डोपिंग की दुनिया का डरावना काला सच

  • 12 अक्तूबर 2012
आर्मस्ट्रान्ग
साइकिलिस्ट आर्मस्ट्रान्ग के बारे में डोपिंग एजेंसी ने गंभीर टिप्पणियाँ की हैं

"हमेशा हाथ में घड़ी पहनों” और “अपना सेलफोन हमेशा तैयार रखो” एकबारगी सुनने में यह शब्द किसी जासूस के गुप्त कोड लग सकते हैं. लेकिन लांस आर्मस्ट्रॉन्ग और उनके साथियों के लिए यह एंटी डोपिंग एजेंसी के अधिकारियों और डोपिंग को रोकने के लिए बनी पूरी प्रणाली को धता साबित करने का मंत्र थे.

आर्मस्ट्रांन्ग के साथी रहे टेलर हेमिल्टन ने पिछले महीने ही आई अपनी किताब 'द सीक्रेट रेस' में ब्यौरे के साथ बताया है कि किस तरह ने सभी ने मिलकर पूरे सिस्टम को धोखा दिया.

किताब में लिखा है कि किस तरह से कोक के डिब्बे में इंजेक्शन लाए जाते थे. कैसे-कैसे डोपिंग की जाती थी.

तीन अहम बातें

आर्मस्ट्रान्ग और उनके साथियों के खिलाफ प्रतिबंधित ईपीओ लेने के आरोप हैं. ईपीओ लेने के कई घंटे बाद भी खिलाड़ी को पकड़ा जा सकता है. इसलिए टेलर ने अपनी किताब में पकड़े जाने से बचने के लिए तीन अहम बातों को ध्यान रखने को कहा है.

इनमें घड़ी और सेलफोन रखने के अलावा उस अवधि के बारे में भी पुख्ता जानकारी रखने की सलाह दी गई है जिस दौरान ईपीओ के कारण पकड़े जाने का खतरा हो सकता है. इन सभी ने इस डोप को एडगर का नाम दिया था.

पत्रकार डेनियल कोल के साथ मिल कर लिखी इस किताब में बताया गया है कि किस तरह डोपिंग कंट्रोल अधिकारियों की छापेमारी के दौरान सेल फोन से एक दूसरे को सचेत किया जाता था.

टेलर के अनुसार टीम एक बार स्पेन के शहर गिरोना में रह कर अपनी ट्रेनिंग कर रही थी. इस दौरान डोपिंग कंट्रोल अधिकारी आ गए और सभी ने एक दूसरे को सावधान कर दिया.

इस किताब में दावा किया गया है, “ अगर आप सावधान हैं और पूरा ध्यान दे रहे है तो 99 फीसदी आप पकड़ में नहीं आ सकते.”

इसके अलावा ईपीओ लेने के बाद सभी की कोशिश होती थी कि वे किसी भी तरह से डोपिंग कंट्रोल अधिकारियों की पकड़ में न आएं.

एक बार टेलर ने दरवाजे पर किसी के खटखटाने की आवाज सुनी. वह घर के एक वीरान हिस्से में जा कर छिप गए. फिर वे डोपिंग कंट्रोल अधिकारियों के जाने के बाद ही बाहर आए.

शाम डोपिंग के लिए अच्छी

टेलर ने सुझाया है कि डोपिंग कंट्रोल अधिकारी रात के दौरान टेस्ट के लिए नहीं आते. ऐसे में शाम का समय डोपिंग के लिए सबसे बेहतर होता है.

लांस आर्मस्ट्रॉन्ग और उनके साथियों को शक्तिशाली ईपीओ 'अर्थरोपोयटीन' लेने का दोषी पाया गया है. इसके सेवन से खिलाड़ी की प्रदर्शन करे की क्षमता में पांच फीसदी इजाफा हो जाता है.

डोपिंग
डोपिंग का एक तरीक़ा ख़ून चढ़ाना भी रहा है

उन्होंने लिखा कि 1999 की टूर डी फ्रांस के दौरान वह एक दिन आर्मस्ट्रान्ग के घर गए. उनके पास ईपीओ नहीं था. उन्होंने आर्मस्ट्रॉन्ग से यह मांगा.

टेलर के अनुसार, “आर्मस्ट्रॉन्ग ने फ्रिज की ओर इशारा कर दिया. मैंने फ्रीज का दरवाजा खोला तो देखा कि दूध के डिब्बे के साथ ईपीओ का कार्टन रखा था.”

बीबीसी रेडियो से बातचीत में टेलर ने कहा, “वह एक काला दौर था जिसमें से हम सभी गुजरे हैं. जब हम 15-16 साल के थे तो कभी सोचा नहीं था कि हम यह सब करेंगे. लेकिन जब वह इस पूरे खेल मे आए तो पता लगा कि डोप की दुनिया पहले की मौजूद और साइकलिस्ट से लेकर डॉक्टर सभी इसमें लिप्त हैं.”

ब्लड डोपिंग भी

टेलर में इस किताब में यह भी खुलासा किया है कि उनकी टीम के सदस्यों ने ब्लड डोपिंग भी की थी. टीम के डॉक्टर उनका ब्लड लेकर स्पेन जाते और वहां से रेड सेल से भरपूर खून लाते जिसे फिर से थके हुए साइकलिस्टों के शरीर में डाला जाता ताकि रेस के दौरान उनके सेल और ताजगी के साथ काम कर सकें.

किताब के अनुसार फ्रिज से निकाला गया ब्लड का पाउच साइकलिस्टों के होटल के कमरे की दीवार पर टेप से चिपका कर चढ़ाया जाता था. टेलर ने कहा कि जिस्म में ठंडा खून जाने से जबरदस्त सरसराहट होती थी.

इसके अलावा यूएस पोस्टल टीम के एक डॉक्टर माइकल फरारी ईपीओ के असर को कम करने के लिए नसों में इंजेक्शन से माक्रोडोज देते थे.

अमरीका की एंटी डोपिंग एजेंसी (यूएसएडीए) ने कहा है कि आर्मस्ट्रॉन्ग की टीम ने डोपिंग का सबसे अत्याधुनिक, पेशेवर और सफल तरीका अपनाया, जो अब तक खेल की दुनिया में देखने को नहीं मिला.

यूएसएडीए ने बुधवार को कहा है कि वो 41 वर्षीय आर्मस्ट्रॉन्ग के खिलाफ मामले की पूरी रिपोर्ट सौंपेगी. इस रिपोर्ट में आर्मस्ट्रॉन्ग के उन पूर्व 11 साथियों के गवाही भी शामिल हैं जो यूएस पोस्टल सर्विस की टीम में उनके साथ रहे हैं.

वैसे आर्मस्ट्रॉन्ग डोपिंग के आरोपों को गलत बताते हैं लेकिन उन्होंने यूएसएडीए के आरोपों को खारिज भी नहीं किया है.