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'सचिन को अंदाज़ा हो गया था'

 गुरुवार, 10 अक्तूबर, 2013 को 19:22 IST तक के समाचार
सचिन, टेस्ट, क्रिकेट

भारत के पूर्व क्रिकेटरों का मानना है कि सचिन जैसा दूसरा कोई खिलाड़ी शायद ही कभी हो. मनिंदर सिंह का कहना है कि सचिन को कहीं न कहीं लगा होगा कि उन्हें रिटायर हो जाना चाहिए. वहीं सैयद किरमानी मानते हैं कि सचिन ने क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है.

सैयद किरमानी, पूर्व विकेटकीपर, भारत

एक न एक दिन सभी रिटायर होते हैं लेकिन सचिन ने जिस तरह का क्रिकेट खेला है मुझे नहीं लगता कि क्रिकेट के इतिहास में ऐसा कोई दूसरा खिलाड़ी पैदा होगा.

हमें तो शुरू में पता नहीं था कि वो लीजेंड बनने वाला है लेकिन एक अंदेशा था कि ये खिलाड़ी कहीं न कहीं पहुँचने वाला है. वो क्रिकेट को बहुत ऊँचाई पर लेकर गए हैं. 200 टेस्ट खेलना बहुत गौरव की बात है.

मैं नहीं समझता कि किसी चयनकर्ता ने सचिन को कहा होगा कि आप रिटायर हो जाओ या आपको रिटायर होना चाहिए. हर चयनकर्ता उन्हें अपनी टीम में बरकरार रखना चाहता है.

सचिन अपने पूरे करियर में एक बहुत अच्छे रोल मॉडल रहे हैं. किसी खिलाड़ी के लिए ऊँचाई पर पहुँचना आसान होता है लेकिन उस ऊँचाई पर अपने को बरकरार रखना बहुत मुश्किल हो जाता है.

सैयद किरमानी

सैयद किरमानी मानते हैं कि शायद ही सचिन जैसा कोई दूसरा क्रिकेट खिलाड़ी हो.

सचिन ने हमेशा अपने को अनुशासित रखा. उनके चरित्र, उनकी विनम्रता ने उनके लिए बहुत सम्मान अर्जित किया है.

कीर्ति आज़ाद, पूर्व क्रिकेटर

यह सोचना बहुत कठिन है कि सचिन भारतीय टीम में नहीं होंगे. वो 24 साल से हमारे जीवन का हिस्सा बन गए थे. क्रिकेट हमारे देश में एक धर्म की तरह है और वो इतने लंबे समय तक भारतीय टीम के अंग थे. उन्होंने देश-विदेश में हर जगह अपने प्रशंसक बनाए. उनके बारे में कुछ कहना सूरज को दिया दिखाने जैसा है.

उनकी किसी ने कितनी भी आलोचना की हो लेकिन सचिन ने उसका अपने मुँह से जवाब नहीं दिया है. उन्होंने अपने आलोचकों को हमेशा अपने बल्ले से जवाब दिया है.

सचिन ने इतनी ज़्यादा यादगार पारियाँ खेली हैं कि एक-दो का नाम लेना मुश्किल है लेकिन अगर नाम लेना ही हो तो उनका दोहरा शतक और शारजाह में उन्होंने जो लगातार दो मैचों में शतक बनाए थे जिसके बाद शेन वार्न ने कहा था कि उनके सपने में सचिन आते हैं, वो पारियां मुझे अक्सर याद आती हैं.

कीर्ति आज़ाद

पूर्व क्रिकेटर और सांसद कीर्ति आज़ाद को सचिन के शारजाह में लगाए दो शतक बेहद पसंद हैं.

इतने बड़े खिलाड़ी बनने के बाद भी वो जितने विनम्र बने रहे वो उनकी बेहद ख़ास बात है.

मनिंदर सिंह, पूर्व गेंदबाज़, भारत

ये दिन ज़्यादा दूर लग नहीं रहे थे. हमने चैंपियन लीग में भी देखा था कि उनके बैट पर बॉल ठीक से नहीं आ रही थी. शायद ये अंदाज़ा उन्हें हो गया था कि अब वक़्त हो गया है मुझे चले जाना चाहिए. एक वजह यह भी है कि वेस्टइंडीज़ दौरे के बाद भारत को अफ़्रीका, न्यूज़ीलैंड फिर इंग्लैंड जाना है.

ऐसे में जब आपके बैट पर बॉल न आ रही हो, आपके रिफ्लेक्सेस स्लो हो रहे हों तो आप ऐसे दौरे नहीं करना चाहते हैं जहाँ समझ ही नहीं आता है कि बॉल के साथ क्या हो रहा है.

हर कोई तो नहीं लेकिन संदीप पाटिल का ऐसा रुतबा है कि वो खिलाड़ियों से बात कर सकें लेकिन मुझे नहीं लगता कि सचिन के मामले में ऐसा हुआ होगा. सचिन तेंदुलकर 24 साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुके हैं. तो उन्हें कहीं-कहीं लगा होगा कि मुझे रिटायर हो जाना चाहिए.

वो मुंबई के खिलाड़ी रहे हैं. वहाँ उन्होंने बचपन से क्रिकेट खेला है और आगे बढ़े हैं. 200 मैच खेलना बहुत बड़ा अवसर है तो अगर रोटेशन के अनुसार उनके होम ग्राउंड की बारी न भी आती हो तो उनका 200वां मैच उनके होम ग्राउंड पर होना चाहिए.

सचिन के योगदान को याद करने की ज़रूरत ही नहीं है, वह तो हर हिंदुस्तानी के दिल पर गढ़ा हुआ है, लिखा हुआ है. अगर मुझे उनके बारे में कहना हो तो यह कहना चाहूँगा कि इतना बड़ा खिलाड़ी होने के बावजूद वो हमेशा विनम्र बने रहे. वो एक ऐसे वृक्ष की तरह हैं जिस पर जितना अधिक फल आता है वो उतना ही झुका रहता है. जितनी नम्रता से वो मेरे साथ टेस्ट खेलते वक़्त बात करते थे, आज भी उसी तरह पेश आते हैं.

सलीम दुर्रानी, पूर्व क्रिकेटर

सचिन तेंदुलकर इस खेल को ख़ुदा की देन है. उसने जिस तरह क्रिकेट खेला है, उसकी जो स्टाइल है वो अल्लाह की देन है. उनमें क्रिकेट की सारी खूबियाँ कुदरतन थी. वो एक परिपूर्ण बल्लेबाज थे.

भारत में बहुत से अच्छे खिलाड़ी हुए हैं लेकिन सचिन की किसी खिलाड़ी से तुलना करना संभव नहीं है.

उसने जिस तरह से अपने को संभाला, वो जिस तरह से क्रिकेट को समर्पित रहे हैं उसके लिए मेरे पास अल्फाज नहीं है. उन्होंने क्रिकेट को अपने धर्म की तरह अपनाया था.

वो दुनिया में जहाँ भी गए वहाँ अपनी काबिलियत का प्रदर्शन किया. उन्होंने जितने रिकॉर्ड बनाया है उनका वर्णन संभव नहीं. अपने खेल की बदौलत वो यूथ आइकन बन गए.

उनकी कई पारियाँ यादगार रही हैं. इंग्लैंड में उन्होंने एक बार 195 रन बनाए थे. मुझे वो पारी बहुत पसंद आई थी.

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