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ये हैं विश्व कप के लिए पापड़ बेलने वाले

 रविवार, 13 जुलाई, 2014 को 18:06 IST तक के समाचार
फ़ुटबॉल प्रशंसक

एक महीने से उनकी हर साँस में फ़ुटबॉल विश्व कप बसा है. उन्होंने अपनी पसंदीदा टीम के हर मैच की हर किक पर आँखें गढ़ाए रखी हैं. कुछ ने तो विश्वकप में खेले गए हर मैच के हर एक पल को देखा है.

इन क्लिक करें प्रशंसकों ने नौकरियों के मौके गंवाए, बीमारी का बहाना बनाया, काम की दुहाई दी और दोस्त खोए. ये फ़ुटबॉल के सुपरफ़ैन हैं जिन्हें अब विश्व कप के बाद की ज़िंदग़ी की फ़िक्र है.

अमरीन भुजवाला, बंगलौर, भारत

अमरीन भुजवाला

जून में विश्व कप शुरू होने से कुछ दिन पहले ही मैंने नौकरी छोड़ी थी.

मैंने विश्व कप ख़त्म होने तक नई नौकरी न करने का फ़ैसला किया क्योंकि इससे मेरे मैच देखने पर असर पड़ता. अब विश्व कप के बाद मैं फिर से नौकरी तलाशूंगी.

मैच भारतीय समयानुसार देर रात हो रहे हैं इसलिए मैं मैच देखती रही हूं, लेकिन मुझे इस सबका कोई अफ़सोस नहीं है.

मैंने अब तक इस विश्व कप का हर मैच देखा है.

मैं जर्मनी की प्रशंसक हूँ. मैं चाहती हूँ कि वो विजेता बने.

मेली कोकागिल, इस्तांबुल, तुर्की

मेलिह कोकागिल

मैं इस्तांबुल के क्लब बेसिकतास का बहुत बड़ा फ़ैन हूँ. मैं इस्तांबुल के आबासागा इलाक़े में रहता हूँ.

विश्व कप में मेरी पसंदीदा टीमें चिली और पुर्तगाल थीं. पुर्तगाल के पहले ही दौर से बाहर होने का मुझे बहुत दुख हुआ.

मैंने विश्व कप का प्रत्येक मैच देखने की हरसंभव कोशिश की.

चिली और नीदरलैंड्स के बीच खेला गया ग्रुप मैच मुझे ऑफ़िस से बहाना बनाकर देखना पड़ा.

मेरे हिसाब से क्लिक करें जर्मनी को इस बार जीतना चाहिए.

फ़रीद अब्बासजादे, बाकू, अज़रबैजान

फ़रीद अब्बासजादे

देर रात तक मैच चलने के कारण मुझे दफ़्तर पहुंचने में देर हो जाती है और कभी-कभी नाश्ता भी छोड़ना पड़ता है.

लेकिन फ़ुटबॉल के लिए देर तक जागना मुझे आत्मिक रूप से संतुष्ट करता है. जब मैं लेट पहुँचता हूं तो मेरे टीमलीडर मेरी परेशानी समझ जाते हैं क्योंकि वो ख़ुद ब्रितानी हैं.

मेरे लिए विश्व कप की शुरुआत बहुत नकारात्मक रही क्योंकि मेरी प्रिय टीमें इंग्लैंड, बोस्निया और पुर्तगाल पहले ही दौर में बाहर हो गईं.

क्लिक करें यह जीत का जश्न है..

फ़ुटबॉल विश्व कप की वजह से मैं अपने दोस्तों से नहीं मिल पाया जिसका उन्हें बुरा भी लगा, लेकिन विश्व कप ख़त्म होने के बाद मैं उन सबसे मिलूंगा.

गैब मारुतो सिगित, जकार्ता, इंडोनेशिया

गैब मारूतो

मैं इस विश्व कप में सिर्फ़ इंग्लैंड के ही मैच देखना चाहता था.

जब मैं 17 साल का हुआ तो मेरे जन्मदिन पर मेरी मां ने मुझे इंग्लैंड की टीम का बड़ा पोस्टर भेंट किया और अगले ही दिन मेरे सभी दोस्त उसे देखने मेरे घर पर पहुँचे.

यह कहने की ज़रूरत नहीं है कि जब इंग्लैंड की टीम पहले ही दौर से बाहर हो गई तो मैं बहुत रोया. उसके बाद बाक़ी विश्व कप में मेरी दिलचस्पी नहीं बची.

अब जब विश्व कप ख़त्म ही होने वाला है तो मैं इंग्लिश प्रीमियर लीग देखने का इंतज़ार कर रहा हूं.

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