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भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया: धोनी की साख दाँव पर

 शुक्रवार, 22 फ़रवरी, 2013 को 07:12 IST तक के समाचार

भारतीय टीम बदलाव से गुज़र रही है

क्रिकेट प्रेमियों को शुक्रवार से भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हाई प्रोफाइल टेस्ट सिरीज़ देखने को मिलेगी.

दोनों देशों के कप्तानों के लिए ये बेहद अहम शृंखला है. फिलहाल दोनों टीमें एक ही सिक्के के दो पहलुओं की तरह नज़र आ रही हैं.

क्लिक करें धोनी क्या टेस्ट मैच जिता पाएँगे?

भारत को जहाँ राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे दिग्गज खिलाड़ियों की कमी खलेगी वहीं ऑस्ट्रेलिया की टीम से रिकी पोटिंग और माइकल हसी जैसे चैंपियन खिलाड़ी गायब होंगे.

दोनों टीमें एक समय नंबर एक पर थीं लेकिन पिछले कुछ समय से रैकिंग में नीचे खिसक गई हैं. क्लिक करें भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों को ही ऐसे ऑल राउंडर की तलाश है जो छठे नंबर पर बल्लेबाज़ी कर सके.

अगर कप्तानों की बात करें तो माजरा थोड़ा अलग है. महेंद्र सिंह धोनी कभी सबकी आँखों के तारे थे लेकिन इस समय सवालों के घेरे में हैं. वहीं ऑस्ट्रेलिया के कप्तान माइकल क्लार्क अचानक सबके पसंदीदा हो गए हैं.

सचिन की जगह खाली होगी?

ऑस्ट्रेलिया के पास बेहतर तेज़ गेंदबाज़ हैं लेकिन भारत के पास बेहतर स्पिनर हैं. अगर 11 खिलाड़ियों में से तीन स्पिनर हुए तो ये पुराने दिनों जैसा होगा जब स्पिन का बोलबाला था.

लेकिन ऑलराउंडर के अलावा नंबर चार भी भारत के लिए सरदर्द बना हुआ है. फिलहाल सचिन तेंदुलकर इस नंबर पर खेलते हैं. पर क्या जब साल के आखिर में भारत दक्षिण अफ्रीका जाएगा तब भी सचिन खेल रहे होंगे?

टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की बातें लंबे समय से चली आ रही हैं. चयनकर्ताओं का रवैया यही रहा है कि जब समय आएगा तब देखा जाएगा. जिसका मतलब ये है कि शायद चार टेस्ट मैचों के बाद बल्लेबाज़ी क्रम में भारत को दो खाली स्थान भरने पड़ेंगे.

ख़ैर इन सब बातों की बीच भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सिरीज़ का मुख्य केंद्र दोनों कप्तान ही रहेंगे.

क्लार्क बनाम धोनी

माइकल क्लार्क ने 151 रन बनाकर नौ साल पहले बंगलौर में अपने करियर की शुरुआत की थी. उस समय उन्हें भावी कप्तान के तौर पर देखा जा रहा था. लेकिन उनकी हस्ती में कुछ ऐसी बात थी जिस वजह से उन्हें बहुत देर बाद स्वीकार किया गया.

क्लार्क स्मार्ट थे, दिलकश थे, उनकी मॉडल गर्लफ्रेंड थी, पहनावा भी कुछ अलग था. वे सबसे जुदा थे और इसी वजह से लोगों ने उन्हें अलग तरीके से लिया.

भारत के मौजूदा दौरे के बारे में उनका कहना है कि वे इस कड़ी प्रतियोगिता मानते हैं और इसके बाद होने वाली ऐशिज़ सिरीज़ से वे अपनी जगह पुख्ता करना चाहते हैं.

वहीं क्लिक करें महेंद्र सिंह धोनी का मामला थोड़ा पेचीदा है. उन्होंने भारत को दो विश्व कप जीताए हैं. 20 महीने पहले तक की भी बात करें तो ऐसा लगता था कि धोनी कुछ भी गलत नहीं कर सकते.

लेकिन फिर इंग्लैंड में हुई सिरीज़ में भारत 0-4 से हार गया. ऑस्ट्रेलिया ने भी भारत को 4-0 से धो डाला. पिछले 28 सालों में भारत पहली बार घरेलू टेस्ट सिरीज़ में हारा है. इंग्लैंड ने भारत को हराया. अब देखना ये होगा कि अगर भारत फिर अपने ही ज़मीन पर हार जाता है तो क्या धोनी अपनी कप्तानी बचा पाएँगे?

काँटे की टक्कर

वैसे जब कोई टीम बड़े बदलाव के दौर से गुज़र रही होती है तो उसके प्रदर्शन और किस्मत पर नज़र रखना बेहद दिलचस्प हो जाता है. इसमें कप्तानों का रोल अहम होता है.

धोनी के लिए ये अपनी खोई साख वापस पाने का मौका है. भारतीय खेल प्रेमी आमतौर पर बीती बातें जल्द भुला देते हैं. अगर भारत ऑस्ट्रेलिया को हरा देता है तो लोग हालिया खराब प्रदर्शन को भूल जाएँगे.

लेकिन अगर धोनी बतौर बल्लेबाज़, विकेटकीपर और कप्तान के रोल में विफल रहते हैं तो इससे भारत पर दवाब और बढ़ेगा. खासकर तब जब भारतीय टीम खुद को संभालने की कोशिश कर रही है.

दरअसल इस टेस्ट सिरीज़ का मुख्य बिंदु शायद यही होगा कि दोनों देशों के कप्तानों ने कैसे दबाव में अपना काम किया.

धोनी का बहुत कुछ यहाँ दाँव पर लगा है लेकिन ये भी सच है कि कभी कभी ऐसे हालातों में ही हम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देते हैं.

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