डोपिंग और ड्रग के साये में विजेंदर का करियर

  • 8 अप्रैल 2013
विजेन्दर सिंह
विजेन्दर का करियर मुश्किल दौर से गुजर रहा है.

राष्ट्रमंडल खेलो में स्वर्ण पदक, विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक और ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले बॉक्सर विजेंदर सिंह को साइप्रस और क्यूबा में होने वाली मुक्केबाज़ी चैंम्पियनशिप के लिए भारतीय दल में जगह नही मिली है.

इसका सीधा-सीधा मतलब यह भी है कि अब विजेंदर सिंह अक्तूबर में कज़ाकिस्तान में होने वाली विश्व चैंम्पियनशिप में भी भाग नही ले सकेंगे. क्योंकि पूरी तैयारी के बगैर पदक की उम्मीद करना एक मुश्किल चुनौती होगी.

विजेंदर सिंह ने पिछले दिनो साइप्रस और क्यूबा के लिए लगे ट्रेनिंग कैम्प में हिस्सा नही लिया था जिसे आधार बना कर उन्हे टीम से बाहर किया गया.

भारत जैसे क्रिकेट के दीवाने देश में कि जब उनका नाम पिछले दिनो ड्रग विवाद में आया तो किसी के लिए भी इस खबर पर भरोसा करना मुश्किल था.

खून, बाल और पेशाब के नमूने

लेकिन जैसे जैसे दिन बीतते गए वैसे वैसे शक का दायरा बढता गया और अब आलम यह है कि विजेंदर सिंह का मुक्केबाज़ी करियर दांव पर लगता नज़र आ रहा है.

विजेंदर सिंह एक मुक्केबाज़ के रूप में भारत के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं इसका अंदाज़ इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह भारत के इकलौते मुक्केबाज़ है जिनकी विश्व वरीयता एक समय में 75 किलो वज़न वर्ग में नंबर एक रही थी.

हाल ही में नाडा ने उनके ख़ून, बाल और पेशाब के नमूने ले लिए हैं.

इसके बाद उम्मीद की जा रही है कि विजेंदर से जुड़े ड्रग तस्करी और इसके इस्तेमाल के आरोपो के पीछे की सच्चाई भी सामने आ जाएगी. हालांकि इसमें अभी थोडा और समय लगेगा.

इस पूरे मसले को लेकर वरिष्ठ खेल पत्रकार नॉरिस प्रीतम कहते हैं, “यह खेलों में ड्रग के इस्तेमाल का मामला नही है और ना ही विजेंदर सिंह अभी तक डोप टेस्ट में फेल हुए है.”

मुक्केबाज़ी के खेल की इज्जत

विजेन्दर सिंह
विजेन्दर सिंह मुक्केबाजी के कई पदक जीत चुके हैं.

उन्होंने कहा, “विजेंदर सिंह पर दरअसल ड्रग तस्करी से जुडे होने का आरोप है और उस मामले में भी कोई ठोस सबूत अभी तक नही मिले हैं जिनके आधार पर उन्हें मुज़रिम करार दिया जा सके. लेकिन विजेंदर सिंह की जो छवि बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक पाने के बाद एक सीधे-साधे और मासूम खिलाडी की बनी थी उस पर ज़रूर एक धब्बा लगा है.”

नॉरिस मानते हैं कि विजेंदर को इससे कितना नुकसान हुआ है यह तो अभी पता नही है लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में मुक्केबाज़ी के खेल की इज्जत ज़रूर कम हुई है.

विजेंदर सिंह की कार के इस्तेमाल को लेकर उठे सवालों पर नॉरिस प्रीतम कहते है कि यह बात समझ से परे है कि एक इंसान की कार इस्तेमाल होती रहे और उसका उसे पता ना हो ऐसा संभव नही है. राम सिंह जिन्होंने विजेंदर पर ड्रग इस्तेमाल करने के आरोप लगाए है उन्हें विजेंदर कैसे कभी भी कही भी कार इस्तेमाल करने के लिए दे सकते थे.

उन्होंने कहा, “हो सकता है विजेंदर की कार का इस्तेमाल पहले भी हुआ है जिसे विजेंदर शर्म की वज़ह से ना बता रहे हो लेकिन इसमें पहली नज़र में शक तो होता ही है हॉलाकि यह कितना सच है यह तो जांच में ही पता चलेगा.”

विजेंदर की चुप्पी

राज कुमार सांगवान भारत के पूर्व मुक्केबाज़ और सरकारी पर्यवेक्षक रह चुके हैं.

राम सिंह और विजेंदर के रिश्तों की बात पर वे कहते हैं, “राम सिंह फिलहाल नैशनल कैम्प से हटा दिये गए है. वे भी विजेंदर सिंह के ही कहने पर ही कैंप से जुड़े थे हालांकि वह एक खिलाडी के तौर पर बहुत पहले खेलना छोड चुके है. ऐसे में जबकि राम सिंह विजेंदर सिंह के दोस्त भी है अगर वह उन पर ड्रग इस्तेमाल के आरोप लगाते है तो कही ना कही शक तो होता ही है.”

इसी मामले में राष्ट्रीय चयनकर्ता ओम प्रकाश भारद्वाज कहते हैं, “पूरे घटनाक्रम से विजेंदर सिंह का मनोबल काफी गिरा हुआ है लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि वह निर्दोष है क्योंकि वह भी जानता है कि किसी भी चैंम्पियनशिप से पहले बेहद कड़े डोप टेस्ट से गुजरना होता है. जहां तक उनके किसी भी चैंम्पियनशिप में भाग लेने का सवाल है तो बिना ट्रायल के उनका भाग लेना या विदेशी टूर्नामैंट में खेलना मुश्किल है.”

भारद्वाज द्रोणाचार्य पुरस्कार सम्मानित हैं और मुक्केबाज़ी कोच भी रह चुके हैं. इस मुश्किल वक्त में एक बेहतरीन और शानदार कामयाबी हासिल करने वाला भारतीय मुक्केबाज़ विजेंदर सिंह फिलहाल किसी भी बात का जवाब नही दे रहे हैं.

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