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आईपीएल का धंधा, सितारों के बाद भी मंदा

 रविवार, 2 दिसंबर, 2012 को 10:52 IST तक के समाचार

कहने को तो इंडियन प्रीमियर लीग अरबों डॉलर का ब्रांड है, लेकिन इसमें सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी या शाहरुख़ ख़ान जैसे बड़े नाम होने के बावजूद भी पैसा कमाने की गारंटी नहीं हैं.

बाज़ार के इन कीमती ब्रांड्स की मौजूदगी के बावजूद आईपीएल की टीमों का घाटा थमने का नाम नहीं ले रहा.

बीबीसी को मिले आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान रॉयल्स अकेली ऐसी टीम थी जिसने करोड़ों डॉलर खर्च करने के बाद पिछले वित्त वर्ष 2010-2011 में 6.99 करोड़ रुपए का मामूली लाभ दिखाया है.

हालांकि कुछ अन्य टीमों ने भी मामूली लाभ दिखाया है लेकिन इसे लेकर सवालिया निशान हैं.

टीमों की मालिक कंपनियों को वर्ष 2011-12 और 2012-13 के लिए बैलेंस शीट कंपनी मामलों के मंत्रालय और राजस्व विभाग को अभी सौंपनी है, जबकि सहारा पुणे वॉरियर्स का यह पहला वित्तीय आकलन वर्ष है.

आईपीएल से कमाई

इस बारे में आईपीएल के चेयरमैन राजीव शुक्ला ने बीबीसी से कहा,“ मैं नहीं जानता कि टीमों की बैलेंस शीट में क्या है, लेकिन मैं आश्वस्त हूं कि टीमों ने अब आईपीएल से कमाना शुरु कर दिया है. इसके अलावा क्रिकेट बोर्ड ने सेंट्रल पूल (प्रसारण अधिकार के पैसे की हिस्सेदारी) के पैसे में टीमों का हिस्सा भी बढ़ा दिया है.”

इस सबके बीच आईपीएल टीमों ने 30 से भी अधिक विदेशी खिलाड़ियों को रिलीज़ कर दिया है और ये सभी 19 तारीख से शुरू ट्रेडिंग प्रक्रिया से गुज़रेंगे. टीमों के प्रबंधन की ओर से इसे खर्च कम करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है.

शाहरुख़ भी घाटे में

"यह सही है कि पहले तीन सत्र में हमें कोई लाभ नहीं हुआ लेकिन इस बार हमें प्रोफिट हुआ है. लेकिन मैं बैलेंस शीट देखे बिना आपको कोई आंकड़ा नहीं दे सकता. वैसे मैं बताना चाहूंगा कि इन घाटों को लेकर मेरी टीम किसी भी तरह से चिंतित नहीं है."

अरविंदर सिंह,मुख्य संचालन अधिकारी,पंजाब किंग्स इलेवन

आईपीएल में अभी तक शाहरुख़ और जूही चावला की कोलकाता नाइट राइडर्स को सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाली टीम के रूप में देखा जा रहा था. लेकिन कंपनी मामलों के मंत्रालय में जमा किए पिछले वित्त वर्ष के लेखे-जोखे में इस टीम ने 11.28 करोड़ का घाटा दिखाया है. 2009-10 की तुलना में यह घाटा छह करोड़ से अधिक है.

वैसे कंपनियों की वित्तीय स्थिति को दर्शाने वाले दो आधिकारिक आंकड़े हैं. एक वो हैं जो क्रिकेट बोर्ड और टीमों ने पिछले साल की संसद की फाइनेंस पर स्टैंडिग कमेटी को सौंपे. दूसरे वो हैं जो इन टीमों को चलाने वाली कंपनियों के चार्टर्ड एकाउंटेटों ने मंत्रालय में जमा किए.

संसद की यह समिति आईपीएल में हुई वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों, क्रिकेट बोर्ड और आईपीएल को मिल रहे कर लाभ व इससे जुड़े अन्य मामलों की जांच कर रही थी.

संसद की इस समिति में आईपीएल के भेजे रिकॉर्ड के अनुसार 2009-10 में केकेआर को 11.85 करोड़ का घाटा उठाना पड़ा लेकिन मंत्रालय को भेजी बैलेंस शीट के प्रोफिट एंड लॉस एकाउंट में टीम ने इसी साल के लिए 5.58 करोड़ का घाटा दर्शाया है.

संसद की इस समिति को भेजे गए रिकॉर्ड में क्रिकेट बोर्ड और आईपीएल टीमों ने दावा किया है कि 2008-09 और 2009-10 में किसी को भी एक पैसे का फ़ायदा नहीं हुआ.

प्रीटि जिंटा का नुकसान

संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार 2009-10 में यानी कि आईपीएल के दूसरे सत्र में डेक्कन चार्जर्स को सबसे अधिक 87.09 करोड़ रुपए का घाटा हुआ जबकि प्रीटि जिंटा की किंग्स इलेवन पंजाब ने 65.68 करोड़ का नुकसान सहा.

ठीक इसी साल मुंबई इंडियंस ने 42.89 करोड़ रुपए को घाटा दर्ज किया. रोचक पहलू यह है कि मंत्रालय को भेजी बैलेंस शीट में इसकी मालिक कंपनी इंडियाविन स्पोर्ट्स ने सिर्फ 31.40 करोड़ का नुकसान दिखाया है, जबकि बैलेंस शीट के अनुसार मुंबई को पिछले वित्त वर्ष में भी 15.42 करोड़ का घाटा हुआ है.

2010-11 में किंग्स इलेवन पंजाब ने 35.26 करोड़ का घाटा होना स्वीकारा है. वैसे टीम ने 2009-10 की बैलेंस शीट में 4.19 करोड़ का लाभ दिखाया है लेकिन इसी वित्त वर्ष के लिए संसदीय समिति से कहा गया है कि उसे 65.68 करोड़ का घाटा हुआ है.

इस बारे में पूछे जाने पर पंजाब किंग्स इलेवन के मुख्य संचालन अधिकारी अरविंदर सिंह ने बीबीसी से कहा, “हां, यह सही है कि पहले तीन सत्र में हमें कोई लाभ नहीं हुआ लेकिन इस बार हमें प्रॉफिट हुआ है. वैसे मैं बैलेंस शीट देखे बिना आपको कोई आंकड़ा नहीं दे सकता. मैं बताना चाहूंगा कि इन घाटों को लेकर मेरी टीम किसी भी तरह से चिंतित नहीं है”.

हैरानी की बात है कि इन दस्तावेज़ों से साफ है कि आईपीएल में बड़े नाम पैसा कमाने की कोई गारंटी नहीं है. केकेआर के बाद चेन्नई सुपरकिंग्स और दिल्ली डेयरडेविल्स इसका बड़ा उदहारण हैं.

धोनी की टीम भी नुकसान में

कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पिछले पांच साल से बाज़ार में सबसे कामयाब ब्रांड हैं. लेकिन संसद की समिति को पेश दस्तावेजों के अनुसार टीम को 2008-09 में न कोई लाभ हुआ और न ही कोई नुकसान. लेकिन 2009-10 में चेन्नई को 19.30 करोड़ का घाटा हुआ.

"मैं नहीं जानता कि टीमों की बैलेंस शीट में क्या है लेकिन मैं आश्वस्त हूं कि टीमों ने अब आईपीएल से कमाना शुरु कर दिया है. इसके अलावा क्रिकेट बोर्ड ने सेंट्रल पूल (प्रसारण अधिकार के पैसे की हिस्सेदारी) के पैसे में टीमों का हिस्सा भी बढ़ा दिया है."

राजीव शुक्ला,आईपीएल चेयरमैन

इस टीम की मालिक इंडिया सीमेंट है. कंपनी ने अपने शेयरधारकों को बताया है कि आईपीएल की उनकी टीम इंडिया सीमेंट की ‘इनटेंजेबल एसेट’ (अप्रत्यक्ष संपत्ति) है. टीम से होने वाली कमाई को अन्य स्रोतों से हुई आमदनी (मिसलेनियस इनकम) में रखा जाएगा. लेकिन 2010-2011 में कंपनी की बैलेंस शीट में मिसलेनियस इनकम का जिक्र नहीं है.

दिल्ली डेयरडेविल्स ने संसद की समिति को पेश दस्तावेजों में 2009-10 में 47.11 करोड़ रुपए का घाटा बताया. जबकि 2010-11 में कंपनी की बैलेंस शीट में 8.4 करोड़ रुपए का नुकसान दर्ज किया गया.

इस बारे में दिल्ली डेयरडेविल्स के उपाध्यक्ष अमृत माथुर का कहना था, “ कंपनी की नीति है कि हम अपने वित्तीय मामलों पर सार्वजनिक तौर पर टिप्पणी नहीं करते. ”

शिल्पा शेट्टी के हाथ कुछ लगा

हालांकि इन सब के बीच शिल्पा शेट्टी की टीम अपवाद नजर आती है. कंपनी ने अपनी बैलेंसशीट में 6.99 करोड़ रुपए का मुनाफा दिखाया है. वैसे राजस्थान रॉयल्स ने 2009-10 में भी थोड़ी कमाई दिखाई थी. लेकिन न जाने क्यों संसद की जांच समिति के सामने टीम ने उसी वित्त वर्ष के लिए 35.50 करोड़ का घाटा दिखा दिया.

रॉयल चैलेंजर्स बंगलौर ने पिछले दो वित्त वर्षों में 5.32 और 5.43 करोड़ का घाटा उठाया. जबकि संसद की समिति के दस्तावेजों के अनुसार पहले सीजन में टीम को 79 लाख का घाटा उठाना पड़ा.

आईपीएल के दूसरे ही सीजन में डेक्कन चार्जर्स के वित्तीय आंकड़े बाकी टीमों के लिए चेतावनी संकेत हो सकते थे. संसद की समिति की रिपोर्ट के अनुसार टीम को 2009-10 में सबसे अधिक 87.09 करोड़ का घाटा हुआ.

वैसे इस वित्त वर्ष के लिए कंपनी की बैलेंस शीट में 41.81 करोड़ का ही नुकसान दिखाया गया था.

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