क्या ये सहवाग के लिए आखिरी मौका है?

  • 11 फरवरी 2013
वीरेंद्र सहवाग के लिए ये करो या मरो श्रंखला मानी जा रही है.

रविवार को जब मुंबई अपने ही घर में शेष भारत के साथ ईरानी ट्रॉफी मुक़ाबला खेल रही थी, और पहली पारी के आधार पर शेष भारत की जीत पूरी तरह से तय थी तब शायद ही किसी की दिलचस्पी उस मैच में रही होगी.

लेकिन जब संदीप पाटिल की अगुवाई में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ चार टेस्ट मैचो की सीरीज़ के पहले दो टेस्ट मैचो के लिए चयनकर्ताओं ने जिस टीम का चयन किया उसमें इस मुकाबले की झलक साफ दिखाई दी.

इस मुकाबले में खेलने वाले हरभजन सिंह, मुरली विजय और अजिंक्य रहाणे के साथ-साथ शिखर धवन को भी पहले दो टेस्ट के लिए टीम में जगह मिल गई.

साथ ही इस चयन पर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं.

सबसे पहले तो सलामी बल्लेबाज़ वीरेंद्र सहवाग को टीम से बाहर करने का साहस चयनकर्ता नहीं दिखा खके.

सहवाग को मौका

इंग्लैंड के साथ खेली गई पिछली टेस्ट सीरीज़ में पहले टेस्ट मैच को छोडकर उनका बल्ला खामोश ही रहा, और सबसे बडा सवाल उनकी फिल्डिंग को लेकर है.

पुराने रिकार्ड के आधार पर उन्हे टीम में जगह तो मिली है लेकिन यह सीरीज़ उनके लिए बेहद अहम है, पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज और चयनकर्ता रह चुके सय्यद किरमानी कहते है, “सहवाग को खेलते हुए लंबा समय हो गया है उन्हें अब निरंतरता दिखानी होगी.”

वहीं तेज़ गेंदबाज़ो के तौर पर ईशांत शर्मा ही अनुभवी गेंदबाज़ के रूप में टीम में शामिल है. उनका साथ देने के लिए भुननेश्वर कुमार और अशोक डिंडा का चयन किया गया है, जबकि इनसे ज्यादा गति शमी अहमद के पास है.

इशांत शर्मा के कोच श्रृवण कुमार कहते है, “अब जबकि उमेश यादव घायल है, ज़हीर ख़ान लगभग टेस्ट क्रिकेट छोडने के कगार पर है तो ऐसे में शमी अहमद का टीम में ना होना निराशाजनक है. उन्हे कुछ वनडे खिलाकर टीम से बाहर कर दिया गया, वह अब नही खेलेंगे तो कब खेलेंगे, और अगर उन्हे खिलाना नही था तो कम से कम टीम में तो रखते क्योंकि खिलाडी बाहर बैढकर भी सीखता है.”

श्रृवण कुमार कहते हैं, “हमें बैंच स्ट्रैंथ भी तो बनानी होगी, जो नहीं हो रहा हैं. भुवनेश्वर कुमार को केवल वनडे और धरेलू क्रिकेट का अनुभव है जो काफी नही है.”

सुरेश रैना का दावा मज़बूत दिखा लेकिन टीम में जगह नहीं बना पाए.

भारतीय टीम में नम्बर 6 पर अभी भी कोई भरोसेमंद बल्लेबाज़ नही है. युवराज सिंह और सुरेश रैना को हांलाकि काफी अवसर मिले लेकिन वह फायदा उठाने में नाकाम रहे हैं. सुरेश रैना ने इंग्लैंड के ख़िलाफ वनडे सीरीज़ में शानदार खेल दिखाया और अब ईरानी ट्रॉफी में भी शतक बनाया जिससे उनका दावा मज़बूत था लेकिन रविंद्र जडेजा शायद गेंदबाज़ी के आधार पर उनसे बाज़ी मार गए.

नम्बर 6 का सवाल

वीरेंद्र सहवाग के कोच अमरनाथ शर्मा कहते है, “जडेजा को कुछ विकेट ज़रूर मिले है लेकिन वह बहुत अच्छी श्रेणी के स्पिनर नही है.”

हरभजन सिंह के तेवर ईरानी ट्रॉफी में तीखे ज़रूर नज़र आए लेकिन पुरानी धार आने में अभी समय लगेगा, शायद ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ उनका पूराना रिकार्ड काम कर गया.

सवाल ये भी है कि चयनकर्ताओं के सामने रविवार को ही टीम चुनने की क्या मजबरी थी. अभी ऑस्ट्रेलिया से अभी दो अभ्यास मैच भी होने है. अब उनमें जो अच्छा खेल दिखाएंगे उन खिलाड़ियों का क्या होगा.

सहवाग के कोच कहते हैं, “जब अपने ही देश में टेस्ट सीरीज़ खेली जाएगी तो ऐसे में इंतज़ार किया जा सकता था. टीम अभ्यास मुकाबलों के बाद घोषित होनी चाहिए थी.”

हमेशा की तरह भारतीय चयनकर्ताओं ने कई सवालो के साथ टीम का चयन किया है, जिसे सही साबित करने की ज़िम्मेदारी अब खिलाड़ियों पर है.