उन्मुक्त को मिली परीक्षा देने की इजाज़त

 शुक्रवार, 31 अगस्त, 2012 को 14:36 IST तक के समाचार
उन्मुक्त चंद

उन्मुक्त चंद ने विश्व कप के फ़ाइनल में शतक लगाकर भारत को ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ जीत दिलाई थी

क्लिक करें दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति दिनेश सिंह ने कहा है कि भारत की क्लिक करें अंडर 19 क्रिकेट टीम के कप्तान उन्मुक्त चंद, सेंट स्टीफेंस कॉलेज से द्वितीय वर्ष की परीक्षा दे सकेंगे.

उन्होंने खेल मंत्री अजय माकन को पत्र लिखकर भरोसा दिलाया है कि उन्मुक्त चंद को हर संभव मदद मुहैया कराई जाएगी.

उनका ये बयान तब आया है जब उन्मुक्त चंद ने ये कहा कि कॉलेज में क्लिक करें उपस्थिति कम होने के बावजूद खिलाड़ियों को परीक्षा देने से रोकने के बजाए उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए.

दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्मुक्त ने शुक्रवार को कहा, "वैसे तो कॉलेज ने हमेशा मेरा साथ दिया है मगर आम तौर पर मैं मानता हूँ कि खिलाड़ियों को अगर प्रतियोगिताओं में जाना ज़रूरी है और वे लेक्चर में नहीं रह सकते तो कॉलेज को उनकी मदद करनी चाहिए."

दरअसल क्लिक करें उन्मुक्त दिल्ली के सेंट स्टीफन्स कॉलेज के छात्र हैं, लेकिन कॉलेज में हाज़िरी पूरी नहीं होने के चलते कॉलेज ने उन्हें परीक्षा में बैठने की इजाज़त देने से मना कर दिया था.

मगर कई राजनीतिज्ञों और भारतीय क्रिकेट कप्तान महेंद्र सिंह क्लिक करें धोनी ने भी उन्मुक्त का समर्थन किया है जबकि बीबीसी हिंदी के क्लिक करें फ़ेसबुक पन्ने पर इस विषय पर हुई बहस में दोनों पक्षों का साथ देने वाली राय दिखी है.

सेंट स्टीफंस कॉलेज का कहना है कि उन्मुक्त चंद पढ़ाई के दौरान कॉलेज से नदारद रहे और उनकी उपस्थिति न्यूनतम अनिवार्य प्रतिशत से कम है. यही वजह है कि उन्हें बीए की परीक्षा में बैठने की इजाज़त नहीं दी गई है.

मंत्रियों का हस्तक्षेप

खेल मंत्री अजय माकन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति को चिट्ठी लिखकर उन्मुक्त को परीक्षा में बैठने की अनुमति देने का अनुरोध किया था. साथ ही माकन ने कहा कि वह खिलाड़ियों के लिए नियमों में बदलाव के लिए भी कहेंगे.

उनके अलावा मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने भी विश्वविद्यालय के कुलपति से बात की और उन्मुक्त को परीक्षा में बैठने देने का अनुरोध किया था.

बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक पर

"इससे ये ज़ाहिर होता है कि कॉलेज के प्रिंसिपल एक सच्चे आदर्शों वाले इंसान हैं जिसने व्यक्ति से ऊपर नियमों को तवज्जो दी है."

गणेश सिंह पोखरिया, बीबीसी पाठक

संवाददाताओं ने जब इस बारे में उन्मुक्त से पूछा तो उन्होंने कहा, "मुझे कॉलेज से वैसे कोई शिकायत नहीं है. मैं प्रिंसिपल से भी मिलूँगा. दूसरे सेमेस्टर में मैं कॉलेज कम जा पाया था. जब परीक्षा का समय आया तो पता चला कि एक न्यूनतम उपस्थिति होनी चाहिए इसलिए मुझे प्रवेश पत्र नहीं दिया गया."

क्लिक करें उन्मुक्त ने बताया कि उस समय भी उन्हें शुरुआती दो परीक्षाओं में नहीं बैठने दिया गया था और उसके बाद उन्हें अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा. फिर स्टे मिलने के बाद ही वह बाक़ी दो परीक्षाएँ दे सके थे.

क्लिक करें उन्मुक्त के मुताबिक़, "अगर कॉलेज ऐसे खिलाड़ियों को अतिरिक्त क्लासेज़ करा सकें या उपस्थिति के मामले में थोड़ी छूट दे दें तो उनका मन भी पढ़ाई से नहीं हटेगा."

गुरुवार को ये विवाद सामने आने के बाद धोनी ने ट्वीट किया था, "इससे पता चलता है कि भारत में खेल को कितनी अहमियत दी जाती है. जानकर दुख हुआ."

बीबीसी में फ़ेसबुक पर चर्चा

उधर जब ये मसला बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक पन्ने पर चर्चा के लिए रखा गया तो मिली-जुली राय सामने आई.

अजय माकन

खेल मंत्री अजय माकन ने इस विषय पर विश्वविद्यालय के वीसी से बात की है

मणि भाई ने लिखा, "कुछ पाने के लिए कुछ खोने का कैसा ग़म? भ्रष्टाचार होगा जो अपने नाजायज़ हक के लिए लड़े तो."

वहीं सरफ़राज़ आलम ने कहा, "ये सही है कि किसी के लिए भी अलग नियम नहीं होने चाहिए. ठीक है कि उन्मुक्त ने हमें ट्रॉफ़ी दिलाई है मगर पहले आप ये देखो कि उसने पूरे साल में कितने मैच खेले हैं फिर कोई फ़ैसला करना."

बादल सिंह इसे बुरी ख़बर बताते हुए लिखते हैं, "जब नौकरी के लिए आरक्षण होता है तो खिलाड़ियों को भी उपस्थिति में छूट मिलनी चाहिए."

वहीं गणेश सिंह पोखरिया इसमें कॉलेज के प्रिंसिपल के साथ हैं. उनके अनुसार, "इससे ये ज़ाहिर होता है कि कॉलेज के प्रिंसिपल एक सच्चे आदर्शों वाले इनसान हैं जिसने व्यक्ति से ऊपर नियमों को तवज्जो दी है. काश भारत में सब नियमों पर इतने अडिग होते तो ये देश काफ़ी ख़ुशहाल हो चुका होता."

मगर सत्य प्रकाश यादव के अनुसार, "हम आज भी खेल को उतनी अहमियत क्यों नहीं दे पाते. हम जहाँ खेल को बढ़ावा देने की बात करते हैं तो खेल प्रतिभा के आधार पर डिग्री देनी चाहिए या उनके नियमों में प्रावधान होना चाहिए."

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