'शतरंज के हैरी पॉटर हैं कार्लसन'

  • 8 नवंबर 2013
कार्लसन

पांच बार के विश्व चैंपियन भारत के विश्वनाथन आनंद को चुनौती देने वाले नार्वे के युवा खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन बेबाकी से अपनी दो कमज़ोरियों को स्वीकार करते हैं . पहली यह कि वह अच्छे विजेता नहीं हैं और दूसरी कि उन्हें हार पसंद नहीं है.

64 ख़ानों के इस खेल के महानतम खिलाडियों में से एक रूस के गैरी कास्परोव दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी कार्लसन को हैरी पॉटर टाइप का सुपर टैलेंट मानते हैं.

साल 2010 में कार्लसन विश्व शतरंज महासंघ की शीर्ष खिलाड़ियों की सूची में टॉप पर पहुंचे थे और उनका स्कोर अपने कोच कास्परोव से भी ज़्यादा था.

22 साल के कार्लसन ने पिछले महीने ओस्लो में संवाददाताओं से कहा था, "आप दुनिया का नंबर एक खिलाड़ी होने के साथ हार को आसानी से पचाने वाले खिलाड़ी नहीं हो सकते. लेकिन मैं साथ ही अच्छा विजेता भी नहीं हूं."

उन्होंने कहा, "मैं जीतने वाले खिलाड़ी के साथ मुस्कराते हुए फ़ोटो नहीं खिंचा सकते. खासकर जबकि वे जीत के हक़दार न हों."

फ़ैशन मॉडल

शतरंज से मिली फुर्सत में कार्लसन फ़ैशन मॉडल हैं. प्रतिष्ठित अमरीकी पत्रिका टाइम ने उन्हें 2013 में दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शुमार किया है. यह तब है जबकि उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में आनंद के ख़िलाफ़ एक बाजी भी नहीं खेली है.

कार्लसन अगर आनंद को हरा देते हैं तो वह 22 साल की उम्र में विश्व ख़िताब जीतने के कास्परोव के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेंगे. हालांकि कास्परोव ने जब यह ख़िताब जीता था तो उनकी उम्र कार्लसन से कुछ महीने कम थी.

कार्लसन

पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं और कार्लसन पर यह जुमला फिट बैठता है. वह विलक्षण प्रतिभा के धनी थे. दो साल की उम्र में ही उन्हें सभी कार ब्रांड्स का नाम याद हो गया और बाद में उन्होंने नार्वे के नगर निगमों, उनके झंडों और प्रशासनिक केन्द्रों की सूची भी याद कर ली.

उनका शतरंज से परिचय उनके पिता ने कराया था. बड़ी बहन से साथ प्रतिद्वंद्विता से कार्लसन की दिलचस्पी शतरंज में बढ़ी और आठ साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला टूर्नामेंट खेला.

कार्लसन 2004 में उस समय सुर्खियों में आए जब उन्होंने पूर्व विश्व चैंपियन अनातोली कार्पोव को शिकस्त दी, कास्परोव को ड्रा के लिए विवश किया और ग्रैंडमास्टर बन गए.

इस शानदार उपलब्धि पर वाशिंगटन पोस्ट ने उन्हें 'शतरंज का मोज़ार्ट' कहा. लेकिन अस्त व्यस्त और गंभीर दिखने वाला यह बच्चा यही रुकने वाला नहीं था. अगले कुछ सालों में उन्होंने तेज़ी से कामयाबी की सीढ़ियां चढीं.

रॉकेट की रफ़्तार

कास्परोव ने बिज़नेस इनसाइडर में अपने ताज़ा लेख में लिखा है, "कार्लसन रॉकेट की रफ़्तार से रेटिंग लिस्ट में शीर्ष पर पहुंचे. इतनी कम उम्र में यह निरंतरता और दृढ़ता दुर्लभ ही देखने को मिलती है."

रूसी दिग्गज ने 2009 में कार्लसन को कोचिंग दी थी. उन्होंने कहा, "मैं कोई डम्बलडोर नहीं हूं लेकिन मैं कार्लसन में हैरी पॉटर वाली खूबियां देखता हूं. वह बेहद प्रतिभाशाली हैं और इस प्राचीन खेल के महानतम खिलाड़ियों में शामिल होने के लिए अग्रसर हैं."

कार्लसन

लेकिन अपने खेल के बारे में कार्लसन का कहना है, "मेरे खेल में अभी सुधार के गुंजाइश है. हर बाजी में मुझे लगता है कि मैं गलतियां करता हूं. इसमें कोई शक नहीं कि मुझमें प्रतिभा है लेकिन मुझे नहीं कि वह क्या है."

कार्लसन की उपलब्धियों के ताज में केवल विश्व ख़िताब की कमी है और वह जानते हैं कि इस बार वह जानते हैं कि इस बार उन्हें जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा है.

अगस्त में कार्पोव ने नार्वे की समाचार एजेंसी एनटीबी से कहा था, "सबकुछ कार्लसन के हाथ में है. वह आज़ जिस मुकाम पर हैं वहां वह किसी को भी हरा सकते हैं, विश्व चैंपियन को भी."

कार्लसन और 2007 से विश्व ख़िताब पर कब्जा जमाए आनंद के बीच मुक़ाबला शनिवार से चेन्नई में शुरू होगा जिसमें 12 बाजियां खेली जाएंगी.

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