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यह सपनों का साल था: जीव मिल्खा सिंह | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जीव मिल्खा सिंह इस साल के सर्वाधिक संभावनाशील खिलाड़ियों में से रहे. उनकी सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस वर्ष वर्ल्ड रैंकिंग में वे 310 पायदान की छलांग लगाकर 347वें से 37वें स्थान पर पहुँच गए हैं. इस साल उन्होंने स्पेन में जीता वोल्वो मास्टर्स जो उनके कैरियर की सबसे बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है. जीव मिल्खा सिंह से रजत चानना की बातचीत के अंश. कैसा लग रहा आपको अपनी इस उपलब्धि पर? मैं बहुत खुश हूँ और अपने आप को बहुत लकी समझता हूँ कि यह साल मेरे लिए बहुत अच्छा निकला और जब मुझे प्लेयर्स प्लेयर अवार्ड मिला तो मुझे वो एक बहुत बड़ा सम्मान लगा जो खिलाड़ियों से मिला और कोशिश करूँगा कि आने वाले साल में भी अपना अच्छा प्रदर्शन बरकरार रख सकूँ. इस साल तो आपने चार बार खिताबी जीत दर्ज की. यह साल मेरा ड्रीम साल था क्योंकि मैंने इस साल चार टूर्नामेंट भी जीते. जब मैंने साल शुरू किया था तो मुझे मालूम नहीं था कि मैं इतने टूर्नामेंट जीतूँगा. इस साल सोचा था कि एक ही जीत जाऊँ तो वही बहुत है. लेकिन जब मैंने स्पेन वोल्वो मास्टर्स जीता तो मेरे हिसाब से साल की सबसे बड़ी जीत वही थी मेरे लिए. हर खिलाड़ी के जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं. लेकिन, एक वक़्त आता है जब उसका जीवन एकदम बदल जाता है तो आपके कैरियर में अब तक का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट क्या रहा? मेरा टर्निंग प्वाइंट तो यह पूरा साल ही रहा लेकिन वोल्वो चाईना ओपन की जीत से मेरा आत्मविश्वास बहुत बढ़ा और अब मैं विश्व रैंकिंग में टॉप 50 में आ गया हूँ और मेरी रैंकिंग अब 37वीं है. कोशिश यही होगी की आगे भी और अच्छा प्रदर्शन कर सकूँ. इस साल कई टूर्नामेंटों में आप दूसरे और तीसरे स्थान पर आए लेकिन खिताबी जीत नहीं दर्ज कर पाए. अपनी अच्छी फॉर्म को बरकरार करने के लिए क्या करेंगे? गोल्फ एक ऐसा खेल है जिसमें 100 पर्सेंट कंसीस्टैंसी होती नहीं है और आप एक भी टूर्नामेंट जीत जाएँ तो उसे बहुत अच्छा माना जाता है. टॉप टेन में भी आना बहुत अच्छा होता है तो मेरी तो यही कोशिश है कि अगले साल अगर मैं इस साल के आस-पास भी जैसा प्रदर्शन कर लूँ तो मैं उसे बहुत अच्छा समझूँगा. आपके के अलावा ज्योति रंधावा ने भी काफी अच्छा प्रदर्शन किया तो आपको क्या लगता है कि गोल्फ़ में भारत की दावेदारी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है? बहुत अच्छी रही भारत की दावेदारी. डैनियल चोपड़ा, शिव कपूर सबने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया. इस साल दुनिया के बड़े-बड़े सर्किटों पर और अगर हमें अच्छे स्पॉन्सर्स मिले तो हमारी दावेदारी और भी अच्छी हो सकती है. गोल्फ एक महंगा खेल है तो इस हिसाब से भारत की दावेदारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाने के लिए क्या करना होगा? सबसे पहले सरकार से मदद चाहिए. जैसे कि और पब्लिक गोल्फ़ कोर्स खोलें ताकि कोई भी व्यक्ति गोल्फ खोल सके. उसके अलावा कॉर्पोरेट हाउसेस से भी मदद चाहिए ताकि हमारा अनुभव और अच्छा हो सके और हमारी दावेदारी काफी अच्छा हो जाए बड़े सर्किटों के लिए. | इससे जुड़ी ख़बरें जीव मिल्खा सिंह ने प्रतियोगिता जीती30 अक्तूबर, 2006 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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