फ़ुटबॉल फ़िक्सिंग की दुनिया का नटवरलाल?

  • 7 फरवरी 2013
फ़ुटबॉल में फ़िक्सिंग के मामलों में विल्सन राजू पेरूमाल पर है शक.

इन दिनों फ़ुटबॉल की दुनिया सकते में है. यूरोपियन एंटी क्राइम एजेंसी यूरोपोल के ख़ुलासे के मुताबिक दुनिया भर में करीब 680 मैच फ़िक्स थे. इनमें वर्ल्डकप, यूरोपियन चैंपियनशिप क्वालिफाइर्स और चैंपियंस लीग के मुक़ाबले शामिल हैं.

इतने बड़े पैमाने पर मैच फ़िक्सिंग को अंजाम देने के पीछे कौन लोग हैं, इसको लेकर अब कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है. यूरोप में अलग-अलग एजेंसी मामले की जांच कर रही है.

इन जांचों के केंद्र में एशियाई सिंडिकेट का नाम सामने आ रहा है और संदेह का घेरा एक शख्स विल्सन राज पेरूमाल की ओर भी जा रहा है क्योंकि फ़ुटबॉल मैचों की फ़िक्सिंग के कई आरोप पहले से ही 47 साल के विल्सन पर लगे हुए हैं.

विल्सन को फरवरी, 2011 में फिनलैंड में हिरासत में लिया गया था, जब वे फर्जी पासपोर्ट के सहारे फिनलैंड के बाहर जाने की कोशिश कर रहे थे. विल्सन के मोबाइल फोन में सैकड़ों फ़ुटबॉल खिलाड़ियों और खेल संघों के अधिकारियों के नाम थे.

इसी आधार पर हुई पूछताछ के बाद ही फ़ुटबॉल की दुनिया में अब तक की सबसे बड़ी धोखाधड़ी के जांच की शुरुआत हुई थी.

पहले मिली नाकामी

पेरूमाल का अतीत बेहद दागदार है. सिंगापुर के पुलिस रिकॉर्ड में उनका नाम चोरी, लूट और धोखाधड़ी के कई मामलों में दर्ज है. इन धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के साथ पेरुमाल ने फ़ुटबॉल की दुनिया में फ़िक्सिंग की ओर कदम बढ़ाए.

फ़ुटबॉल मैच फ़िक्स करने की अपनी पहली ही कोशिश में विल्सन नाकाम हो गए थे. 1995 में उन्होंने एक फ़ुटबॉल टीम के कप्तान को तीन हजार डॉलर की रिश्वत देकर मैच हारने को कहा. शिकायत होने पर पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया था.

इसके पांच साल बाद एक बार फिर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया. 2000 में उन्होंने सिंगापुर में एक क्लब स्तर के फ़ुटबॉल मैच में उस खिलाड़ी पर हमला कर दिया जिसके खेल के चलते वह टीम हार रही थी और जिसके जीतने पर विल्सन ने दांव लगाया हुआ था. लेकिन समय से साथ विल्सन इस खेल में शातिर होते गए.

सबकुछ फ़िक्स होता था

इस दौरान विल्सन ने फुटबॉल संघों के अंदर अपनी जान पहचान बना ली.

फुटबॉल की दुनिया में ऐसे मैंचों की कमी नही, जिनके बारे में कहा गया कि वो फिक्स थे.

ईएसपीएन डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक इन जान पहचान का ऐसा नतीजा निकला कि उन्होंने घाना और जिंबाब्वे के बीच एक दोस्ताना मैच सिंगापुर में आयोजित करा लिया. विल्सन के मुताबिक दोस्ताना मैचों के लिए वे प्रत्येक देश के फ़ुटबॉल संघों को एक लाख डॉलर का भुगतान करते थे.

इन मैचों का नतीजा भी विल्सन ही तय करते थे.

इन मैचों में टीम के खिलाड़ियों से लेकर रेफ़री तक विल्सन ख़ुद तय करने लगे. रेफ़री भी विल्सन के निर्देश के मुताबिक काम करते थे तो रेड कॉर्ड, पेनल्टी किक और ऑफ़ साइड के फ़ैसले तय होते थे.

इस खेल में विल्सन ने कोच औऱ खिलाड़ियों को भी मिला लिया. खिलाड़ियों को ज़्यादा से ज़्यादा पांच हज़ार डॉलर दिए जाते थे.

जब सबकुछ तय हो जाता था, तो विल्सन मैच को लेकर ऑनलाइन सट्टेबाज़ी की शुरुआत करते थे. इसमें कोई शख्स तीन हजार डॉलर से ज़्यादा की रकम एक साथ नहीं लगा सकता था. एक तो छोटी रकम और दूसरी ओर क्रेडिट कॉर्ड के इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर लोग विल्सन के सट्टेबाज़ी के खेल से जुड़ते चले गए.

फ़र्जी मैचों का आयोजन

वैसे विल्सन ये सारा काम अकेले नहीं कर रहे थे. ईएसपीएन की रिपोर्ट के मुताबिक विल्सन ने एक कंपनी बना ली थी, जिसमें चार लोग साझीदार थे. और इसका नेतृत्व डेन टेन सीट इंग कर रहे थे.

पेरूमाल और उनके साथियों का दुस्साहस इतना बढ़ा कि ये लोग फर्जी मैच तक आयोजित कराने लगे थे. बहरीन के खिलाफ एक मुक़ाबले में उन्होंने टोगो की पूरी तरह फर्जी टीम को उतार दिया, जिसका राष्ट्रीय फ़ुटबॉल टीम से कोई लेना देना नहीं था.

इन सबके चलते ही पेरूमाल और उनके सहयोगियों का नाम इस बार भी शक के घेरे में है.

पेरुमाल फिनलैंड में अपनी एक साल की सजा काट चुके हैं, और इन दिनों हंगरी में पुलिस पूछताछ का सामना कर रहे हैं. वहीं वे पुलिस अधिकारियों को मैच फ़िक्सिंग मामले के बारे में अहम जानकारी मुहैया करा रहे हैं.

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