'क्या मोदी की वापसी से डरता है बीसीसीआई?'

  • 7 मई 2014
ललित मोदी

कभी भारत में दुनिया भर के खिलाड़ियों को जुटाकर आईपीएल शुरू करने वाले आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी की बीसीसीआई से वापस जुड़ने की कोशिशों को गहरा झटका लगा है.

उन्हें यह झटका ख़ुद बीसीसीआई ने तब दिया जब वह मंगलवार को राजस्थान क्रिकेट संघ के चुनाव में अध्यक्ष पद पर निर्वाचित घोषित हुए, लेकिन इससे पहले कि ललित मोदी जश्न मना पाते, बीसीसीआई ने राजस्थान क्रिकेट संघ को ही अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया.

राजस्थान क्रिकेट संघ को निलंबित करने का फ़ैसला बोर्ड के अंतरिम अध्यक्ष शिवलाल यादव ने लिया. बीसीसीआई ने ललित मोदी पर कथित वित्तीय अनियमितता, अनुशासनहीनता और उसके हितों के ख़िलाफ़ काम करने के लिए आजीवन पाबंदी लगा रखी है.

इसी आधार पर बोर्ड ने मोदी के चुनाव को कोर्ट में चुनौती दी थी. राजस्थान क्रिकेट संघ के चुनाव पिछले साल 19 दिसंबर को हुए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने के कारण परिणाम घोषित नहीं हो पाए थे.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद ही मंगलवार को राजस्थान क्रिकेट संघ के चुनाव परिणाम घोषित हुए थे जिसमें ललित मोदी को 24 वोट जबकि उनके विरोधी रामलाल को महज़ पांच वोट मिले.

मोदी बनाम श्रीनिवासन

एन श्रीनिवासन

अब ज़ाहिर है कि ललित मोदी और उनके समर्थक कोर्ट में जाएंगे, लेकिन बोर्ड के संविधान की धारा 32 और उपधारा 7 के अंतर्गत बीसीसीआई ने राजस्थान क्रिकेट संघ को निलंबित करने का जो फ़ैसला लिया है, क्या वह सही है? बोर्ड को अधिकार है कि वह उस संघ को निलंबित कर सकता है जो उसके नियम और दिशा-निर्देश के अनुरूप नहीं है.

इस सवाल के जवाब में जाने-माने क्रिकेट समीक्षक प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं, ''यह सीधे-सीधे ललित मोदी और एन श्रीनिवासन की लड़ाई है. पहले तो ललित मोदी आईपीएल को कामयाब बनाकर एक हीरो की तरह उभरे. उसके बाद ललित मोदी को बोर्ड ने धांधली का आरोप लगाकर बाहर कर दिया क्योंकि श्रीनिवासन ख़ुद नियंत्रण करना चाहते थे.''

वह कहते हैं, ''अब तो ललित मोदी पर इतने केस चल रहे है कि वह भारत भी नहीं आ सकते. वह तो चार साल से लंदन में रह रहे है. अब यह बात समझ से परे है कि जिन मुद्दों को आधार बनाकर बोर्ड ने मोदी को बाहर किया कि उन्होंने क्रिकेट को बदनाम किया, लेकिन आज तो भारतीय क्रिकेट बोर्ड की सबसे अधिक बदनामी एन श्रीनिवासन कर रहे हैं."

मोदी से ख़तरा

प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं, ''अब जैसा व्यवहार बोर्ड ने मोदी के साथ किया, वैसा ही श्रीनिवासन के साथ भी करना चाहिए. यहां एक बात यह भी है कि अगर उस समय ललित मोदी का झगड़ा श्रीनिवासन के साथ नहीं हुआ होता तो शायद मोदी के ख़िलाफ़ भी कोई केस नहीं हुआ होता लेकिन श्रीनिवासन को सबसे बड़ा ख़तरा मोदी से ही था, इसलिए उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया. वैसे मोदी ने जो किया वह बदले में इसी के हक़दार थे, लेकिन फिर वही सवाल कि क्या श्रीनिवासन जो कुछ कर रहे हैं क्या वह मोदी से कम है?''

वह कहते हैं, ''श्रीनिवासन तो इस समय ख़ुद बोर्ड बन गए है. बोर्ड जो भी कुछ कर रहा है वह उनके इशारे पर कर रहा है. एक तरफ़ सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बोर्ड से दूर रहने को कहा है, दूसरी तरफ़ बोर्ड के सारे फ़ैसले श्रीनिवासन ख़ुद लेते है और उन्हीं के फ़ायदे के लिए सारे निर्णय लिए जा रहे है. बोर्ड में एक से एक धुरंधर हैं, नेता भी हैं, लेकिन कोई भी श्रीनिवासन के ख़िलाफ़ नहीं है, ताज्जुब की बात है. लगता है कि बोर्ड के पदाधिकारियों में दम ही नहीं है, अब तो कुछ कहना भी फ़िज़ूल सा लगता है.''

अब एक सवाल यह भी है कि अगर किसी तरह मोदी राजस्थान क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बन भी गए तो क्या वह लंदन में रहकर कुछ काम कर सकेंगे ?

इसके जवाब में प्रदीप मैगज़ीन कहते है कि उन पर इतने आरोप लगने के बाद वह भारत तो आ नहीं सकते. ऐसे में कैसे कोई संघ किसी को अध्यक्ष चुन सकता है, लेकिन यह सब हो रहा है. इतनी छवि ख़राब होने के बावजूद लगता है बोर्ड वालों को कोई परेशानी नहीं हो रही है.

क्या करेंगे मोदी?

इसी मसले को लेकर भारत के पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह कहते है कि ललित मोदी चुपचाप बैठने वाले नहीं हैं. वह यक़ीनन कोर्ट में जाएंगे. वह चुनाव जीते हैं तो जिन लोगों ने उन्हें निकाला, उनसे लड़ेंगे. अभी देखना है कि राजस्थान क्रिकेट संघ किस तरह के क़दम उठाता है, लेकिन थोड़ा अटपटा लगता है कि कैसे किसी एक के आने से कोई पूरे संघ को निलंबित कर सकता है.

मनिंदर सिंह कहते है, ''इससे यह भी पता चलता है कि ललित मोदी का बोर्ड के बाक़ी सदस्यों में कितना ख़ौफ़ है जो उन्हें वापस नहीं आने देना चाहते. यह आईपीएल उन्हीं की बदौलत चल रहा है और मुझे ख़ुशी केवल इसलिए होती है कि आज मेरे क्रिकेट परिवार में खिलाड़ियों को जब पैसा मिलता है तो उनके आने वाले जीवन में सुरक्षा की भावना पैदा होती है जो बेहद ज़रूरी है.''

वे कहते हैं, ''जब हम खेलते थे, हमें इतना पैसा नहीं मिलता था, तनाव रहता था. ललित मोदी जब आएंगे तो क्रिकेट के लिए कुछ अच्छा करेंगे, लेकिन उम्मीद है कि क्रिकेट में सुधार के लिए आएं, केवल बदले की भावना से नहीं. जहां तक बोर्ड की छवि की बात है तो श्रीनिवासन के बारे में भी बहुत कुछ सुना है. अगर ऐसा है तो उसकी सफाई भी बेहद ज़रूरी है जिसकी ज़िम्मेदारी जो लोग बोर्ड में बैठे है उन्हें उठानी होगी.

अब देखना है कि ललित मोदी और बीसीसीआई की लड़ाई के बीच फंसे राजस्थान क्रिकेट संघ का क्या होता है?

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