कब, कैसे आगे बढ़ी विश्व कप फ़ुटबॉल की कहानी

  • 10 जून 2014

विश्व कप का इतिहास

विश्व कप फ़ुटबॉल यानी फ़ीफ़ा विश्व कप, खेल की दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में से एक माना जाता है. फ़ेडरेशन इंटरनेशनल डी फ़ुटबॉल एसोसिएशन (फ़ीफ़ा) का गठन 1904 में पेरिस में हुआ था.

1920 के दशक में फ़ीफ़ा के अध्यक्ष जूल्स रिमे और फ़्रांस के फ़ुटबॉल प्रशासकों ने दुनिया की बेहतरीन फ़ुटबॉल टीम तय करने के लिए प्रतियोगिता कराने का विचार किया. 1929 में फ़ीफ़ा ने एक प्रस्ताव पारित करके विश्व कप फ़ुटबॉल आयोजित कराने का फ़ैसला किया.

1930 में शुरू हुई ये प्रतियोगिता हर चार साल पर आयोजित होती है. दूसरे विश्व युद्ध के कारण 1942 और 1946 में विश्व कप फ़ुटबॉल का आयोजन नहीं हुआ था.

विश्व कप फ़ुटबॉल तो चार साल के अंतराल पर होता है, लेकिन इस बीच क्वालीफ़ाइंग राउंड चलते रहते हैं. 1998 के विश्व कप से इस प्रतियोगिता में 32 टीमें शामिल होने लगी हैं.

दुनिया की बेहतरीन फ़ुटबॉल टीम मानी जाने वाली ब्राज़ील की टीम ने अब तक सबसे ज़्यादा पाँच बार विश्व कप का ख़िताब जीता है. इटली ने चार और जर्मनी ने तीन बार ख़िताब पर क़ब्ज़ा किया है.

1930 से हुई विश्व कप प्रतियोगिताओं की विजेता सिर्फ़ सात टीमें ही बन पाई हैं. फिर भी विश्व कप ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. 1950 में अमरीका ने इंग्लैंड को हरा दिया था जबकि 1966 में इटली को उत्तर कोरिया के हाथों पिटना पड़ा था.

1980 के दशक में कैमरून का उदभव और 1990 में अपने ख़िताब की रक्षा करने उतरी अर्जेंटीना की टीम का अपने पहले ही मैच में हार जाना- ऐसी कई उठा-पटक की घटनाएँ विश्व कप के इतिहास ने अपने आप में समेटा हुआ है.

आइए नज़र डालें विश्व कप फ़ुटबॉल के इतिहास पर.

उरुग्वे 1930

1930 में जब पहला विश्व कप आयोजित करने का फ़ैसला हुआ, तब उरुग्वे को विश्व कप की मेज़बानी का मौक़ा मिला. उरुग्वे की टीम उस समय ओलंपिक चैम्पियन थी.

यह पहला विश्व कप था, जिसमें देशों को बिना क्वालीफ़ाइंग राउंड खेले ही शामिल होने का न्यौता मिला.

लेकिन कई देशों ने आने-जाने में आने वाले भारी-भरकम ख़र्च को देखते हुए अपने को इस प्रतियोगिता से दूर रखा.

फिर भी इस प्रतियोगिता में 13 देशों ने हिस्सा लिया, लेकिन यूरोप के सिर्फ़ चार देश ही प्रतियोगिता में खेलने आए. ये देश थे- फ़्रांस, बेल्जियम, यूगोस्लाविया और रोमानिया.

इन 13 टीमों को चार अलग-अलग ग्रुपों में रखा गया. विश्व कप का पहला मैच 13 जुलाई, 1930 को फ़्रांस और मैक्सिको के बीच खेला गया.

इस मैच को देखने के लिए कुछ हज़ार दर्शक ही मौजूद थे. जीत मिली फ़्रांस को, जिसने मैक्सिको को 4-1 से मात दी, लेकिन आख़िरकार युगोस्लाविया के अलावा कोई भी यूरोपीय टीम दूसरे चरण में नहीं पहुँच पाई.

सेमी फ़ाइनल में उरुग्वे का मुक़ाबला यूगोस्लाविया से और अर्जेंटीना का मुक़ाबला अमरीका से हुआ.

इस प्रतियोगिता में सेमी फ़ाइनल के पहले तक शानदार प्रदर्शन करने वाली यूगोस्लाविया की टीम सेमी फ़ाइनल में मेज़बान उरुग्वे से 1-6 से हार गई.

जबकि अर्जेंटीना ने अमरीका को इतने ही अंतर से पीटा. 30 जुलाई को पहले विश्व कप का फ़ाइनल उरुग्वे और अर्जेंटीना के बीच खेला गया.

मैच रोमांचक था और दोनों टीमों के बीच संघर्ष देखते ही बन रहा था. पहले फ़ाइनल को क़रीब 93 हज़ार लोगों ने देखा. हाफ़ टाइम तक अर्जेंटीना की टीम 2-1 से आगे थी.

लेकिन दूसरे हाफ़ में एक के बाद एक तीन गोल करके उरुग्वे ने 4-2 से जीत हासिल की और पहले विश्व कप का ख़िताब जीतने में कामयाबी पाई.

इटली 1934

1934 में फ़ुटबॉल विश्व कप की मेज़बानी मिली इटली को. मेज़बानी की दौड़ में इटली और स्वीडन ही शामिल थे और मौक़ा मिला इटली को.

लेकिन फ़ीफ़ा के इस फ़ैसले पर आश्चर्य भी व्यक्त किया गया क्योंकि उस समय इटली की बागडोर थी मुसोलिनी के हाथों में.

यहाँ तक कहा गया कि मुसोलिनी ने विश्व कप को अपने प्रचार-प्रसार के लिए इस्तेमाल किया. आरोप तो यहाँ तक लगाए जाते हैं कि इटली के मैचों में रेफ़री तक मुसोलिनी के कहने पर नियुक्त हुए.

कहा तो यहाँ तक जाता है कि स्वीडन के जिस रेफ़री ने सेमी फ़ाइनल और फ़ाइनल मैच कराया था, उसने पहले मुसोलिनी से मुलाक़ात की थी. कुछ रेफ़री ने तो इटली के पक्ष में इतने फ़ैसले दिए कि बाद में उनके देशों ने उन्हें हटा दिया.

विवादों की छाया में हुए इस विश्व कप में ऐसा पहली बार हुआ कि पिछली चैम्पियन टीम ने प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया.

उरुग्वे ने यह कहते हुए इटली आने से इनकार कर दिया कि पिछले विश्व कप में कम ही यूरोपीय देशों ने हिस्सा लिया था.

यह पहला विश्व कप था, जिसमें टीमों को हिस्सा लेने के लिए क्वालीफ़ाइंग राउंड खेलना पड़ा. मेज़बान इटली भी इसमें शामिल था.

कुल मिलाकर 16 टीमें इस प्रतियोगिता में खेलीं. इस विश्व कप में पहले राउंड से नॉक आउट स्टेज तक यूरोप की आठ टीमें पहुँचीं. ये टीमें थीं- ऑस्ट्रिया, चेकोस्लोवाकिया, जर्मनी, हंगरी, इटली, स्पेन, स्वीडन और स्विट्ज़रलैंड.

क्वार्टर फ़ाइनल में पहली बार ऐसा हुआ जब मैच दोबारा खेला गया. इटली और स्पेन के बीच मैच अतिरिक्त समय तक खिंचा, लेकिन स्कोर रहा 1-1. मैच दोबारा खेला गया और इटली ने स्पेन को 1-0 से हरा दिया.

सेमी फ़ाइनल में मेज़बान इटली ने ऑस्ट्रिया को 1-0 से हराकर फ़ाइनल में जगह बनाई. जबकि दूसरे सेमी फ़ाइनल में चेकोस्लोवाकिया ने जर्मनी को 3-1 से हराया.

फ़ाइनल में 70 मिनट तक चेकोस्लोवाकिया की टीम 1-0 से आगे थी. लेकिन मैच ख़त्म होने से पहले किसी तरह इटली की टीम एक गोल करने में सफल रही.

मैच 1-1 से बराबर हो गया. इसके बाद फ़ाइनल अतिरिक्त समय में गया, जहाँ इटली की टीम ने गोल करके ख़िताब पर क़ब्ज़ा कर लिया.

फ्रांस 1938

1938 की विश्व कप की मेज़बानी मिली फ़्रांस को. यह लगातार दूसरी बार था, जब विश्व कप की मेज़बानी किसी यूरोपीय देश को मिली.

लेकिन फ़ीफ़ा के इस फ़ैसले से दक्षिणी अमरीकी देश काफ़ी नाराज़ हुए. उनकी मांग थी कि विश्व कप की मेज़बानी बारी-बारी से यूरोप और दक्षिणी अमरीकी देशों को मिले.

इस फ़ैसले के विरोध में अर्जेंटीना और उरुग्वे ने प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया.

दूसरे विश्व युद्ध की छाया में इस बार का विश्व कप हो रहा था. स्पेन में गृह युद्ध चल रहा था. इटली ने इथियोपिया पर आक्रमण कर दिया था और जर्मनी ने ऑस्ट्रिया को अपने में मिला लिया था.

माना जाता है कि जिस तरह 1934 के विश्व कप का इस्तेमाल मुसोलिनी ने अपने प्रचार-प्रसार के लिए किया, उसी तरह हिटलर ने 1938 के विश्व कप का इस्तेमाल किया.

यह पहला मौक़ा था, जब मेज़बान देश और पिछली विजेता टीम को विश्व कप में सीधे प्रवेश मिला. इस बार विश्व कप में 15 टीमों ने हिस्सा लिया.

पहले दौर के पाँच मैचों का फ़ैसला अतिरिक्त समय में हुआ जबकि दो मैच दोबारा खेले गए. इस प्रतियोगिता में ब्राज़ील के लियोनिडस का खेल देखने लायक़ था. 'द ब्लैक डायमंड' के रूप में मशहूर लियोनिडस ने कई बेहतरीन गोल दाग़े.

लेकिन सेमी फ़ाइनल में उन्हें आराम देने का टीम प्रबंधन का फ़ैसला आत्मघाती साबित हुआ. लियोनिडस की अनुपस्थिति में ब्राज़ील की टीम सेमी फ़ाइनल में इटली से हार गई. जबकि दूसरे सेमी फ़ाइनल में हंगरी ने स्वीडन को 5-1 से पीटा.

तीसरे स्थान के लिए हुए मैच में लियोनिडस की ब्राज़ील की ओर से वापसी हुई और ब्राज़ील की शानदार जीत भी हुई. ब्राज़ील को तीसरे स्थान से ही संतोष करना पड़ा.

फ़ाइनल में इटली का सामना था हंगरी से. जिसके खिलाड़ी कमोबेश उनकी तरह की फ़ुटबॉल खेलते थे. पेरिस में हुए इस मैच में इटली ने पहले बढ़त हासिल की लेकिन जल्द ही हंगरी ने स्कोर बराबर कर दिया.

इटली ने जल्द ही एक बार फिर बढ़त हासिल कर ली. पहले हाफ़ की समाप्ति पर इटली की टीम 3-1 से आगे थी. आख़िरकार इटली ने 4-2 से जीत हासिल कर लगातार दूसरी बार विश्व कप जीतने वाली पहली टीम बनने का गौरव हासिल किया.

इस विश्व कप के 15 महीने के अंदर दूसरा विश्व युद्ध शुरू हो गया और 12 साल तक यह प्रतियोगिता आयोजित नहीं हो पाई.

ब्राज़ील 1950

दूसरे विश्व युद्ध के कारण 12 साल बाद फ़ीफ़ा ने विश्व कप आयोजित कराने का फ़ैसला किया. हालाँकि यूरोपीय देश अभी भी विश्व युद्ध के प्रभाव से जूझ रहे थे.

फ़ीफ़ा ने इस बार दक्षिणी अमरीकी देश को मेज़बानी देने का फ़ैसला किया और वह सौभाग्यशाली देश था ब्राज़ील.

इस बार प्रतियोगिता के स्वरूप में थोड़ा बदलाव किया गया. पहले राउंड में टीमों को चार ग्रुप में रखा गया और ग्रुप के विजेताओं को फ़ाइनल ग्रुप में खेलने का मौक़ा मिला.

फ़ाइनल ग्रुप में खेलने वाली टीमों में शीर्ष टीम को ख़िताब दिया गया. इस आधार पर यह पहला और एकमात्र विश्व कप था, जिसमें फ़ाइनल मैच नहीं खेला गया. बल्कि अंक के आधार पर टीम को विजेता घोषित किया गया.

इस विश्व कप में ट्रॉफ़ी को नाम दिया गया ज़ूल्स रिमे कप. ज़ूल्स रिमे विश्व कप के संस्थापक थे और उस समय फ़ीफ़ा के अध्यक्ष थे. इस वर्ष पहली बार विश्व कप में शामिल हुई इंग्लैंड की टीम. लेकिन अर्जेंटीना ने ब्राज़ील से मतभेद के कारण विश्व कप से नाम वापस ले लिया.

विश्व युद्ध का प्रभाव ये था कि फ़ीफ़ा ने जर्मनी को निकाल दिया जबकि ऑस्ट्रिया, इक्वेडोर और बेल्जियम की टीम भी विश्व कप में खेलने नहीं आईं.

कई टीमों की अनुपस्थिति में भारत की टीम भी पहली बार विश्व कप के लिए क्वालीफ़ाई कर गई, लेकिन नंगे पाँव होने के कारण फ़ीफ़ा ने भारतीय टीम को खेलने नहीं दिया.

पहली बार विश्व कप में खेल रही इंग्लैंड की टीम को ख़िताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. पहले तो टीम को उस समय करारा झटका लगा, जब अमरीका ने इंग्लैंड को 1-0 से हरा दिया.

इसे विश्व कप के सबसे बड़े उलटफेर में से एक माना जाता है. इंग्लैंड की टीम स्पेन से भी 1-0 से हारकर पहले दौर से ही बाहर हो गई. फ़ाइनल राउंड में उसे जाने का मौक़ा तक नहीं मिला.

ग्रुप स्टेज से फ़ाइनल राउंड में पहुँचने वाली चार टीमें थीं- ब्राज़ील, स्पेन, स्वीडन और उरुग्वे. इस प्रतियोगिता में सबसे शानदार प्रदर्शन कर रही थी मेज़बान ब्राज़ील की टीम.

फ़ाइनल राउंड की भी ब्राज़ील ने इसी अंदाज़ में शुरुआत की. उसने स्वीडन को 7-1 और स्पेन को 6-1 से मात दी. निर्णायक मैच के पहले ब्राज़ील की टीम फ़ाइनल ग्रुप में शीर्ष पर थी. ब्राज़ील और उरुग्वे के बीच निर्णायक मैच देखने के लिए लाखों की संख्या में दर्शक जुटे.

ख़िताब की दावेदार मानी जा रही थी ब्राज़ील की टीम, लेकिन हुआ उल्टा. उरुग्वे ने ब्राज़ील को 2-1 से हराकर दूसरी बार विश्व कप के ख़िताब़ पर क़ब्ज़ा कर लिया.

स्विट्ज़रलैंड 1954

1954 का विश्व कप स्विट्ज़रलैंड में आयोजित हुआ. इस साल फ़ीफ़ा के गठन की 50वीं सालगिरह थी और उस समय फ़ीफ़ा का मुख्यालय ज्यूरिख में ही था.

एक बार फिर विश्व कप के स्वरूप को पहले जैसा ही कर दिया गया. इस प्रतियोगिता में वरीयता पद्धति को भी महत्व दिया गया. ये तय किया गया कि रैंकिंग में चार शीर्ष टीमें एक-दूसरे से पहले दौर में नहीं खेलेंगी.

अर्जेंटीना ने इस विश्व कप का भी बहिष्कार किया, लेकिन पश्चिम जर्मनी की टीम ने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया. पहली बार उरुग्वे ने भी यूरोप में आकर विश्व कप में शामिल होने का फ़ैसला किया.

इस विश्व कप में हंगरी को ख़िताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा था. हंगरी की टीम 1952 की ओलंपिक चैम्पियन थी और अभी भी मैदान पर उनका कोई सानी नहीं था. उनके खिलाड़ी जिस शैली से फ़ुटबॉल खेलते थे, उसे मात देना मुश्किल समझा जा रहा था, लेकिन सबसे शानदार शुरुआत की पश्चिम जर्मनी ने.

पश्चिम जर्मनी ने तुर्की को 4-1 से हराकर ज़बरदस्त शुरुआत की. लेकिन हंगरी की टीम भी कहाँ पीछे थी. ग्रुप मैच में उसने जर्मनी को 8-3 से हराकर जैसे प्रतियोगिता में अपने वर्चस्व का डंका पीट दिया. लेकिन आगे चलकर पश्चिमी जर्मनी की टीम ही उसके लिए काल साबित हुई.

क्वार्टर फ़ाइनल में उरुग्वे ने इंग्लैंड को 4-2 से मात दी, तो हंगरी ने ब्राज़ील को इसी अंतर से पीटा. सेमी फ़ाइनल मैच सबसे यादगार साबित हुआ जब मुक़ाबला उरुग्वे और हंगरी के बीच हुआ.

आख़िरकार अतिरिक्त समय में हंगरी ने उरुग्वे को हराकर फ़ाइनल में जगह बनाई. पश्चिमी जर्मनी की टीम सही समय पर ज़बरदस्त फ़ॉर्म में आई.

उसने सेमी फ़ाइनल में पड़ोसी ऑस्ट्रिया की टीम को 6-1 से पीटकर फ़ाइनल में प्रवेश किया.

फ़ाइनल मैच बड़ा नाटकीय साबित हुआ. एक समय हंगरी की टीम 2-0 से आगे चल रही थी.

लेकिन जर्मनी ने शानदार वापसी करते हुए पहले तो गोल उतारा और फिर बढ़त भी हासिल कर ली. इसी के साथ हंगरी के ख़िताब जीतने का सपना चकनाचूर हो गया.

स्वीडन 1958

1958 के विश्व कप की मेज़बानी मिली स्वीडन को. पहली बार इस विश्व कप में सोवियत संघ ने हिस्सा लिया और पहली बार ही ग्रेट ब्रिटेन के सभी देशों- इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड, ने हिस्सा लिया.

इस बार प्रतियोगिता के स्वरूप में फिर थोड़ा बदलाव हुआ. 16 टीमों ने विश्व कप के लिए क्वालीफ़ाई किया.

लेकिन इस बार ये तय किया गया कि सभी टीमें अपने ग्रुप में कम से कम एक बार सभी टीमों से खेलेंगी.

इस बार ग्रुप मैच ड्रॉ होने की सूरत में अतिरिक्त समय देने का प्रावधान ख़त्म कर दिया गया. पहली बार विश्व कप के मैचों का सीधा प्रसारण टीवी पर हुआ.

इस विश्व कप की एक और ख़ासियत थी- ब्राज़ील के स्टार खिलाड़ी पेले का उदभव.

इस विश्व कप से अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले पेले ने अगले कई वर्षों तक फ़ुटबॉल की दुनिया पर राज किया. इस विश्व कप में पेले ब्राज़ील के आख़िरी ग्रुप मैच से पहले तक नहीं खेल पाए थे.

सोवियत संघ के ख़िलाफ़ मैच में पेले को उतारा तो गया, लेकिन वे स्कोर कर पाने में नाकाम रहे. हालाँकि ब्राज़ील ने यह मैच 2-0 से जीत लिया.

इसी ग्रुप के एक प्ले ऑफ़ मैच में सोवियत संघ ने इंग्लैंड को हराकर प्रतियोगिता से बाहर कर दिया. मेज़बान स्वीडन के कोच थे इंग्लैंड के जॉर्ज रेनॉर.

उन्होंने पहले ही ये भविष्यवाणी कर दी थी कि उनकी टीम फ़ाइनल में ज़रूर पहुँचेगी. अपने पहले मैच में स्वीडन ने मैक्सिको को 3-0 से हराया.

इसके बाद हंगरी, सोवियत संघ और फिर सेमी फ़ाइनल में पश्चिम जर्मनी को हराकर स्वीडन ने फ़ाइनल में जगह बनाई.

दूसरे सेमी फ़ाइनल में ब्राज़ील की भिड़ंत हुई फ़्रांस से. दर्शकों को एक ज़बरदस्त मैच देखने को मिला.

पेले भी शानदार फ़ॉर्म में थे. उन्होंने हैट-ट्रिक लगाई और ब्राज़ील ने फ़्रांस को 5-2 से मात दी. फ़्रांस की ओर से दोनों गोल मारे ज़ुस्ट फ़ोन्टेन ने. जिन्होंने इस विश्व कप में कुल 13 गोल मारे, जो आज भी विश्व रिकॉर्ड है.

फ़ाइनल में ब्राज़ील और स्वीडन की टीमें आमने-सामने थी. चौथे मिनट में ही स्वीडन ने 1-0 की बढ़त हासिल कर ली.

पेले और वावा के दो-दो गोलों की बदौलत ब्राज़ील ने आख़िरकार 5-2 से जीत हासिल कर पहली बार विश्व कप के ख़िताब पर क़ब्ज़ा कर लिया.

चिली 1962

लगातार दो बार यूरोप में विश्व कप आयोजित कराने के बाद फ़ीफ़ा ने विश्व कप की मेज़बानी दक्षिणी अमरीकी देश को देने का फ़ैसला किया.

यहाँ मुक़ाबला था अर्जेंटीना और चिली में. 1960 में चिली में ज़बरदस्त भूकंप आया था और हज़ारों लोग मारे गए थे, लेकिन चिली के उत्साह में कोई कमी नहीं थी.

चिली में फ़ुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष डिटबॉर्न की भावुक अपील का असर पड़ा और चिली को मेज़बानी का मौक़ा मिला या यों कहें कि भूकंप के बाद स्टेडियम के निर्माण के साथ पुनर्निर्माण का काम शुरू हुआ.

चार साल पहले ख़िताब जीतने वाली ब्राज़ील की टीम इस बार भी ख़िताब की प्रबल दावेदार थी. ब्राज़ील की टीम में कोई ख़ास बदलाव नहीं हुआ था.

ये ज़रूर था कि पेले अब 21 साल के हो गए थे और उनकी प्रतिभा में दिनों-दिन निखार आ रहा था. उनके साथ गरिंचा जैसे खिलाड़ी भी ब्राज़ील की शोभा बढ़ा रहे थे.

अपने ग्रुप में ब्राज़ील का प्रदर्शन शुरू से ही शानदार रहा. लेकिन इसके लिए उसे क़ीमत भी चुकानी पड़ी. ब्राज़ील के पहले मैच से ही पेले ज़बरदस्त फ़ॉर्म में थे.

लेकिन चेकोस्लोवाकिया के ख़िलाफ़ मैच में पेले घायल हो गए. मैच तो ड्रॉ रहा, लेकिन पेले के जांघ की मांसपेशियाँ खिंच गईं. पेले इसके बाद कोई मैच नहीं खेल पाए.

उनकी जगह एमारिल्डो को टीम में शामिल किया गया. एमारिल्डो ने अपने खेल से सबका ध्यान खींचा और उन्हें 'ह्वाइट पेले' तक कहा गया. साथ ही गरिंचा और वावा पर भी टीम की ज़िम्मेदारी आ पड़ी, जिसे उन्होंने बख़ूबी निभाया भी.

मेज़बान चिली और इटली के बीच हुआ मैच काफ़ी चर्चित हुआ. लेकिन शानदार प्रदर्शन के कारण नहीं बल्कि मैदान में घटी घटनाओं के कारण.

खिलाड़ी एक-दूसरे से ख़ूब उलझे. इटली के दो खिलाड़ियों को मैदान से बाहर भी किया गया, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ. मेज़बान चिली ने यह मैच 2-0 से जीत तो लिया लेकिन सैंटियागो में हुआ यह मैच ग़लत कारणों से चर्चा में रहा.

क्वार्टर फ़ाइनल में मेज़बान चिली ने सोवियत संघ को हराकर एक बड़ा उलटफेर किया. एक अन्य क्वार्टर फ़ाइनल मैच में गरिंचा के शानदार खेल की बदौलत ब्राज़ील ने इंग्लैंड को 3-1 से पीटा.

यूगोस्लाविया ने जर्मनी को हराया तो चेकोस्लोवाकिया ने हंगरी को प्रतियोगिता से बाहर किया. सेमी फ़ाइनल में चेकोस्लोवाकिया ने यूगोस्लाविया को 3-1 से मात दी तो ब्राज़ील ने मेज़बान चिली को 4-2 से हराकर लगातार फ़ाइनल में जगह बनाई.

फ़ाइनल में ब्राज़ील और चेकोस्लोवाकिया आमने-सामने थे. एक बार फिर ब्राज़ील की टीम 1-0 से पिछड़ गई.

लेकिन उन्होंने मैच में फिर वापसी की. ब्राज़ील ने तीन गोल करके मैच 3-1 से जीत लिया और लगातार दूसरी बार विश्व कप का ख़िताब अपने नाम किया वो भी अपने स्टार खिलाड़ी पेले की अनुपस्थिति में.

इंग्लैंड 1966

1966 में विश्व कप की मेज़बानी मिली इंग्लैंड को. यह विश्व कप काफ़ी चर्चित रहा लेकिन विवादों के कारण ज़्यादा.

इंग्लैंड और पश्चिम जर्मनी के बीच हुए फ़ाइनल में ज्योफ़ हर्स्ट का 'विवादित गोल' अभी भी दोनों देशों के फ़ुटबॉल प्रेमियों की ज़ुबान पर रहता है.

और तो और विश्व कप शुरू होने से चार महीने पहले ज़ुल्स रिमे ट्रॉफ़ी ही ग़ायब हो गई. हालाँकि बाद में लंदन के एक गॉर्डन से यह ट्रॉफ़ी मिली.

यह पहला विश्व कप था जिसमें एक शुभंकर चुना गया और मार्केटिंग के लिए विश्व कप का आधिकारिक लोगो भी तैयार कर दिया गया.

ब्राज़ील की टीम में 1962 के कई खिलाड़ी शामिल थे. कई महान खिलाड़ी पुर्तगाल की टीम की शोभा बढ़ा रहे थे.

जर्मनी और सोवियत संघ की टीम भी काफ़ी मज़बूत थी. लेकिन मेज़बान इंग्लैंड टीम को भी जानकार कम नहीं आँक रहे थे, ख़ासकर मेज़बान देश के रूप में.

इंग्लैंड ने शुरुआत तो ठीक-ठाक की. फ़्रांस के ख़िलाफ़ 2-0 से जीत हासिल कर इंग्लैंड ने क्वार्टर फ़ाइनल में जगह बना ली.

क्वार्टर फ़ाइनल में अर्जेंटीना और बेकेनबावर जैसे खिलाड़ियों से सजी पश्चिम जर्मनी की टीम को भी जगह मिली. लेकिन सबसे कठिन ग्रुप था ब्राज़ील का.

इस ग्रुप में ब्राज़ील के साथ हंगरी, पुर्तगाल और बुल्गारिया की टीमें थीं.

ग्रुप के पहले मैच में ही बुल्गारियाई खिलाड़ियों के ख़राब खेल की गाज गिरी पेले पर, जो 1962 के विश्व कप में भी ज़्यादातर मैच में नहीं खेल पाए थे.

फ़ाउल के कारण पेले को मैदान से ले जाना पड़ा. हालाँकि ब्राज़ील की टीम यह मैच जीत गई. लेकिन अगले मैच में हंगरी ने ब्राज़ील को हराकर सनसनी फैला दी.

पुर्तगाल के ख़िलाफ़ मैच में एक बार फिर ब्राज़ील की ओर से पेले मैदान में उतरे लेकिन एक बार फिर उनके साथ वही हुआ. विपक्षी खिलाड़ियों के निशाने पर रहे पेले.

ब्राज़ील ये मैच 3-1 से हार गया और ब्राज़ील की टीम विश्व कप से बाहर हो गई. पेले ने क़सम खाई कि वे फिर कभी विश्व कप में नहीं खेलेंगे.

इटली की टीम भी उस समय यूरोपीय फ़ुटबॉल में छाई हुई थी. लेकिन उत्तर कोरिया के हाथों मिली हार के बाद टीम को अपना बोरिया-बिस्तर बाँधना पड़ा.

इस ग्रुप से सोवियत संघ और उत्तर कोरिया ने क्वार्टर फ़ाइनल में जगह बनाई. क्वार्टर फ़ाइनल में एक बार फिर उत्तर कोरिया ने पुर्तगाल का मैच शानदार रहा.

कमज़ोर समझी जाने वाली उत्तर कोरिया की टीम एक समय पुर्तगाल पर 3-0 की बढ़त बना चुकी थी. लेकिन अपने स्टार खिलाड़ी यूसेबियो के शानदार चार गोल की बदौलत मैच में वापसी की और फिर जीत भी हासिल की.

अन्य क्वार्टर फ़ाइनल मैचों में पश्चिम जर्मनी ने उरुग्वे को 4-0 से मात दी, तो सोवियत संघ ने हंगरी को 2-1 से हराया.

इंग्लैंड ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर पहली बार विश्व कप के फ़ाइनल में जगह बनाई. लंदन के वेम्बली स्टेडियम में हुए फ़ाइनल मैच को देखने 97 हज़ार दर्शक आए.

12वें मिनट में ही जर्मनी ने गोल करके बढ़त हासिल कर ली. लेकिन चार मिनट बाद ही ज्योफ़ हर्स्ट ने गोल करके स्कोर बराबर कर लिया.

इंग्लैंड के मार्टिन पीटर्स ने गोल करके स्कोर 2-1 कर दिया. लग रहा था कि इंग्लैंड अब मैच जीत जाएगा लेकिन एक मिनट पहले जर्मनी ने गोल उतारकर स्कोर बराबर कर दिया.

इसके बाद मैच अतिरिक्त समय में गया. लेकिन हर्स्ट के एक 'विवादित गोल' के कारण इंग्लैंड ने बढ़त हासिल कर ली.

गेंद गोल लाइन के पार गई थी या नहीं- इस पर सवाल उठे. लेकिन लाइंसमैन ने इंग्लैंड के पक्ष में फ़ैसला दिया. फ़ाइनल के बाद भी इस पर चर्चा होती रही.

लेकिन हर्स्ट ने एक और गोल मार कर स्कोर 4-2 कर दिया और इंग्लैंड ने पहली बार विश्व कप के ख़िताब पर क़ब्ज़ा किया.

मैक्सिको 1970

1970 में मैक्सिको में हुआ विश्व कप पहला विश्व कप था जब मैचों का रंगीन टेलीविज़न पर प्रसारण किया गया. इस विश्व कप के मैचों में खिलाड़ियों ने भी रंगीन पोशाकें पहनीं.

मैक्सिको विश्व कप को मेज़बानी के लिहाज़ से भी बेहतरीन माना जाता है. साथ ही ब्राज़ील की टीम का असाधारण प्रदर्शन भी इस विश्व कप को यादगार बना गया. हालाँकि 1966 के विश्व कप में बुरा अनुभव लेकर गए पेले ने घोषणा की थी कि वे अब फिर विश्व कप में नहीं खेलेंगे.

लेकिन ब्राज़ील ने इस विश्व कप को काफ़ी गंभीरता से लिया. पेले भी अपना वनवास छोड़कर वापस आए और स्टार खिलाड़ियों की जमात में शामिल हुए. ग्रुप मुक़ाबले में ब्राज़ील का मुक़ाबला इंग्लैंड से हुआ. मैच बड़ा शानदार रहा.

आख़िरकार ब्राज़ील की टीम जीती लेकिन मैच यादगार रहा इंग्लैंड के गोलकीपर के शानदार प्रदर्शन के कारण जिन्होंने कई गोल बचाए. इस हार के बावजूद इंग्लैंड की टीम ब्राज़ील के साथ नॉक आउट स्टेज तक पहुँच गई.

क्वार्टर फ़ाइनल मैच में इटली ने मेज़बान मैक्सिको को 4-1 से पीटा, तो ब्राज़ील ने पेरू को 4-2 से मात दी. उरुग्वे ने सोवियत संघ की सशक्त टीम को पछाड़ा. लेकिन सबसे ज़ोरदार मैच हुआ पश्चिम जर्मनी और इंग्लैंड के बीच.

पश्चिम जर्मनी की टीम तो बदला लेने की कोशिश में थी ही. लेकिन इंग्लैंड ने शानदार शुरुआत की और 2-0 की बढ़त ले ली. लेकिन अति विश्वास में बॉबी चार्ल्टन और मार्टिन पीटर्स को बैठाने का फ़ैसला ग़लत साबित हुआ और जर्मनी ने आख़िरकार 3-2 से जीत हासिल कर ली.

इटली और पश्चिम जर्मनी के बीच हुआ सेमी फ़ाइनल मैच काफ़ी यादगार रहा. ज़बरदस्त मुक़ाबले में इटली ने पश्चिम जर्मनी को 4-3 से हराया जबकि ब्राज़ील ने उरुग्वे को 3-1 से मात दी.

फ़ाइनल के पहले हाफ़ में इटली ने ब्राज़ील पर लगाम लगाए रखा और पेले के 18वें मिनट में दाग़े गोल की बराबरी भी कर दी. लेकिन दूसरे हाफ़ में ब्राज़ील की टीम ने थक चुकी इटली की टीम को काफ़ी परेशान किया और एक के बाद एक तीन गोल किए.

ब्राज़ील ने इटली को 4-1 से हराया और तीसरी बार विश्व कप का ख़िताब जीता. इस वर्ष ब्राज़ील के कोच थे मारियो ज़गालो.

ज़गालो के साथ ख़ास बात ये रही कि इससे पहले 1958 और 1962 में ब्राज़ील ने जब विश्व कप जीता था, उस समय ज़गालो ब्राज़ील की टीम में शामिल थे और इस साल एक कोच के रूप में टीम के साथ थे.

जर्मनी 1974

1974 में विश्व कप की मेज़बानी मिली पश्चिम जर्मनी को. इस विश्व कप के दौरान फ़ुटबॉल की दुनिया में ब्राज़ील का वर्चस्व टूटा.

इस समय दुनिया में यूरोपीय फ़ुटबॉल का दबदबा चल रहा था. हॉलैंड और पश्चिम जर्मनी के सितारे बुलंद थे और दोनों ने इस विश्व कप में इसका प्रदर्शन भी किया.

हालाँकि हॉलैंड की टीम आक्रमक फ़ुटबॉल खेल रही थी और पश्चिम जर्मनी की रणनीति रक्षात्मक खेल की थी.

ब्राज़ील ने यूरोपीय फ़ुटबॉल की भद्दी नक़ल की कोशिश तो की, लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो पाए. पेले नहीं खेल रहे थे.

लेकिन ब्राज़ील की टीम दूसरे दौर में पहुँचने में सफल रही. हॉलैंड अपने ग्रुप से आसानी से क्वालीफ़ाई कर गया.

लेकिन पश्चिम जर्मनी के लिए यह आसान नहीं रहा. पूर्वी जर्मनी के हाथों उसे हार मिली, तो चिली और ऑस्ट्रेलिया को हराने में उसे काफ़ी मशक्क़त करनी पड़ी.

पहले दौर से बाहर होने वाली बड़ी टीम थी- इटली. जिसे हेती को हराने में भी पसीना बहाना पड़ा और पोलैंड से हारकर तो टीम बाहर ही हो गई.

दूसरे दौर में हंगरी का खेल देखते ही बनता था. हंगरी ने अर्जेंटीना को 4-0 से बड़े अंतर से मात दी.

पूर्वी जर्मनी को भी हंगरी ने हराया और फिर ब्राज़ील को भी हराकर अपना बेहतरीन प्रदर्शन जारी रखा.

अन्य ग्रुप में पश्चिम जर्मनी और पोलैंड ने स्वीडन और यूगोस्लाविया की चुनौती समाप्त की. अब आख़िरी ग्रुप मैच में यह फ़ैसला होना था कि हॉलैंड का फ़ाइनल में किससे मुक़ाबला होगा.

फ़्रैंकफ़र्ट में हुए इस मैच में पोलैंड ने शानदार खेल का प्रदर्शन तो किया लेकिन घरेलू मैदान पर आख़िरकार पश्चिम जर्मनी की चली और पोलैंड को हार का सामना पड़ा.

हॉलैंड और पश्चिमी जर्मनी के बीच 'ऐतिहासिक दुश्मनी' को देखते हुए इस फ़ाइनल के प्रति लोगों का ज़बरदस्त आकर्षण था.

फ़ाइनल में हॉलैंड ने शुरुआत अच्छी की, लेकिन बेकेनबॉवर वाली जर्मन टीम के आगे उसकी नहीं चली.

आख़िरकार पश्चिम जर्मनी की टीम 2-1 से जीत गई और दूसरी बार विश्व कप का ख़िताब जीतने में सफलता पाई.

अर्जेंटीना 1978

1978 का विश्व कप फ़ुटबॉल अर्जेंटीना में हुआ. इस विश्व कप का ख़िताब मेज़बान अर्जेंटीना ने जीता. अर्जेंटीना ने फ़ाइनल में हॉलैंड को 3-1 से हराया. फ़ाइनल मैच का फ़ैसला अतिरिक्त समय में हुआ.

अर्जेंटीना ने पहली बार विश्व कप का ख़िताब जीतने में सफलता पाई और विश्व कप जीतने वाली छठी टीम बनी. इस विश्व कप का स्वरूप 1974 के विश्व कप की तरह रहा.

16 टीमें इसके लिए क्वालीफ़ाई हुईं. टीमों को चार-चार के ग्रुप में रखा गया. ग्रुप मैच के बाद चार-चार टीमों के दो ग्रुप बाँट दिए गए.

इसके बाद दोनों ग्रुपों की विजेता के बीच फ़ाइनल मैच हुआ. लगातार दूसरी बार हॉलैंड की टीम फ़ाइनल मैच में हार गई.

1974 में हॉलैंड की टीम पश्चिम जर्मनी से हार गई थी. इस विश्व में सबसे ज़्यादा गोल मारे मारियो केम्पेस ने. उन्होंने छह गोल दाग़े.

ग्रुप-1 में इटली की टीम शीर्ष पर रही. अर्जेंटीना की टीम को दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा. ग्रुप-2 में पोलैंड की टीम शीर्ष पर रही.

ग्रुप-3 से ऑस्ट्रिया और ग्रुप-4 से पेरू की टीम शीर्ष पर रही. असली कहानी दूसरे दौर से शुरू हुई. पहले ग्रुप से हंगरी की टीम आसानी से जीतकर फ़ाइनल में पहुँच गई. लेकिन दूसरे ग्रुप की कहानी बिल्कुल अलग रही.

ग्रुप-बी के दो मैचों के बाद भी ब्राज़ील और अर्जेंटीना के अंक बराबर थे. अब इस ग्रुप का फ़ैसला दोनों टीमों के आख़िरी मैचों पर निर्भर था.

फ़ीफ़ा ने इस बात पर ज़ोर नहीं दिया कि दोनों मैच एक ही समय पर शुरू हों. नतीजा ये हुआ कि ब्राज़ील ने पोलैंड को तो 3-1 से हरा दिया लेकिन अर्जेंटीना के सामने फ़ाइनल में पहुँचने का लक्ष्य भी मिल गया, क्योंकि उसका मैच ब्राज़ील के मैच के बाद हुआ.

अर्जेंटीना ने इसका लाभ उठाया और पेरू को 6-0 के बड़े अंतर से पराजित किया. हालाँकि उस मैच में पेरू के गोलकीपर पर सवाल उठाए गए.

कहा जाता है कि अर्जेंटीना मूल के पेरू के गोलकीपर के कारण ही अर्जेंटीना इतना स्कोर कर पाया. कारण जो भी हो अर्जेंटीना की टीम फ़ाइनल में पहुँचने में सफल रही और ब्राज़ील की टीम बाहर हो गई.

फ़ाइनल मैच काफ़ी उत्तेजना भरा रहा. मेज़बान अर्जेंटीना की टीम पहली बार फ़ाइनल खेल रही थी, तो लगातार दूसरी बार फ़ाइनल में उतरी थी हॉलैंड की टीम.

हॉलैंड की टीम का सपना एक बार फिर टूटा और मेज़बान टीम ने विश्व विजेता बनने का गौरव हासिल किया. अर्जेंटीना ने फ़ाइनल में हॉलैंड को 2-1 से मात दी.

स्पेन 1982

1982 में स्पेन में हुए विश्व कप का स्वरूप कुछ बदला हुआ था. इस बार 24 टीमों को विश्व कप में खेलने का मौक़ा मिला.

दूसरे ग्रुप स्टेज को दोबारा शामिल किया गया और यह भी तय हुआ कि सेमी फ़ाइनल मैच भी खेले जाएँगे.

अब चार-चार टीमों को छह ग्रुपों में शामिल किया गया. ग्रुप स्टेज के एक मैच में हंगरी ने अल-सल्वाडोर को 10-1 से मात दी, तो अल्जीरिया ने पश्चिमी जर्मनी को 2-1 से हराकर सनसनी फैलाई.

स्कॉटलैंड की टीम ब्राज़ील से 4-1 से हार गई. सोवियत संघ से 2-2 की बराबरी के साथ ही स्कॉटलैंड की टीम प्रतियोगिता से बाहर हो गई.

इंग्लैंड ने शुरुआत तो अच्छी की. फ़्रांस को उसने 3-1 से हराया. इंग्लैंड ने चेकोस्लोवाकिया और ट्यूनीशिया को भी हराया.

लेकिन दूसरे दौर में पश्चिम जर्मनी और स्पेन से हारकर इंग्लैंड की टीम ख़ाली हाथ स्वदेश लौटी.

डिएगो माराडोना के साथ उतरी अर्जेंटीना की टीम अपना पहला मैच बेल्जियम से हार गई लेकिन दूसरे दौर में जगह बनाने में सफल रही.

दूसरे दौर में उसका मुक़ाबला ब्राज़ील और इटली जैसी टीमों से था. ब्राज़ील ने 1970 के बाद अपनी बेहतरीन टीम उतारी. टीम में ज़िको, सोक्रेटिस, एडर और फ़ाल्काओ जैसे खिलाड़ियों से सजी थी ब्राज़ील की टीम.

लेकिन कारेका घायल होने के कारण खेल नहीं पाए और ब्राज़ील को इसकी क़ीमत चुकानी पड़ी.

अर्जेंटीना की टीम दूसरे दौर में फ़्लॉप साबित हुई. इटली की टीम ने उसे मात दी और ब्राज़ील के हाथों भी उसे 3-1 से पराजित होना पड़ा.

इस मैच में ब्राज़ील के बटिस्टा को फ़ाउल करने के कारण माराडोना को मैदान से बाहर कर दिया गया. लेकिन ब्राज़ील का रास्ता आसान नहीं था. ख़िताब की दावेदार मानी जाने वाली ब्राज़ील की टीम इटली के हाथों हारकर बाहर हो गई.

पहले सेमी फ़ाइनल में इटली का मुक़ाबला था पोलैंड से. इटली ने पोलैंड को मात देकर 12 सालों में पहली बार विश्व कप के फ़ाइनल में जगह बनाई.

फ़्रांस और पश्चिमी जर्मनी के बीच दूसरा सेमी फ़ाइनल दो शक्तिशाली देश के बीच ज़बरदस्त जंग थी. आख़िरकार पश्चिम जर्मनी ने फ़्रांस को 5-4 से हराकर फ़ाइनल में प्रवेश किया.

फ़ाइनल में इटली की टीम को रोकना मुश्किल लग रहा था और हुआ भी यही. 3-1 से फ़ाइनल मैच जीतकर इटली ने विश्व कप का ख़िताब जीत लिया.

मैक्सिको 1986

1986 में विश्व कप की मेज़बानी पहले कोलंबिया को देने का फ़ैसला हुआ था. लेकिन सुविधाओं की कमी के आधार पर मेज़बानी मैक्सिको को सौंपी गई.

हालाँकि ब्राज़ील और अमरीका ने भी मेज़बानी का प्रस्ताव सौंपा था. एक साल पहले ही मैक्सिको सिटी में ज़बरदस्त भूकंप आया था और आगे भी भूकंप की भविष्यवाणी की गई थी. लेकिन विश्व कप आराम से हुआ.

इस विश्व कप की ख़ासियत थी- पेले के बाद डिएगो माराडोना जैसे स्टार खिलाड़ी का उदभव.

हालाँकि 1982 के विश्व कप में भी माराडोना खेले थे लेकिन इस विश्व कप में उनका प्रदर्शन देखने लायक़ था.

इस विश्व कप में भी प्रतियोगिता के स्वरूप में थोड़ा बदलाव हुआ और दूसरे दौर के मैचों की जगह सीधे नॉक आउट मैचों का प्रावधान किया गया.

नॉक आउट स्टेज के लिए हर ग्रुप की दो शीर्ष टीमों को क्वालीफ़ाई करना था जबकि तीसरे स्थान पर रहने वाली चार सर्वश्रेष्ठ टीमों को भी नॉक आउट चरण में खेलने का अवसर मिला.

इस विश्व कप का पहला मैच इटली और बुल्गारिया के बीच हुआ. मैच एक-एक से ड्रॉ हुआ. ग्रुप-ए से अर्जेंटीना, इटली और बुल्गारिया की टीमों ने क्वालीफ़ाई किया.

ग्रुप-बी से मैक्सिको, पराग्वे ने क्वालीफ़ाई किया जबकि सोवियत संघ और फ़्रांस ने ग्रुप-सी से क्वालीफ़ाई किया. ब्राज़ील के पास अभी भी ज़ीको, सोक्रेटस और करेका जैसे स्टार खिलाड़ी थे. ब्राज़ील की टीम बिना कोई मैच हारे दूसरे दौर में पहुँची. ग्रुप-डी से ब्राज़ील के साथ स्पेन की टीम दूसरे दौर में पहुँची.

ग्रुप-ई से डेनमार्क, पश्चिम जर्मनी और उरुग्वे ने दूसरे दौर में जगह बनाई. ग्रुप-एफ़ से मोरक्को, इंग्लैंड और पोलैंड की टीमों ने दूसरे दौर में जगह बनाई.

क्वार्टर फ़ाइनल में भी इंग्लैंड, ब्राज़ील, फ़्रांस, पश्चिम जर्मनी, स्पेन, मैक्सिको, अर्जेंटीना जैसी शीर्ष टीमों ने जगह बनाई. यह विश्व कप जहाँ माराडोना के प्रभावशाली खेल की बदौलत चर्चा में रहा, वहीं विवादों की छाया से भी यह विश्व कप अलग नहीं रहा.

इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच हुआ क्वार्टर फ़ाइनल मैच आज भी माराडोना के विवादित गोल की बदौलत चर्चा में रहता है. बाद में माराडोना ने भी गोल में 'दैवीय हाथ' की बात स्वीकार की.

अन्य क्वार्टर फ़ाइनल मैच में फ़्रांस ने ब्राज़ील को पेनल्टी शूट आउट में 4-3 से हराया. पश्चिम जर्मनी ने मैक्सिको को पेनल्टी शूट आउट में 4-1 से हराया.

जबकि बेल्जियम ने स्पेन को पेनल्टी शूट आउट में 5-4 से मात दी. सेमीफ़ाइनल में पश्चिम जर्मनी ने फ़्रांस को 2-0 से हराया. अर्जेंटीना ने बेल्जियम को भी इतने ही अंतर से हराया.

पश्चिम जर्मनी के कोच बेकेनबॉवर ने पहले ही कह दिया था कि उनकी टीम इतनी मज़बूत नहीं कि विश्व कप जीत सके.

अर्जेंटीना ने शुरू में 2-0 की बढ़त हासिल कर ली. लेकिन जर्मनी ने वापसी करते हुए स्कोर की बराबरी कर ली. लेकिन अर्जेंटीना ने एक और गोल करके 3-2 से जीत हासिल कर ली और दूसरी बार ख़िताब जीतने में सफलता पाई.

इटली 1990

1990 में इटली में हुए विश्व कप को काफ़ी धीमा विश्व कप माना जाता है.

एकीकरण के बाद पश्चिम जर्मनी और पूर्वी जर्मनी की टीम अब जर्मनी के नाम से विश्व कप में उतरी. जर्मनी, हॉलैंड, अर्जेंटीना और ब्राज़ील को ख़िताब का तगड़ा दावेदार माना जा रहा था.

हालाँकि जर्मनी ने विश्व कप का ख़िताब तीसरी बार जीत लिया. लेकिन कैमरून और उसके खिलाड़ी रोजर मिल्ला इस प्रतियोगिता के स्टार साबित हुए.

इस विश्व कप की शुरुआत ही एक बड़े उलटफेर के साथ हुई. कैमरून ने पिछली चैम्पियन अर्जेंटीना की टीम को 1-0 से हरा कर शुरुआत की.

आगे भी कैमरून ने सबको आश्चर्यचकित करते हुए क्वार्टर फ़ाइनल में जगह बनाई. क्वार्टर फ़ाइनल तक पहुँचने वाली कैमरून की टीम पहली अफ़्रीक़ी टीम बनी.

क्वार्टर फ़ाइनल में कैमरून की टीम इंग्लैंड से संघर्ष करते हुए हारी. अतिरिक्त समय में इंग्लैंड ने कैमरून को 3-2 से पराजित किया. रिटायरमेंट छोड़कर वापस आने वाले 38 वर्षीय रोजर मिल्ला रातों-रात अंतरराष्ट्रीय स्टार हो गए.

अर्जेंटीना की टीम ने हार से उबरते हुए फ़ाइनल में जगह बनाई. क्वार्टर फ़ाइनल में अर्जेंटीना ने ब्राज़ील को हराया.

सेमी फ़ाइनल में अर्जेंटीना ने मेज़बान इटली को हराया. अर्जेंटीना की टीम प्रतियोगिता में पहली ऐसी टीम बनी, जिसने मेज़बान इटली के ख़िलाफ़ गोल दाग़ा.

अर्जेंटीना और इटली का मैच 1-1 से बराबर रहा और फिर फ़ैसला पेनल्टी शूट आउट में अर्जेंटीना के हक़ में गया.

दूसरे सेमी फ़ाइनल में जर्मनी का मुक़ाबला था इंग्लैंड की टीम से. मैच 1-1 से बराबरी पर छूटा और पेनल्टी शूट आउट में इंग्लैंड की टीम जर्मनी से 4-3 से हार गई.

फ़ाइनल में आमने-सामने थी जर्मनी और अर्जेंटीना की टीमें. 1990 के विश्व कप को सबसे कम रोमांचक विश्व कप में गिना जाता था.

प्रतियोगिता के बाक़ी मैचों की तरह फ़ाइनल मैच भी नीरस ही रहा. दोनों टीमों ने बड़ा ही रक्षात्मक खेल खेला और फ़ाइनल देखने के लिए जुटे लोगों का मज़ा किरकिरा किया. मैच ख़त्म होने से पाँच मिनट पहले जर्मनी ने गोल करके विश्व कप पर तीसरी बार क़ब्ज़ा किया और ब्राज़ील की बराबरी की.

अमरीका 1994

फ़ीफ़ा ने 1988 में ही यह फ़ैसला कर लिया था कि 1994 का विश्व कप अमरीका में आयोजित होगा. मोरक्को और ब्राज़ील की दावेदारी को ख़ारिज करते हुए अमरीका को मेज़बानी देने के फ़ैसले पर लोगों को अचरज भी हुआ क्योंकि अमरीका में फ़ुटबॉल के प्रति लोगों का उत्साह कम था.

लेकिन इसके बावजूद अमरीका में हुआ विश्व कप आयोजन के मामले में सफल माना जाता है. हर मैच के लिए औसत 69 हज़ार दर्शक स्टेडियम में जुटे.

1990 की तरह इस विश्व कप में भी 24 टीमों ने क्वालीफ़ाई किया और चार-चार टीमों के छह ग्रुप में उन्हें बाँटा गया.

इस विश्व कप में सभी टीमों ने आक्रमक फ़ुटबॉल का प्रदर्शन किया. फ़ीफ़ा ने टैकल के नियमों में कुछ फेरबदल किया और जीतने वाली टीम को तीन अंक देने का भी फ़ैसला किया गया. इस कारण टीम की अग्रिम पंक्ति के खिलाड़ियों को आक्रमक खेल दिखाने में और सुविधा हुई.

जहाँ ब्राज़ील के खिलाड़ियों ने इस प्रतियोगिता में अपनी बेहतरीन क्षमता का प्रदर्शन किया, वहीं अर्जेंटीना के डिएगो माराडोना के कारण प्रतियोगिता पर विवाद की छाया भी रही.

माराडोना प्रतिबंधित दवाओं के सेवन के दोषी पाए गए और टूर्नामेंट से निकाल दिए गए. और तो और अमरीका के ख़िलाफ़ कोलंबिया के मैच हारने के कारण उसके एक खिलाड़ी की हत्या कर दी गई.

कोलंबिया के खिलाड़ी एस्कोबार ने ग़लती से गेंद अपने ही गोलपोस्ट में डाल दी थी. टीम के स्वदेश लौटने पर उनकी हत्या कर दी गई.

बुल्गारिया ने प्रतियोगिता का सबसे बड़ा उलटफेर किया. उसने क्वार्टर फ़ाइनल में जर्मनी को हराकर उसे प्रतियोगिता से बाहर कर दिया.

बुल्गारिया के स्ट्वाइचकोव प्रतियोगिता में छह गोल मार कर सबसे ज़्यादा गोल मारने वाले खिलाड़ी बने.

इटली की टीम किसी तरह दूसरे दौर में जगह बना पाने में सफल रही. लेकिन रोमारियो और बबेटो जैसे खिलाड़ियों की बदौलत ब्राज़ील की टीम आसानी से क्वार्टर फ़ाइनल में जगह बनाने में सफल रही.

क्वार्टर फ़ाइनल में ब्राज़ील का मुक़ाबला था हॉलैंड से. ब्राज़ील की टीम एक समय 2-0 से आगे थी.

लेकिन हॉलैंड ने शानदार वापसी की और स्कोर बराबर कर दिया. लेकिन मैच ख़त्म होने से पहले ब्राज़ील ने अपने पुराने खिलाड़ी ब्रैंको को मैदान में उतारा और उन्होंने शानदार गोल करके अपनी टीम को जीत दिला दी.

एक अन्य क्वार्टर फ़ाइनल मैच में इटली ने स्पेन को 1-0 से हराकर सेमी फ़ाइनल में जगह बनाई. इटली ने सेमी फ़ाइनल में बुल्गारिया की चुनौती तोड़ी तो ब्राज़ील ने स्वीडन को 1-0 से हराकर फ़ाइनल में जगह बनाई.

क़रीब 94 हज़ार दर्शकों की मौजूदगी में फ़ाइनल हुआ ब्राज़ील और इटली के बीच. इटली की टीम ज़रूरत से ज़्यादा रक्षात्मक हो गई और अतिरिक्त समय के बाद भी दोनों टीमें गोल नहीं कर पाईं.

फिर फ़ैसला पेनल्टी शूट आउट के ज़रिए हुआ. ब्राज़ील ने पेनल्टी शूट आउट में विश्व कप का ख़िताब जीता और स्कोर रहा 3-2. ब्राज़ील को चौथी बार विश्व कप का ख़िताब मिला.

फ़्रांस 1998

क़रीब 60 साल बाद फ़ुटबॉल विश्व कप फ़्रांस लौटा. इस बार विश्व कप में 32 टीमें शामिल हुईं. लेकिन विश्व कप का आयोजन सफल साबित हुआ.

ब्राज़ील की टीम इस साल भी ख़िताब की बहुत बड़ी दावेदार थी. ब्राज़ील के स्टार खिलाड़ी रोनाल्डो अपने प्रदर्शन के बेहतरीन दौर में थे. रोमारियो घायल थे, इसलिए रोनाल्डो पर बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी थी.

ब्राज़ील ने प्रतियोगिता में अच्छी शुरुआत की. हालाँकि स्कॉटलैंड के ख़िलाफ़ 2-1 से मैच जीतने में टीम को थोड़ा पसीना बहाना पड़ा.

लेकिन अगले ही मैच में मोरक्को को 3-0 से हराकर टीम में उत्साह लौट आया. लेकिन पहले दौर के मैच में नॉर्वे के हाथों मिली हार ने टीम का मनोबल काफ़ी कमज़ोर किया. 1966 के बाद पहली बार ब्राज़ील की टीम पहले दौर का कोई मैच हारी थी.

मेज़बान फ़्रांस ने पहले दौर की शानदार शुरुआत की. फ़्रांस ने दक्षिण अफ़्रीका, सऊदी अरब और डेनमार्क को हराकर पहले दौर की शुरुआत की.

लेकिन सऊदी अरब के ख़िलाफ़ मैच में मैक्सिको के रेफ़री ने ज़िनेदिन ज़िदान को रेड कार्ड दिखा दिया और फ़्रांस को दूसरे दौर की शुरुआत अपने स्टार खिलाड़ी के बिना ही करनी पड़ी.

दूसरे दौर में पहुँचने वाली 16 टीमों में से 10 यूरोपीय टीमें थी. दूसरे दौर में इटली ने नॉर्वे को 1-0 से मात दी तो ब्राज़ील ने चिली को 4-1 से रौंदा.

फ़्रांस ने पराग्वे को हराया तो इंग्लैंड को अर्जेंटीना के हाथों हार मिली. इसी मैच में इंग्लैंड की ओर से माइकल ओवन ने एक ख़ूबसूरत गोल किया था.

क्वार्टर फ़ाइनल में बड़ा उलटफेर उस समय हुआ जब क्रोएशिया ने जर्मनी को 3-0 से हराकर बाहर कर दिया.

मेज़बान फ़्रांस और इटली के बीच क्वार्टर फ़ाइनल मैच पेनल्टी शूट आउट में गया और फ़ैसला फ़्रांस के हक़ में 4-3 से गया.

ब्राज़ील ने डेनमार्क को 3-2 से हराया जबकि नीदरलैंड्स ने अर्जेंटीना को 2-1 से हराकर प्रतियोगिता से बाहर कर दिया.

सेमीफ़ाइनल में मेज़बान फ़्रांस की भिड़ंत थी क्रोएशिया से और ब्राज़ील और नीदरलैंड्स आमने-सामने थे.

पहले सेमी फ़ाइनल में फ़्रांस ने क्रोएशिया को 2-1 से हराया. लेकिन नीदरलैंड्स और ब्राज़ील का मैच 1-1 से बराबर रहा.

फ़ैसला पेनल्टी शूट आउट में ब्राज़ील के पक्ष में गया. ब्राज़ील ने 4-2 से यह मैच जीता. ब्राज़ील की टीम एक बार फिर फ़ाइनल में पहुँची. लेकिन इस बार उसके ख़िलाफ़ थी मेज़बान टीम फ़्रांस.

फ़ाइनल में ब्राज़ील के स्टार खिलाड़ी रोनाल्डो को लेकर जो अफ़वाहों का बाज़ार गर्म रहा, उसकी सच्चाई आज तक सामने नहीं आ पाई है.

कहा गया कि रोनाल्डो का घुटना जवाब दे गया था, तो ये भी कहा गया कि वे बेहोश हो गए थे. ख़ैर जो भी हो, टीम शीट से उनका नाम ग़ायब था.

लेकिन बाद में वे टीम में आए. लेकिन वे थके हुए नज़र आ रहे थे. लोगों को कहीं से वो रोनाल्डो नज़र नहीं आया, जिसके लिए वे जाने जाते थे.

दूसरी ओर फ्रांस के स्टार खिलाड़ी ज़िनेदिन ज़िदान अभी तक पूरे फ़ॉर्म में आ गए थे और उनका प्रदर्शन देखने लायक़ था.

दूसरी ओर 'बीमार' रोनाल्डो के कारण ब्राज़ील की टीम अपने फ़ॉर्म में नज़र नहीं आई. इसका अंदाज़ा इसी से होता है कि वे एक गोल भी नहीं मार पाए. फ़्रांस ने ज़िनेदिन ज़िदान के दो गोलों की बदौलत ब्राज़ील को 3-0 से हराकर और विश्व कप का ख़िताब जीत लिया.

दक्षिण कोरिया-जापान 2002

वर्ष 2002 का विश्व कप की मेज़बानी दक्षिण कोरिया और जापान को संयुक्त रूप से मिली.

पहली बार ऐसा हुआ कि दो देशों ने मिल कर विश्व कप की मेज़बानी की.

इस कारण ऐसा पहली बार हुआ कि तीन देशों चैम्पियन फ़्रांस और मेज़बान देश दक्षिण कोरिया के साथ-साथ जापान को विश्व कप में सीधे प्रवेश मिला.

पिछले विश्व कप की ख़राब यादों को भूलते हुए ब्राज़ील के स्टार स्ट्राइकर रोनाल्डो ने फ़ाइनल में अपने पैर का जादू दिखाया और जर्मनी की टीम को पछाड़ते हुए अपने देश को विश्व कप का ख़िताब दिलवाया.

रोनाल्डो ने फ़ाइनल के दोनों गोल मारे. रोनाल्डो ने इस विश्व कप में आठ गोल मारे और प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट का ख़िताब भी पाया.

लेकिन इस दौड़ में उनके साथी खिलाड़ी रिवाल्डो ने भी उन्हें अच्छी चुनौती दी.

1970 के बाद ब्राज़ील ऐसी टीम बनी, जिसने विश्व कप में अपने सभी मैच जीते. 1970 में भी ब्राज़ील ने ही यह कारनामा दिखाया था.

इससे पहले उरुग्वे ने 1930 में और इटली ने 1938 में यह सफलता हासिल की थी. वैसे इस विश्व कप की शुरुआत धमाकेदार अंदाज़ में हुई जब सेनेगल ने चैम्पियन फ़्रांस को हराकर सनसनी फैला दी.

फ़्रांस की शुरुआत ऐसी ख़राब हुई कि डेनमार्क ने 3-0 से हराकर उसे प्रतियोगिता से ही बाहर कर दिया. पहले दौर से अर्जेंटीना भी बाहर हो गया, लेकिन उसका ग्रुप काफ़ी कठिन था.

उस ग्रुप को ग्रुप ऑफ़ डेथ का भी नाम दिया गया था. क्योंकि इस ग्रुप में इंग्लैंड, स्वीडन, अर्जेंटीना और नाइजीरिया की टीमें शामिल थी. दूसरे दौर में पहुँचने का मौक़ा मिला स्वीडन और इंग्लैंड को.

मेज़बान जापान और दक्षिण कोरिया की टीमें भी दूसरे दौर में पहुँचने में कामयाब हुईं.

क्वार्टर फ़ाइनल में पहुँचने का सौभाग्य मिला ब्राज़ील, सेनेगल, इंग्लैंड, तुर्की, स्पेन, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और अमरीका की टीमों को. क्वार्टर फ़ाइनल में ब्राज़ील ने इंग्लैंड को 2-1 से हराया तो तुर्की ने सेनेगल को हराकर बाहर किया.

दक्षिण कोरिया ने पेनल्टी शूट आउट में स्पेन को चलता किया तो जर्मनी सिर्फ़ एक गोल के अंतर से ही अमरीका को हरा पाया.

सेमीफ़ाइनल में ब्राज़ील ने तुर्की को हराया तो जर्मनी के हाथों दक्षिण कोरिया की हार हुई. फ़ाइनल में रोनाल्डो के बेहतरीन खेल की बदौलत ब्राज़ील ने जर्मनी को हराकर पाँचवीं बार ख़िताब जीता.

जर्मनी 2006

वर्ष 2006 का फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप जर्मनी में आयोजित हुआ. कई धुरंधर टीमों की दावेदारी के बीच आख़िरकार इटली की टीम ने बाज़ी मारी. ये इटली का चौथा ख़िताब था.

फ़ाइनल में इटली ने फ़्रांस की टीम को मात दी. फ़्रांस के मशहूर खिलाड़ी ज़िनेदिन ज़िदान को रेड कार्ड मिलना फ़ाइनल का निर्णायक पल साबित हुआ.

हताश-परेशान फ़्रांस की टीम अपने स्टार खिलाड़ी की कमी को झेल नहीं पाई और पेनल्टी शूटआउट में इटली ने फ़्रांस को 5-3 से हरा दिया.

फ़ाइनल के दौरान ज़िनेदिन ज़िदान का इटली के खिलाड़ी मैतरात्ज़ी को सर से टक्कर मारने की तस्वीर कई दिनों तक सुर्ख़ियों में रही.

जर्मनी की टीम तीसरे और पूर्तगाल की टीम चौथे स्थान पर रही.

ब्राज़ील की टीम को इस प्रतियोगिता में बड़ा दावेदार माना जा रहा था, लेकिन क्वार्टर फ़ाइनल में फ़्रांस के हाथों उसे हार मिली और टीम प्रतियोगिता से बाहर हो गई.

इंग्लैंड की टीम भी क्वार्टर फ़ाइनल में हार कर प्रतियोगिता से बाहर हुई.

वर्ष 2006 का विश्व कप कई मायनों में अनोखा था. टेलीविज़न दर्शकों के मामले में इस विश्व कप ने इतिहास बनाया.

इस विश्व कप में पहली बार तीन ऐसी टीमों ने हिस्सा लिया, जिनकी राष्ट्रभाषा पुर्तगीज़ है. ये टीमें थी- पुर्तगाल, ब्राज़ील और अंगोला.

वर्ष 1982 के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि किसी विश्व कप के सेमी फ़ाइनल में सिर्फ़ यूरोपीय टीमें आमने-सामने थी.

भले ही मेज़बान जर्मनी की टीम विश्व कप का ख़िताब जीत नहीं पाई, लेकिन प्रतियोगिता काफ़ी सफल रही.

जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोज़ा को गोल्डन बूट मिला, उन्होंने इस विश्व कप में सर्वाधिक पाँच गोल मारे. जबकि विवादों के बावजूद फ़्रांस के ज़िनेदिन ज़िदान विश्व कप के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए.

ऑस्ट्रेलिया, इक्वेडोर और घाना जैसे देशों के शुरुआती दौर में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद वर्ष 2006 का विश्व कप पारंपरिक फुटबॉल के लिए ज़्यादा जाना गया.

पारंपरिक फ़ुटबॉल खेलने वाली टीमों का वर्चस्व इस विश्व कप में बना रहा. इस विश्व कप में सभी आठ वरीयता प्राप्त टीमों ने नॉक आउट स्टेज तक अपनी जगह बनाई.

साथ ही क्वार्टर फ़ाइनल में यूरोप और दक्षिण अमरीका के बाहर की कोई टीम नहीं थी.

अर्जेंटीना और ब्राज़ील की टीमें क्वार्टर फ़ाइनल में ही बाहर हो गई और सेमी फ़ाइनल में सिर्फ़ यूरोप की टीमें बच गईं.

वर्ष 1934, 1966 और 1982 के बाद ये पहला मौक़ा था, जब सेमी फ़ाइनल की सभी टीमें यूरोप से थी.

दक्षिण अफ़्रीका 2010

ये वो समय था जब ऐसा माना जा रहा था कि फ़ुटबॉल की दुनिया पर दक्षिण अमरीकी और यूरोपीय देशों के बाद अफ़्रीकी देश अपना दबदबा क़ायम करेंगे. क्योंकि ये वो समय था जब ब्राज़ील के पास रोनाल्डो, रिवाल्डो और रोबर्टो कार्लोस की तिकड़ी का जादू नहीं था और ये वो समय था जब फ्रांस के पास ज़िदान नहीं थे और जर्मनी के पास ओलिवर कान नहीं थे.

हां इटली की टीमज़रूर इस ख़िताब की सबसे मज़बूत दावेदार थी, लेकिन ये साल फ़ुटबॉल विश्व कप के इतिहास में कई उलटफेरों के नाम रहा. 2010 में फ़ीफ़ा ने 19वें फ़ुटबॉल विश्व कप की मेज़बानी सिर्फ़ अफ़्रीकी देशों के लिए आरक्षित की थी और इस मेज़बानी का अवसर दक्षिण अफ़्रीका को मिला.

मेज़बानी के मामले में भले ही दक्षिण अफ़्रीका ख़ुशक़िस्मत रहा लेकिन वो फ़ुटबॉल विश्व कप के इतिहास में पहला मेज़बान देश भी बना जो टूर्नामेंट के पहले राउंड में ही बाहर हो गया. विश्व कप के पहले राउंड में इसमें हिस्सा ले रही सभी 32 टीमो को आठ ग्रुप में बांटा गया जहां सभी टीमों को अपने ग्रुप में तीन राउंड रॉबिन मुक़ाबले खेलने थे.

मेज़बान दक्षिण अफ़्रीका, गत विजेता इटली, उपविजेता रही फ़्रांस, और कैमरून जैसी टीमें इसी दौर में बाहर हो गईं. इटली और फ़्रांस की टीमें तो अपने ग्रुप में सबसे नीचे रहीं.

वैसे पहले दौर में सबसे रोचक रही न्यूज़ीलैंड की टीम की राह. न्यूज़ीलैंड की टीम इस टूर्नामेंट में अविजित रही, लेकिन फिर भी वो पहले दौर से आगे नहीं बढ़ सकी क्योंकि उनके सारे मुक़ाबले ड्रॉ पर ख़त्म हुए थे. वहीं उन्हीं के ग्रुप में मौजूद स्लोवाकिया ने अपना एक मुक़ाबला जीत कर न्यूज़ीलैंड से एक अंक ज़्यादा हासिल कर लिया था.

ब्राज़ील, जर्मनी, इंग्लैंड, अर्जेंटीना और पुर्तगाल समेत 16 टीमें नॉकआउट मुक़ाबलों के अगले दौर में प्रविष्ट हो गईं.

नॉकआउट दौर में ग्रुप स्टेज में टॉप पर रही टीम को दूसरे नंबर पर रही टीम से भिड़ना था. इस तरह की व्यवस्था से जहां कुछ टीमों के लिए ये दौर आसान हो गया वहीं कुछ टीमों के लिए मुक़ाबला कड़ा था.

इस दौर में ग़ौर करने लायक़ मुक़ाबले रहे - ब्राज़ील और चिली (ब्राज़ील), स्पेन और पुर्तगाल (स्पेन) और जर्मनी और इंग्लैंड (जर्मनी).

पुर्तगाल की टीम अपने कप्तान क्रिस्टियानो रोनाल्डो के दम पर ख़िताब अपने नाम करने की फ़िराक़ में थी. लेकिन नॉकआउट मुक़ाबलों में स्पेन ने पुर्तगाल का ये सपना तोड़ दिया. कड़े मुक़ाबले में स्पेन के फ़ारवर्ड खिलाड़ी डेविड विया ने 63वें मिनट में गोल कर अपनी टीम को 1-0 से अपनी टीम को मैच जिता दिया.

इस दौर का एक और बड़ा मुक़ाबला रहा जर्मनी और इंग्लैड के बीच जिसमें जर्मनी ने इंग्लैड को 4-1 से रौंद दिया. इंग्लैंड के लिए विश्व कप मुक़ाबलों में इतने बड़े अंतर से हार का ये पहला मौक़ा था. और ये पहला मौक़ा था जब जर्मनी और इंग्लैंड के बीच हुआ कोई विश्व कप मुक़ाबला 90 मिनट के निर्धारित समय में ही पूरा हो गया था.

ब्राज़ील, स्पेन और जर्मनी के अलावा घाना, उरुग्वे, नीदरलैंड्स, अर्जेंटीना और पराग्वे की टीमें क्वार्टर फ़ाइनल में प्रवेश कर गईं.

आठ टीमों और उनके फ़ैन के जश्न मनाने के बाद वो दौर भी आया जब बड़े बड़े दिग्गज उलटफेर के शिकार हो गए. जहां ख़िताब की सबसे बड़ी दावेदार मानी जा रही ब्राज़ील की टीम को अंडरडॉग नीदरलैंड्स ने 2-1 से हरा दिया.

ख़िताब की प्रबल दावेदार अर्जेंटीना और जर्मनी को इस दौर में एक दूसरे का सामना करना पड़ा और अर्जेंटीना जैसी मज़बूत टीम के विरुद्ध 4-0 से मैच जीत कर जर्मनी ने अपना लोहा मनवा लिया.

पहले सेमी फ़ाइनल मुक़ाबले में जब उरुग्वे और नीदरलैंड्स की भिड़ंत हुई तो आश्चर्यजनक रुप से नीदरलैंड्स ने उरुग्वे की टीम को 3-2 से हरा दिया. हालांकि ब्राज़ील को हराने के बाद ये जीत नीदरलैंड्स के लिए मुश्किल नहीं मानी जा रही थी, लेकिन उरुग्वे के स्ट्राइकर डिएगो फ़ोरलैन अच्छी फ़ार्म में थे और उन्होंने गोल किया भी, लेकिन उनकी टीम दो ही गोल कर सकी.

वहीं अर्जेंटीना (4-0) और इंग्लैंड (4-1) को हराने के बाद स्पेन जर्मनी के लिए सेमी फ़ाइनल में एक आसान शिकार माना जा रहा था लेकिन स्पेन ने 0-1 से ये मैच जीतकर जर्मनी का विजयरथ थाम लिया.

अंडरडॉग मानी जा रही नीदरलैंड्स के लिए 1974 के बाद विश्व कप फ़ाइनल में पहुंचने का ये दूसरा मौक़ा था वहीं स्पेन के लिए ये पहली बार था कि वो फ़ाइनल में खेल रहे थे.

11 जुलाई 2010 को हुए इस मुक़ाबले को इतिहास इसलिए भी याद रखेगा क्योंकि फ़ुटबॉल विश्व कप के इतिहास में ये पहला मौक़ा था जब फ़ाइनल मुक़ाबले से ब्राज़ील, जर्मनी, इटली या अर्जेंटीना नदारद थे.

2010 का फ़ाइनल मुक़ाबला स्पेन ने जीता और अपना पहला विश्व कप भी. ये मुक़ाबला एक्सट्रा टाइम तक खिंचा और इस समय में स्पेन के खिलाड़ी आंद्रेस इनिएस्टा ने गोल कर स्पेन को उसका पहला विश्व कप दिलवा दिया. इस बार भी स्पेन इतिहास को दोहराने के इरादे से उतरेगा.

इस विश्व कप का ख़ास आकर्षण रहा अफ़्रीकी वाद्ययंत्र वूवूज़ेला. इस वाद्य यंत्र की आवाज़ इतनी तेज़ थी की स्टेडियम में कोई और आवाज़ सुनाई नहीं देती थी.

अपनी टीम के ख़राब प्रदर्शन का ठीकरा लियोनेल मेसी ने इस यंत्र की आवाज़ पर फ़ोड़ा. उनका कहना था, "हम मैदान पर आपस में बात नहीं कर पाए. हमारा आपसी तालमेल नहीं बन पा रहा था."

शोर की शिकायतों के चलते वूवूज़ेला को बैन कर दिया गया था. वहीं विश्व कप के लिए बने थीम सांग 'वाका वाका' को ख़ासी लोकप्रियता मिली. इस गीत को मशहूर पॉप गायिका शकीरा ने गाया था और ये खेल प्रेमियों के साथ साथ संगीत प्रेमियों को भी पसंद आया था.