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छोटी गोल्फर की बड़ी उपलब्धियाँ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मथारू के माता-पिता पचास साल पहले पंजाब से इंगलैंड आए थे. ग्यारह साल की किरण मथारू जब पहली बार कुकरीज़ हॉल गोल्फ क्लब में अपने पिता के साथ गई तो उस क्लब के एक सदस्य ने कहा था, "तुम बिल्कुल एक नेचुरल गोल्फर हो, क्या मैं तुम्हारा कोच बन सकता हूँ?" बात बिल्कुल सही थी और किरण को भी इसी दिन का इंतज़ार था. एक एमेच्योर प्रोफे़शनल खिलाड़ी के तौर पर खेलने के लिए किरण के पास अभी सात साल का समय था. बस सात साल का फ़ासला और एक ज़बर्दस्त गोल्फ करियर! उस दिन को याद करते हुए मथारू बिना संकोच कहती हैं, "उससे पहले मुझे मालूम भी नहीं था कि गोल्फ होता क्या है. मैं तो बस अपने पिता के साथ गई थी और यूँ ही हाथ आज़माया." "तभी एक कोच ने कहा कि मैं एक नेचुरल गोल्फ़र हूँ और मुझे खेलना शुरू कर देना चाहिए और मैंने ऐसा ही किया." गोल्फ़ के रेंज में पहली बार जाने के एक साल बाद ही लीड्स निवासी किरण यॉर्कशायर की अंडर-16 टीम की कप्तान बन चुकी थीं. 2003 तक घरेलू टूर्नामेंटों में अपनी धूम मचाने के बाद 2004 में पहली बार उनका अंतरराष्ट्रीय करियर शुरू हुआ जब उनकी प्रतिद्वंद्वी ज़्यादातर उनसे कहीं अधिक उम्र की होती थीं. अब भी मथारू केवल 15 साल की थीं और स्कूल से आने के बाद उनका सारा समय गोल्फ़ की प्रैक्टिस में ही जाता था. साल-दर-साल ट्राफियाँ भी आती गईं और सबसे कम उम्र की होने की वजह से उनके प्रति एक ख़ास आकर्षण भी होता था. 2005 में फ्लोरिडा में हुई विश्व चैम्पियनशिप प्रतियोगिताओं में से दो में वह उपविजेता रहीं और अपना फाल्डो सिरीज़ ख़िताब बचाने में भी वह कामयाब रहीं. किरण वर्ष 2006 में इंग्लिश लेडीज़ एमेच्योर चैम्पियनशिप की अब तक की सबसे कम उम्र की विजेता रहीं और कर्टिस कप में सबसे कम उम्र की खिलाड़ी भी. एमेच्योर से प्रोफेशनल लेकिन किरण का सपना प्रोफेशनल गोल्फ में कुछ कर दिखाने का था. अगस्त 2006 में वेल्स लेडीज़ चैम्पियशिप के साथ उन्होंने इसकी शुरुआत भी कर दी. दुबई लेडीज़ मास्टर्स में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी. पहले दौर में तीसरे स्थान पर रहने के बाद वह आख़िर में 19 वें स्थान पर रहीं. मथारू हमेशा से अमरीका जाकर खेलना चाहती रही हैं लेकिन अठारह साल से कम उम्र की वजह से उन्हें इसकी आधिकारिक अनुमति नहीं मिल पाई. बहरहाल, इसका फ़ायदा यूरोप को मिला है, किरण मथारू के रूप में. किरण की तुलना अभी से अमरीकी गोल्फ़र स्टार मिशेल वाई से की जाने लगी है, जो भले ही उम्र में मथारू से आठ साल छोटी हों मगर विश्व रैंकिंग में उनसे 477 स्थान आगे हैं. मथारू कहती हैं, "वाई की उपलब्धियाँ बहुत बड़ी हैं और उनसे मेरी तुलना किया जाना अच्छा लगता है." | इससे जुड़ी ख़बरें ड्रेस कोड और ईरान की महिला खिलाड़ी17 अगस्त, 2004 | खेल 'महिला क्रिकेट उपेक्षा का शिकार'28 मई, 2005 | खेल लड़कों के साथ क्रिकेट खेलने पर ऐतराज़ करते थे लोग...06 मार्च, 2007 | खेल उम्मीद से भरी है आगे की राह...06 मार्च, 2007 | खेल 'हम भी किसी से कम नहीं'06 मार्च, 2007 | खेल जीव मिल्खा सिंह ने प्रतियोगिता जीती30 अक्तूबर, 2006 | खेल यह सपनों का साल था: जीव मिल्खा सिंह28 दिसंबर, 2006 | खेल कार दुर्घटना: अटवाल जाँच के घेरे में12 मार्च, 2007 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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