भारतीय बन कर खेलूंगा, नतीजा जो हो: पेस

  • 2 फरवरी 2013
लिएंडर पेस
मुकाबले को तैयार लिएंडर

अपने देश के लिए और अपने देशवासियों के लिए खेलना चाहिए, यही सोचकर मै यहं पहुंचा हूं और देश के लिए खेल रहा हूं, यही एक खिलाड़ी का फर्ज़ भी होना चाहिए- यह कहना है भारत के शीर्ष टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस.

भारत के सबसे अनुभवी खिलाड़ी का साथ देने के लिए इस बार डेविस कप में ना तो टीम में महेश भूपति है, ना ही रोहन बोपन्ना और ना ही सोमदेवदेव वर्मन, और तो और युवा युकी भांबरी तक नही.

यह सब खिलाड़ी बेहतर सुविधाओ और अपने मनपसंद कोच की मांग को लेकर अखिल भारतीय टेनिस संघ का विरोध करते हुए दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले मैचों में नहीं खेल रहे हैं.

युवाओं का साथ

इस मुक़ाबले में भारत के लिए एकल वर्ग में विजय मलिक और विराली मुरगेसन जबकि लिएंडर का युगल वर्ग में साथ देने के लिए पूरव राजा को टीम में जगह दी गई है. यानी लिएंडर को छोडकर बाकी सभी खिलाड़ी पहली बार डेविस कप में खेल रहे है.

लिएंडर पेस इसी सवाल को लेकर कहते हैं, "कोरियन खिलाड़ी बेहद अनुभवी होने के साथ-साथ ताक़त के साथ खेलते है, मानसिक और शारिरिक रूप से भी मज़बूत है, जबकि हमारी टीम में चार में से तीन खिलाड़ी नए हैं, इसलिए यह एक बडा मुश्किल मैच है. मैं अभी परिणाम के बारे में बिलकुल नहीं सोच रहा हूं, मेरा जितना भी अनुभव है उसके आधार पर इनका उत्साह बढाने की कोशिश करूंगा."

पिछले 23 साल से भारत के लिए डेविस कप खेल रहे लिएंडर पेस कहते है कि उनके लिए, एक भारतीय के लिए तिरंगे के नीचे डेविस कप, ओलंपिक और एशियाड खेलने से बेहतर कुछ नही है.

इस मुक़ाबले में हार की बात चलने पर पेस कहते है कि ऐसा नही है कि हार के बाद सूरज नही निकलेगा या कुछ रुक जाएगा, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि हम कैसा खेलते है, हार या जीत तो लगी रहती है.

यकीनन भारतीय टेनिस इस समय बदलाव के दौर में है. एसोशियशन, खिलाड़ी और कोच सबको मिलकर कुछ करना होगा और सबसे बड़ी बात ये है कि एक भारतीय खिलाड़ी होने के नाते सबसे पहले देश के लिए डेविस कप खेलना होगा.

संबंधित समाचार