रसूल को टीम में न खिलाने पर उमर अब्दुल्लाह नाराज़

  • 3 अगस्त 2013

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए चुने जाने वाले कश्मीर के युवा खिलाड़ी परवेज़ रसूल को ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ होने वाली पांच वनडे की श्रृंखला के एक भी मैच में मौक़ा नहीं दिए जाने पर कड़ी नाराज़गी का इज़हार किया है.

उमर ने अपने ट्विटर एकाउंट पर लिखा, ''ज़िम्बाब्बे में परवेज़ रसूल को मौका न देने से मैं निराश हूँ. इस युवक को ख़ुद को साबित करने का एक मौका तो दो. उसका हौसला इस तरह पस्त करने के लिए इतनी दूर ज़िम्बाब्बे ले जाने की क्या ज़रूरत थी. घर में ऐसा करना सस्ता नहीं रहता???''

केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने भी रसूल को न लिए जाने पर हताशा जताई है. उन्होंने ट्विटर पर कहा है कि परवेज़ के न खेलने से वे निराश हुए हैं और आसानी से जडेजा की जगह रसूल को लिया जा सकता था.

रसूल के अलावा मुंबई के अजिंक्या रहाणे को भी इस सिरीज़ में खेलने का मौका नहीं मिला था लेकिन अंतिम मैच में आख़िरकर उन्हें शामिल कर लिया गया.

सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर काफ़ी हलचल है. हालांकि कई लोग ट्विटर पर लिख रहे हैं कि ये टीम प्रबंधन पर छोड़ दिया जाना चाहिए.

वरिष्ठ पत्रकार अयाज़ मेमन ने ट्विट किया है- मैं भी चाहता था कि आज रसूल खेले. रसूल को न लेने का फैसला बहुत कड़ा प्रतीत होता है. लेकिन टीम चयन का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए. ये प्रबंधन का फैसला होना चाहिए.

वहीं@n1v_ने ट्विट किया है- रसूल के मुद्दे पर कश्मीर के लोगों को उत्तेजित नहीं होना चाहिए. मनोज तिवारी आपको याद है. क्या वो बंगालियों के खिलाफ़ साज़िश थी?

जबकि यश @yashpadh ने ट्विटर पर लिखा है कि अगर जडेजा की जगह रसूल को ले लेते तो ज़्यादा फ़र्क नहीं पड़ता. ये टीम प्रबंधन का फैसला कड़ा प्रतीत होता है.

घाटी से पहले खिलाड़ी जो टीम में पहुँचे

ग़ौरतलब है कि चौबीस साल के परवेज़ रसूल को ज़िम्बाब्वे दौरे के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया था.

इस चयन के बाद वे भारतीय टीम में जगह बनाने वाले घाटी के पहले क्रिकेटर बन गए थे और उसके बाद घाटी में काफ़ी खुशियां मनाईं गईं थी.

भारत ने ज़िम्मबाब्वे से लगातार चार मैच जीतकर श्रृंखला पर क़ब्ज़ा कर चुकी है इसलिए बहुत से समीक्षक उम्मीद लगाए हुए थे कि नए खिलाड़ी परवेज़को कम से कम आख़िरी मैच में ज़रूर मौक़ा मिलेगा.

ये वही परवेज़ रसूल हैं जिनसे चार साल पहले बैंगलोर के चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर सिलसिलेवार बम विस्फ़ोटों के मामले में पूछताछ की गई थी, हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था.

परवेज़ रसूल
परवेज़ रसूल एक बढ़िया ऑफ़ स्पिनर माने जाते हैं.

अपने चयन के बाद परवेज़ ने कहा था कि वह यह साबित करना चाहते हैं कि वह एकक्रिकेटर हैं 'आतंकवादी' नहीं.

उनके प्रशंसकों का कहना है कि परवेज़ के चुने जाने से घाटी के युवाओं में संदेश जाएगा कि वह भी अपने देश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं.

उस समय पीटीआई से बातचीत के दौरान परवेज़ रसूल ने कहा था, ''मैं बहुत ख़ुश हूं कि मेरा नाम भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल कर लिया गया है. इस सीज़न में मैंने बहुत मेहनत की है. घरेलू क्रिकेट में मैंने 33 विकेट लिए हैं और 594 रन बनाए हैं. ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ भी मैंने अच्छा खेला था. इसलिए मुझे ज़िंबाब्वे दौरे के लिए चुने जाने की उम्मीद थी.''

प्रदर्शन

फ़रवरी में 45 रन देकर ऑस्ट्रेलिया के सात विकेट लेने वाले परवेज़ का कहना था, ''मेरा काम क्रिकेट खेलना और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है. अल्लाह ने पूरी घाटी को प्यार और इज्ज़त बख़्शी है. घाटी के क्रिकेट प्रशंसको के विश्वास को तो मैंने क़ायम रखा है. अब मुझे उम्मीद है कि पूरे देश की उम्मीदों को भी क़ायम रख पाऊंगा.''

परवेज़ ने अब तक 17 प्रथम श्रेणी क्रिकेट मैचों में 38.57 के औसत से 1003 रन बनाए हैं और 46 विकेट लिए हैं.

परवेज़ घाटी के पहले क्रिकेटर थे जिन्हें आईपीएल में खेलने का मौक़ा मिला था.

आईपीएल छह में उन्हें पुणे वारियर्स टीम में शामिल किया गया था.

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