रिटायरमेंट पर नवंबर में सोचूंगा: सचिन

 शुक्रवार, 5 अक्तूबर, 2012 को 07:44 IST तक के समाचार
सचिन

सचिन का कहना है कि वो क्रिकेट से सन्यास लेने का फैसला अपने दिल की बात सुनकर ही करेंगे.

क्रिकेट प्रेमियों की उम्मीदों पर खरा उतरने और बेहतरीन क्रिकेट खेलने के दबाव के बीच क्लिक करें सचिन तेंदुलकर अपने प्रदर्शन से लगातार दुनिया को हैरान करते रहे हैं लेकिन क्या सचिन अब क्रिकेट से थक गए हैं?

अंग्रेज़ी समाचार चैनल ‘टाइम्स नाउ’ को दिए एक साक्षात्कार में सचिन ने कहा है, ''मैं 39 साल का हो गया हूं और मुझे नहीं लगता कि मेरे अंदर अब बहुत क्लिक करें क्रिकेट बचा है. लेकिन ये सब मेरी शारीरीक क्षमता और मानसिक शक्ति पर निर्भर करता है. जब मुझे लगेगा कि मैं वो नहीं दे पा रहा हूं जिसकी मुझसे उम्मीद है तब मैं चीज़ों को नए सिरे से देखना शुरु करूंगा.''

'वहीं करूंगा जो मेरा दिल कहता है'

सचिन का कहना है कि क्रिकेट से सन्यास लेना उनकी क्लिक करें ज़िंदगी के सबसे मुश्किल फैसलों में से होगा और वो ये फैसला ‘तभी लेगें जब सही वक्त’ होगा. वो कहते हैं, ''रन बनाना और मन में खेलने की इच्छा होना दो अलग बातें हैं, इसलिए मैं वहीं करूंगा जो मेरा दिल कहता है.''

"मैं 39 साल का हो गया हूं और मुझे नहीं लगता कि मेरे अंदर अब बहुत क्रिकेट बचा है. लेकिन ये सब मेरी शारीरीक क्षमता और मानसिक शक्ति पर निर्भर करता है. जब मुझे लगतेगा कि मैं वो नहीं दे पा रहा हूं जिसकी मुझसे उम्मीद है तब मैं चीज़ों को नए सिरे से देखना शुरु करूंगा."

सचिन तेंदुलकर

रिटायरमेंट के बारे में उनकी सोच को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा,''मैंने पूरी ज़िंदगी यही किया है और अचानक एक दिन अपने हथियार डाल देना बहुत मुश्किल काम है.''

सचिन का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में कभी नहीं सोचा है कि जब वो रिटायर होंगे तो उन्हें कैसा महसूस होगा.

इस सवाल के जबाव में कि क्या वो क्रिकेट की सभी शैलियों से एक समय में रिटायर हो जाएंगे उन्होंने कहा, ''ये सभी बातें मैं अपनी इच्छाशक्ति के हिसाब से तय करूंगा और मुझे इसके लिए अभी कुछ सोचने की ज़रूरत नहीं है. जब मैं नवंबर में खेलूंगा तब मैं नए सिरे से चीज़ों के बारे में आकलन करूंगा.''

'मैं दबाव में अच्छा खेलता हूं'

सचिन कहते हैं कि वो जब भी मैदान में उतरते हैं उनके मन में देश के लिए जीतने की इच्छा होती है और यही वजह है वो क्रिकेट खेलने के लिए अपनी जान लगा देते हैं. वो कहते हैं,''जिस दिन मैं खेलना बंद कर दूंगा मैं नहीं चाहता कि मेरे मन में ये सवाल उठे कि मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं किया.''

खुद पर बढ़ते दबाव की वजह साफ करते हुए सचिन कहते हैं कि खिलाड़ियों की ज़िंदगी में कभी भी ऐसा वक्त नहीं होता जब वो दबाव में न हों.

वो कहते हैं, ''मैं दबाव में अच्छा खेलता हूं, मुझे ऐसा करने में कोई दिक्कत नहीं. ये भी सच है कि दुनिया में ऐसा कोई बल्लेबाज़ नहीं जो आउट होने पर खुश होता हो. यही वजह है कि जब आपके प्रदर्शन पर देश की जीत टिकी हो और आप आउट हो जाएं तो प्रतिक्रिया तीखी होती है.''

हाल ही में सुनील गावस्कार द्वारा उनके आउट होने की शैली को लेकर की गई टिप्पणियों के जवाब में सचिन कहते हैं, ''सुनील गावस्कर ने मेरे बारे में बहुत सकारात्मक भी कहा है और कई बार सकारात्मक टिप्पणियां भी की हैं फिर हम उनकी नकारात्मक बातों को ही क्यों खबर बनाते हैं. अगर मैं आउट हुआ तो कहीं न कहीं मेरी गलती रही होगी और मुझे लगातार खुद में सुधार करना है ये लाज़मी है.''

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