सचिन दुनिया के 29वें महान बल्लेबाज़?

  • 15 नवंबर 2013
सचिन तेंदुलकर

सचिन तेंदुलकर जब वानखेड़े स्टेडियम में आख़िरी बार मैदान से बाहर निकलेंगे तो अपने क्रिकेट करियर पर पूर्ण विराम लगा देंगे.

सचिन को भारत में क्रिकेट के कारण भगवान जैसा रुतबा हासिल है. लेकिन जब हम उनकी तुलना विश्व के शीर्ष बल्लेबाज़ों से करते हैं तो सचिन की बैटिंग के आँकड़े क्या कहते हैं?

मुंबई टेस्ट से पहले तक सचिन रमेश तेंदुलकर के बल्ले से 199 टेस्टों में 15,847 रन बनाए हैं जो किसी भी अन्य क्रिकेटर के क़रीब 2,500 रन अधिक हैं.

अब सचिन की तुलना उन चार खिलाड़ियों से की जाए जिनका नाम पिछले 20 सालों से सुर्ख़ियों में रहा है और जिनकी गिनती महान बल्लेबाजों में होती है. उनके नाम क्रमशः रिकी पोंटिंग (ऑस्ट्रेलिया), जैक कैलिस (दक्षिण अफ्रीका), ब्रायन लारा (वेस्ट इंडीज) और कुमार संगकारा (श्रीलंका) हैं.

सचिन के 15,847 रनों की तुलना में पोंटिंग ने अपने पूरे टेस्ट करियर में 13,378 रन बनाए, जबकि लारा ने 12,000 रन से थोड़ा कम रन बनाए.

दो खिलाड़ी जो अभी भी खेल रहे हैं उनमें कैलिस ने 13,140 और संगकारा ने 10,468 रन बनाए हैं.

तुलना

कुल रन संख्या के हिसाब से सचिन का दबदबा बरकरार है. लेकिन सचिन ने बाक़ी खिलाड़ियों की तुलना में अधिक मैच भी खेले हैं.

सचिन का आख़िरी टेस्ट उनका 200वां टेस्ट है जो पोंटिंग के कुल टेस्टों की संख्या से 32 अधिक है और लारा के कुल टेस्टों की तुलना में 68 अधिक है. कैलिस उनसे 36 मैच पीछे हैं और संगकारा सचिन से पूरे 83 टेस्ट पीछे चल रहे हैं.

शायद इसलिए खिलाड़ियों की तुलना का निष्पक्ष तरीका उनके औसत आँकड़ों पर नज़र डालना होगा?

इससे दशकों पहले खेलने वाले खिलाड़ी भी तस्वीर में आ जाते हैं. पहले की पीढ़ियों में क्रिकेट खिलाड़ी बहुत कम मैच खेलते थे, इसलिए 1950 के पहले क्रिकेट करियर ख़त्म करने वाले किसी भी खिलाड़ी का नाम टेस्ट मैच में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले शीर्ष 35 खिलाड़ियों में शामिल नहीं है.

लेकिन जब आप औसत पर नज़र डालते हैं तो शीर्ष पर जो खिलाड़ी दिखाई देते है, वो हैं ऑस्ट्रेलिया के डोनाल्ड ब्रैडमैन. उन्होंने 1928 से 1948 के बीच 20 साल तक क्रिकेट खेली.

ब्रेडमैन

ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी डोनाल्ड ब्रेडमैन
ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी डोनाल्ड ब्रेडमैन 1930 में मैच के दौरान

अविश्वसनीय रूप से ब्रैडमैन ने अपना क्रिकेट करियर 99.94 के औसत के साथ समाप्त किया. कोई भी बल्लेबाज़ उनके औसत के करीब नहीं पहुंच सका है.

कम से कम 20 टेस्ट खेलने वाले खिलाड़ियों के साथ तुलना करने पर सचिन 53.71 के औसत के साथ 15वें नंबर पर आते हैं.

इस सूची में पोंटिंग 24वें और लारा 18वें स्थान पर हैं जबकि कैलिस को 14वीं रैंक हासिल है. संगकारा 56.98 के औसत के साथ 10वें नंबर पर हैं.

यानी सचिन औसत में पोंटि़ंग और लारा से बेहतर हैं लेकिन कैलिस और संगकारा से पीछे हैं.

लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि सचिन ने पिछले 18 सालों से लगातार 50 से ज़्यादा का औसत बरक़रार रखा है.

महान बल्लेबाज़ों की तरह सचिन का औसत भी करियर के आख़िरी दिनों में नीचे गिरा है.

किसी खिलाड़ी की महानता को मापने के लिए उसके सर्वोच्च प्रदर्शन वाले दौर को देखना एक बेहतर तरीक़ा हो सकता है.

सचिन 29वें महान बल्लेबाज?

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के खिलाड़ियों की रेंटिंग से आप देख सकते हैं कि मैच की विभिन्न परिस्थितियों में खिलाड़ी का प्रदर्शन कैसा रहा है.

इसमें खिलाड़ी के प्रदर्शन और विपक्षी टीम के स्तर को भी देखा जाता है. आईसीसी ने सचिन को 2002 में जिम्बाब्वे के ख़िलाफ़ टेस्ट के बाद 898 रेटिंग अंक दिए थे जो उनके करियर की उच्चतम रेटिंग थी.

लेकिन सर्वकालीन सूची में यह 29वीं सर्वश्रेष्ठ रेटिंग है.

ब्रैडमैन को 1948 में करियर के अंतिम दौर में भारत के ख़िलाफ़ टेस्ट के बाद 961 रेटिंग अंक मिले थे जो कि एक रिकॉर्ड है.

पोंटिंग, संगकारा, कैलिस और लारा भी 900 से अधिक रेटिंग अंक हासिल कर चुके हैं. आईसीसी के अनुसार 900 से अधिक की रेटिंग विश्व स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले बल्लेबाज़ो को दी जाती है.

पोंटिंग को 1996 में 942 रेटिंग अंक मिले थे और वह इस सूची में संयुक्त तीसरे स्थान पर हैं जबकि संगकारा को साल 2007 में 938 रेटिंग अंक मिले थे. वह संयुक्त छठे स्थान पर हैं.

कैलिस को 2007 में 935 रेटिंग अंक मिले थे और इस सूची में संयुक्त 10वें स्थान पर हैं. इसी तरह लारा को 2004 में 911 रेटिंग अंक मिले थे और सूची में उनका 23वां स्थान है.

प्रभावशाली

(दाएं से बाएं) जैक कालिस, ब्रायन लारा, रिकी पोंटिॆंग, कुमार संगकारा

इस रेटिंग से पता चलता है कि अपने करियर के शिखर पर सचिन अन्य खिलाड़ियों जितने प्रभावशाली नहीं थे.

वह अपने करियर में पाँच बार आईसीसी टेस्ट रैंकिंग के शीर्ष पर पहुंचे. सचिन पहली बार 1994 में और आख़िरी बार 2010 में इस मुक़ाम पर पहुंचे थे.

इससे पता चलता है कि कितने लंबे समय तक सचिन ने लगातार अच्छी क्रिकेट खेली है.

एक बल्लेबाज़ के करियर को मापने के अलग मापदंड भी हैं. क्रिकेट के कुछ शुद्धतावादी विश्लेषक आँकड़ों से अलग कौशल, शैली और दबदबे को ज़्यादा महत्व देते हैं.

'मास्टरली बैटिंगः 100 ग्रेट टेस्ट सेंचुरीज' पुस्तक के लेखक पैट्रिक फेर्रिडे और डेविड विल्सन ने रन, परिस्थिति, गेंदबाज़ी के स्तर, अवसर, गति, सिरीज़ के प्रभाव, मैच के प्रभाव आदि मानकों को आधार बनाकर खिलाड़ियों की सूची बनाई.

इस सूची में सचिन की 1998 में चेन्नई में ऑस्ट्रलिया के ख़िलाफ़ खेली गई नाबाद 155 रन की पारी को 100वां स्थान दिया गया है.

अपने टेस्ट करियर में 51 शतक बनाने वाले खिलाड़ी के लिए यह बहुत सामान्य सी बात लगती है. इस सूची में लारा के पाँच शतक शामिल हैं. इनमें से उनके तीन शतक शीर्ष 20 पारियों में शुमार हैं.

सचिन बनाम द्रविड़

सचिन तेंदुलकर

किताब के सह-लेखक पैट्रिक फेर्रिडे कहते हैं,"सचिन तेंदुलकर की शोहरत का आधार उनका लंबा करियर और खेल में निरंतरता है.

सबसे ख़ास तथ्य यह है कि उन्होंने पूरे करियर में भारत के आइकन खिलाड़ी के दबाव के साथ खेला है."

वो आगे कहते हैं, "लेकिन मुझे नहीं लगता है कि लारा की तरह उन्होंने शानदार पारियां खेली हैं. लारा की अधिकांश पारियों ने मैच को बचाने या जिताने में अपनी भूमिका निभाई है. सचिन अक्सर अपनी टीम के साथी खिलाड़ियों के बीच छिप से जाते थे."

किसी खिलाड़ी के महत्व को मापने के लिए 2010 में एक और तरीक़ा बनाया गया था. इसमें किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन की उसी मैच में दूसरे खिलाड़ी के प्रदर्शन से तुलना की जाती है.

इस अवधारणा को पेश करने वाले जयदीप वर्मा भारतीय क्रिकेट में राहुल द्रविड़ के योगदान को सचिन से बड़ा मानते हैं.

उन्होंने कहा, "द्रविड़ ने सचिन से कम मैच खेले हैं लेकिन उनसे ज़्यादा सिरीज़ों में निर्णायक भूमिका निभाई है. द्रविड़ ने आठ बार सिरीज़ में निर्णायक पारी खेली थी जबकि सचिन के खाते में ऐसी छह पारियां हैं."

उन्होंने कहा, "सचिन ने अपने करियर में कभी भी बड़े मैचों में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है. देश के क्रिकेट इतिहास को बदलने में द्रविड़ की भूमिका सचिन से ज़्यादा है."

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