करो या मरो जैसे मुकाबले में भारत भिड़ेगा वेस्टइंडीज से

  • 5 जुलाई 2013
रोहित शर्मा

वेस्टइंडीज़ में खेली जा रही त्रिकोणीय एकदिवसीय सिरीज़ में शुक्रवार को भारत एक बेहद अहम मुक़ाबले में मेज़बान वेस्टइंडीज़ का सामना करेगा.

यह मैच भारत के लिए फाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए लगभग करो या मरो जैसा है. अपनी इस हालत के लिए भारत ख़ुद ज़िम्मेदार है क्योंकि पहले तो उसे वेस्टइंडीज़ ने एक विकेट से हराया और उसके बाद श्रीलंका ने भी 161 रनो से करारी मात दी.

श्रीलंका के ख़िलाफ पिछले 10 में से सात मैच जीतने वाले भारत से इतने खराब प्रदर्शन की शायद ही किसी ने कल्पना की हो. पहले तो भारत के गेंदबाज़ो ने 348 रन लुटाये और उसके बाद सारी टीम महज़ 187 रनो पर सिमट गई.

इतना ही नही श्रीलंका एक बोनस अंक भी लेने में कामयाब रहा. अब अंक तालिका में वेस्टइंडीज़ नौ अंको के साथ पहले और श्रीलंका पाँच अंको के साथ दूसरे स्थान पर है जबकि भारत को अभी भी जीत और अंक का खाता खोलना है.

अब हालत ये है कि भारत को हर हाल में पहले तो वेस्टइंडीज़ और उसके बाद मंगलवार को श्रीलंका से होने वाले मैच में भी जीत हासिल करनी होगी और इसके साथ-साथ यह दुआ भी करनी होगी कि श्रीलंका भारत और वेस्टइंडीज़ से होने वाले अपने दोनो मैच हार जाए.

कप्तानी का भार

विराट कोहली

यकीनन ये एक ऐसी उम्मीद है जिसपर पूरा उतर पाना अब भारतीय टीम के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकता है. चैंपियंस ट्रॉफी में अपनी शानदार बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी के दम पर सभी टीमो को मात देने वाली भारतीय क्रिकेट टीम वेस्टइंडीज़ पहुंचते ही अपनी लय खो बैठी.

शिखर धवन, विराट कोहली और दिनेश कार्तिक का बल्ला नही चला तो मुरली विजय, रोहित शर्मा, रविन्द्र जडेजा और सुरेश रैना अच्छी शुरूआत को बड़े स्कोर में बदलने में नाकाम रहे.

गेंदबाज़ी में युवा तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रहे तो अनुभवी इशांत शर्मा भी बेअसर रहे. खासकर श्रीलंका के बल्लेबाज़ो ने भारतीय गेंदबाज़ी को जैसे आईना दिखा दिया. महेंद्र सिंह धोनी का चोटिल होकर टीम से बाहर होना भारत को महंगा पडा.

विराट कोहली को अभी दोष नही दिया जा सकता क्योंकि कप्तानी का भार संभालने के लिए उनके पास धोनी जैसा अनुभव नही है. इस त्रिकोणीय सिरीज़ में भारत की फिल्डिंग का स्तर भी उतना अच्छा नही दिखा जितना चैंपियंस ट्रॉफी में था.

आखिरकार भारतीय टीम कैसे अचानक अर्श से फर्श पर आ गई यह सवाल कई क्रिकेट पंडितो को कचोट रहा होगा.

भारतीय गेंदबाज़ी श्रीलंका के ख़िलाफ इतनी असहाय दिखी कि उपुल थरंगा और महेला जयवर्धने ने पहले विकेट के लिए 213 रन जोडे और केवल एक विकेट के नुकसान पर 348 रन बनाकर नया रिकार्ड भी बना दिया.

नया रिकॉर्ड

उमेश यादव

इससे पहले एकदिवसीय क्रिकेट में केवल एक विकेट खोकर सबसे ज़्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के नाम था जब उसने साल 2006 में ब्रिस्बेन में श्रीलंका के ख़िलाफ एक विकेट खोकर 267 रन बनाए थे.

इसके साथ ही भारत के नाम एक और नया रिकार्ड बना जब टॉस जीतकर पहले फिल्डिंग करते हुए वह 161 रनो के विशाल अंतर से हारा. इससे पहले भारत साल 2002 में विजयवाड़ा में वेस्टइंडीज़ से 135 रनो से हारा था.

अब भारत वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ कैसा खेलता है यह तो मैच के बाद ही पता चलेगा लेकिन वेस्टइंडीज़ क्रिस गेल, सैमी, पोलार्ड और सलामी बल्लेबाज़ जॉनसन चार्लस के साथ-साथ डैरेन ब्रावो जैसे दमदार खिलाडियो के दम पर कही से भी कमज़ोर टीम नही लगती.

गेंदबाज़ी में वेस्टइंडीज़ के पास सुनील नारायण जैसा तुरूप का इक्का है जो अपनी स्पिन से कभी भी मैच में बदलाव ला सकता है. वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ भारत भुवनेश्वर कुमार को टीम से जगह दे सकता है जो श्रीलंका के ख़िलाफ नही खेले थे.

अब इस त्रिकोणीय सिरीज़ के बचे हुए सारे बाकि मैच पोर्ट ऑफ स्पेन में होंगे, जबकि अब तक हुए मैच किंग्स्टन में खेले गए थे. हो सकता है मैदान बदलने से भारत का भाग्य भी बदल जाए जिसकी क्रिकेट में खेल के बाद सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है.

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