 1999 के विश्वकप में सबसे तेज़ गेंदबाज़ी करूँगा. क्या वाकई आपने 1999 से पहले सोच रखा था कि सबसे तेज़ गेंदबाज़ बनेंगे. इसके पीछे क्या मोटीवेशन था? ये सच है. मैंने 1997 में ही सोच लिया था कि सबसे तेज़ गेंदबाज़ बनना है. हालांकि मुझे उम्मीद नहीं थी कि 1999 में मुझे विश्वकप में खिलाया जा सकता है. इसी तरह यहाँ आने से पहले सोच लिया था कि कोलकाता आकर अपनी टीम को जिताना है. ये कब सोचा था कि क्रिकेटर ही बनना है? जब मैंने पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस छोड़ा था, तब 1995 में मैंने सोच लिया था कि किसी भी तरह पाकिस्तान टीम के लिए खेलना है. इसका कारण ये था कि पीआईए मुझे क्रिकेट टीम में खिलाता ही नहीं था. बस ये एक जिद थी. माना जाता है कि जिस तरह भारत में अच्छे स्पिनर होते हैं उसी तरह पाकिस्तान अपने तेज़ स्विंग गेंदबाज़ों के लिए जाना जाता है. आपका कोई फ़ेवरेट खिलाड़ी? ये उसी तरह है कि किसी खान से आप कितने हीरे निकाल सकते हैं. मुझसे पहले तो इमरान ख़ान, वसीम अक़रम और वक़ार यूनुस के साथ साथ कई महान गेंदबाज़ आए. मुझे लगता है कि मेरे बाद कोई नेचुरल तेज़ गेंदबाज़ नहीं दिख रहा. अच्छा पाकिस्तानी गेंदबाज़ों के साथ ये खूबी देखी जाती रही है कि वे बहुत ही स्मार्ट और खूबसूरत होते हैं. लड़कियाँ उनके पीछे पागल रहती हैं. तो आपके साथ भी कुछ ऐसा है क्या? सच है, मैंने भी देखा है कि लड़कियाँ उन सभी के पीछे रहती थीं. इंग्लैंड में मैंने देखा है कि वक़ार यूनुस और वसीम अक़रम के लिए लड़कियों में लड़ाई हो गई थी. इमरान ख़ान पर तो आज भी लड़कियाँ मरती हैं. लेकिन मेरे पीछे तो मरने वाली सिर्फ़ मेरी बीवी ही होगी. तो अच्छा शादी करने का इरादा है. किससे हो रही है? अभी कोई लड़की नहीं देखी है, लेकिन दो-तीन महीनों में ही शादी कर लेने की योजना है. मुझे लग रहा है आदमी के जीवन में उसकी बीवी का अहम रोल होता है. पता नहीं क्यों मुझे लग रहा है कि आपसे इस सवाल का मुझे सही जवाब नहीं मिल रहा है, क्या वो पाकिस्तानी लड़की है. पर कोई बात नहीं ये आपका व्यक्तिगत मामला है? फ़ुलहाल इस पर कोई कमेंट नहीं करना चाहूँगा. शोएब साहब आप अपने बचपन के बारे में बताएँ. किस तरह के बच्चे थे आप? मैं शैतान तो था. लेकिन कह लीजिए कि अच्छा शैतान था. लेकिन मैंनें तब या आज तक कभी किसी को दु्ख या नुक़सान नहीं पहुँचाया. आपकी जिस तरह की इमेज है उसके मुताबिक़ जब हम आपका इंटरव्यू करने आए थे तो लगा था कि शोएब एक गुस्सैल या कह लीजिए थोड़ा घमंडी किस्म का इंसान होंगें. लेकिन ऐसा कुछ लग नहीं रहा है. तो क्या ये हाल के समय के दौरान आया बदलाव है या फिर आप हमेशा ही ऐसे रहे हैं? नहीं, मैं कभी नहीं बदला. हमेशा से मैं ऐसा ही था. हाँ ये ज़रूर है कि मेरे सीखने और जीवन के अनुभव बदलते रहे हैं. मैंने कभी लीग से हटकर किसी से मदद नहीं मांगी, हाँ लीग से हटकर लोगों की मदद ज़रूर की है. और सच मानिए, मेरे बचपन के दोस्त या जो लोग मुझे बचपन से जानते हैं वो मेरे बारे में अख़बार में छपी बातों पर हँसते हैं, वो यक़ीन ही नहीं कर पाते इन सब पर. लगता है मीडिया भी मेरे बारे में कुछ ज़्यादा ही लिखता है. जैसे मैं पाँचों वक़्त का नमाज़ी हूँ, ये बात शायद वो नहीं लिखते क्योंकि इसमें शायद उन्हें मसाला नज़र नहीं आता. लेकिन अगर मैं किसी पार्टी में चला जाऊँ तो मेरे बारे में छप जाता है जबकि वही दूसरों के साथ ऐसा नहीं होता. मेरा मानना है कि कोई भी ऐसा इंसान नहीं है जिसने ग़लतियाँ नहीं की हों. अच्छा मैं आपसे एक हाइपोथेटिकल या कह लीजिए काल्पनिक सवाल पूछूँ, कि अगर आपको ये शक्ति मिल जाए कि अपनी ज़िन्दग़ी की स्क्रिप्ट फिर लिख सकते हैं तो आप क्या सुधार करना चाहेंगें अपनी अब तक की जीवन यात्रा की कहानी में? कुछ नहीं. कुछ भी नहीं. अगर मैं बदलाव कर दूँगा तो फिर इतना सब कुछ कैसे सीखता. आपका अपने बारे में क्या ख़्याल है?
मैं कोई बुरा इंसान नहीं हूँ. मुझे लगता है कि ये मेरी ग्राउंड इमेज ही है जिसके आधार पर लोग मेरे बारे में राय बनाते हैं. लोगों को उतना ही पता है जितना वो मुझे टीवी पर देखते हैं. मैं उनके लिए एक ख़तरनाक तेज़ गेंदबाज़ हूँ. यही इमेज उनके दिमाग में रहती है. वास्तविकता ये है कि तेज गेंदबाज़ के अंदर एग्रेशन या आक्रामक अंदाज़ होना लाजमी है. कोई हँस के तेज़ गेंदबाज़ी थोड़े ही कर सकता है. तो ग्राउंड के बाहर शोएब कैसे हैं? शांतमिजाज़. यारों का यार. जितना बस में हो उतनी मदद करता हूँ ज़रूरतमंदों की. मैं ग़लत बात बर्दाश्त नहीं कर पाता. हाँ अब इतना ज़रूर बदलाव कह सकते हैं कि गलत चीज़ पर मैं अब चुप रह सकता हूँ, पहले बोल पड़ता था. तो ये ठान लिया है कि अब कोई ग़लती नहीं करेंगें? ग़लती तो होती ही है, ये संभव नहीं कि इंसान से ग़लतियाँ न हों. इंसान ग़लतियों से ही सीखता है. मेरे साथ ये है कि मैं बिल्क़ुल शांत और सांचे में ढली जीवनशैली नहीं बिता सकता. अच्छा भारत के बारे में आपको क्या पसंद है. जैसे यहाँ के लोग, उनका खानपान वगैरह? सबसे ज़्यादा उनकी देशभक्ति. वो अपने हीरो को एक तरह से पूजते हैं. जैसे मैं कोलकाता के लिए खेला तो मुझे हीरो जैसा सम्मान मिला. भले ही ये शायद मुझ पर लगे बैन से उपजी सहानुभूति रही हो लेकिन मुझे भारत में बहुत प्यार मिला. भारत में आप कई जगहों पर गए पर आपकी पसंदीदा जगह? दिल्ली. लेकिन बॉम्बे एक बहुत ही तेज़ शहर है. वहाँ हमेशा कुछ ना कुछ होता ही रहता है. मेरा मानना है कि भारत अब बदलाव की स्थिति में है, और मुझे लगता है कि भारत की बेहतर आर्थिक स्थिति और मज़बूती से पाकिस्तान को भी फ़ायदा ज़रूर होगा. और दिल्ली क्यों पसंद है आपको? दिल्ली, एक ऐतिहासिक शहर है. आपको लगता है कि हर सातवें क़दम पर एक बादशाह का सिर ज़मींदोज़ है. अच्छा आपकी एक इमेज लेडी किलर की भी है. लड़कियाँ आपके पीछे पागल रहती हैं. तो क्या राज़ है इसका? देखिए, मैं ये नहीं कहता कि मैं कोई फ़रिश्ता हूँ. मैं भी इंसानी फितरत की तरह कोशिश करता हूँ कि अपने गुनाहों को छुपाऊँ. मैं ख़ुद को एक नेचुरल इंसान मानता हूँ, और अपने जीवन को इंज्वाय करता चाहता हूँ. मैं दूसरों की परवाह नहीं करता. आपकी ड्रीम वोमन, सपनों की रानी कैसी होगी? वो साधारण, पढ़ी-लिखी, मधुर स्वभाव की होनी चाहिए, खूबसूरत हो, बस और क्या. अगर लंबी हो तो अच्छा होगा. लेकिन एक बात मैं पूछना चाहूँगा, कि जितनी अटेंशन आपको मिलती है, ख़ासकर लड़कियों की, उससे कहीं उन्हें जलन तो नहीं होगी? मैं इस एक चीज से थोड़ा डरता हूँ, क्योंकि अगर शादी के बाद मैं उसके साथ भारत आता हूँ तो कुछ समस्या आ सकती है. कहने का मतलब ये कि मैं नहीं चाहता कि मीडिया मेरी पर्सनल लाइफ़ में झांके, और फिज़ूल में उसके पीछे कैमरे वाले अनावश्यक पड़ जाएँ. अच्छा आपका पसंदीदा हीरो कौन है? ऋतिक रोशन मुझे पसंद है. वो एक बहुत ही अनुशासित और मेहनती लड़का है. वास्तव में वो हर काम नियत समय पर ही करता है. वास्तव में मैं बिल्क़ुल ऐसा नहीं कर सकता.
अच्छा अख़बार में हमें एक बार पढ़ने को मिला था कि आपने सलमान ख़ान के साथ एक बार मुंबई के बैंड स्टैंड में शर्ट उतार कर दौ़ड़ लगाई थी. क्या सही है ये? बिल्क़ुल ग़लत है. सलमान एक बेहतरीन और प्यारे इंसान हैं. कोई भला ऐसे कैसे अख़बार मे लिख सकता है. हालांकि हम दोनों के साथ एक चीज कॉमन है कि विवाद दोनों के साथ जुड़ा है शायद इसीलिए अख़बार ने ऐसा लिख दिया होगा. अच्छा शोएब, ये बताएँ कि आपके जीवन में सबसे चुनौतीभरा समय कौन सा रहा? 2006 में जब मुझ पर डोपिंग के आरोप लगे थे, उस दौरान मैंने ख़राब समय देखा. इसके अलावा खेल में 2006 में इंग्लैंड के खिलाफ़ हुई सिरीज़ में प्रदर्शन लगातार ठीक नहीं हो पा रहा था. लेकिन जब आप फ़ार्म में रहते हैं और विरोधी टीम को अपनी गेंदबाज़ी से तबाह करने के बाद वन मैन डिमॉलिश स्क्वॉड बनकर बड़ा अच्छा लगता होगा? देखिए कोई भी खिलाड़ी लगातार बेहतर परफ़ॉर्म कर पाए ये बहुत ही मुश्किल है. मुझे लगता है कि अच्छा मैनेजमेंट किसी भी खिलाड़ी को ज़रूरत के समय बेहतर इस्तेमाल करके ज़्यादा जीतें हासिल कर सकता है. सच मानिए मैनेजमेंट का कारगर होना भी उतना ही ज़रूरी होता है. ऐसा क्यों है हमारे मुल्क़ों में कि हीरो को हम जितनी जल्दी सिर ऑंखों पर बिठाते हैं, ख़राब परफ़ार्मेंस पर उतनी ही जल्दी नीचे गिरा देते हैं? मुझे नहीं पता कि ऐसा क्यों है. लेकिन मुझे लगता है कि ये पर्सनॉलिटी क्लैश का मामला है. जिसके पास थोड़ी सी ताक़त आ जाती है वो आपके बड़े नाम से असुरक्षित महसूस करने लगता है. बजाए अपने मुल्क़ के हीरो के तौर पर प्यार करने के उसी को रास्ते से हटाकर ख़ुद प्रसिद्ध होना चाहते हैं, हमारे नाम के साथ जोड़कर अपना मतलब सिद्ध करना चाहते हैं. मेरा मानना है कि ये क़ामयाबी की कीमत चुकानी पड़ती है, शायद ये वही है? देखिए, अल्लाह ने मुझे जो दिया है मैं उससे बहुत खुश हूँ. लेकिन कई लोगों में असुरक्षा की भावना होती है और वो आपके नाम को इस्तेमाल करके ख़ुद का मतलब सिद्ध करते हैं और बदनाम हम होते हैं. मैंने कई बार शाहरूख़ के बारे में बेमतलब की बातें सुनीं जबकि वो बहुत ही जबर्दस्त आदमी है, बहुत ही अच्छा दोस्त होता है किसी का भी. क्या करेंगे ये सब चलता रहता है. आपकी फ़ेवरेट बॉलीवुड फ़िल्म? तीन हैं. दिल वाले दुल्हनियाँ ले जाएंगे, हम आपके हैं कौन और दिल चाहता है. और आपकी फ़ेवरेट बॉलीवुड एक्ट्रेस? मीनाक्षी और मधुबाला. इसके अलावा माधुरी दीक्षित मुझे बहुत पसंद हैं. माधुरी की साजन फ़िल्म मुझे बहुत पसंद हैं. काफ़ी खूबसूरत गाने हैं. उसे देखने पर आप खुद को हीरो की जगह महसूस करते हैं. अच्छा शोएब, क्या कभी फ़िल्मों में आने का इरादा है? मैंने फ़िलहाल कभी नहीं कहा कि मैं फ़िल्मों में आना चाहता हूँ. अब अगर कोई कहता है या ऑफ़र देता है तो भला मैं उसका मुँह तो पकड़ नहीं सकता. हाँ अगर मूड होगा तो रिटायरमेंट के बाद करूँगा फ़िल्में. कोई मुझे रोकने वाला तो है नहीं. लेकिन अभी फ़ोकस क्रिकेट पर है. अच्छा अगर कभी फ़िल्में की तो किस तरह का रोल करना पसंद करेंगें. रोमांटिक हीरो या फिर एक्शन हीरो बनना पसंद करेंगें? महेश भट्ट ने मुझे गैंगस्टर में ऑफ़र दिया था. एक और फ़िल्म के सिलसिले में मुझे ऑफ़र आया था, लेकिन उस पर मैं फिलहाल ग़ौर नहीं कर रहा हूँ. और खाना कैसा खाना पसंद करते हैं आप? सादा खाना पसंद है मुझे. वो इसलिए कि जब डाइट पर नहीं होता तो हर चीज़ खाता हूँ लेकिन डाइट पर होता हूँ तो सादा खाता हूँ. उससे बिल्क़ुल फ़िट महसूस करता हूँ. आपका फ़ेवरेट क्रिकेटर? ब्रायन चार्ल्स लारा. क्या शानदार क्रिकेटर है लारा. बहुत ही उम्दा खिलाड़ी है वो. मैंने अपने क्रिकेट करियर में आज तक लारा को सिर्फ़ चार गेंदें ही फेंकी हैं. पिछले दस सालों में हमारे बीच तीन सिरीज़ हुईं लेकिन मैं उन्हें बॉलिंग ही नहीं कर सका. सुना है अपनी माँ से बहुत क़रीब हैं आप. बात करते हैं? हमेशा बात करता हूँ. कोशिश करता हूँ कि बात कर लूँ. अगर आपको अथॉरिटी दी जाए कि पाकिस्तानी क्रिकेट में मनचाहा बदलाव कर सकते हैं तो वो क्या होगा? क्रिकेट में पैसा लाऊँगा. इसके अलावा पाकिस्तानी क्रिकेट को चलाने वाले सिस्टम में भी बदलाव करना ज़रूरी होगा. और अगर आपको ये वरदान मिल जाए कि आप अपनी पसंद के किसी भी इंसान से मिल सकते हैं. तो वो कौन होगा? आप यक़ीन नहीं करेंगें. लेकिन मैंनें जितना पढ़ा है मोहम्मद अली जिन्ना और महात्मा गाँधी के बारे में, मैं उनसे मिलकर ज़रूर जानना चाहूँगा कि क्या राज़ है उनके आश्चर्यजनक और चमत्कारिक व्यक्तित्व का. लाखों-करोड़ों लोग जो शोएब अख़्तर बनना चाहते हैं, उनके लिए क्या मैसेज होगा? देखिए, दूसरों की बातों या आलोचनाओं की परवाह किए बिना अपने लक्ष्य पर दिमाग बनाए रखना चाहिए, क्योंकि आप जिस भी जगह जाएँगे वहीं आपकी टांग खींचने वाले लोग मिलेंगे. लेकिन अगर दृढ़निश्चय होगा तो मंज़िल मिलेगी. और अगर बुरा वक़्त चल रहा हो तो बेहतर है कि वेट एंड वॉच की नीति अपनाई जाए. मेरा कहना है कि अच्छे आदमियों को तकलीफ़ आती है, उससे विचलित नहीं होना चाहिए. |
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