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मैरीकॉम के स्वर्ण की राह की ये हैं बाधा...

 मंगलवार, 7 अगस्त, 2012 को 17:39 IST तक के समाचार
निकोला

निकोला होगी मैरी कॉम की सबसे बड़ी चुनौती

यकीनन मैरीकॉम ने लगातार दो बाउट जीत कर लंदन ओलंपिक में एक पदक पक्का कर लिया है. लेकिन बुधवार को रिंग में मैरीकॉम के सामने लंदन ओलंपिक की सबसे बड़ी चुनौती निकोला एडम्स होंगी.

मैरीकॉम मई में वर्ल्ड चैंपिनशिप के क्वार्टर फाइनल में ब्रिटेन की इस चर्चित बॉक्सर से हार चुकी हैं.

इस लिहाज से यह मुकाबला मैरीकॉम के लिए हिसाब बराबर करने का मौका भी होगा. लेकिन अगर दोनों बॉक्सरों का आकलन किया जाए तो यह मैच काफी रोचक रहेगा.

पहली बार 13 साल की उम्र में रिंग में उतरी करीब साढ़े पांच फुट लंबी निकोला का सामना होगा कद में उनसे छोटी मैरीकॉम से और इसके लिए मैरीकॉम को अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है.

मैरीकॉम ने पिछले दो मुकाबलों में अपने स्ट्रेट पंच से काफी प्वांइट हासिल किए हैं.

वैसे दोनों की उम्र 29 साल है. निकोला पांच बार की वर्ल्ड चैंपियन मैरीकॉम को एक बेहतरीन बॉक्सर आंकती हैं.

निकोला निकालेंगी तोड़

अगले मुकाबले के बारे में पूछे जाने पर वर्ल्ड चैंपियनशिप में तीन बार की रजत पदक विजेता निकोला ने कहा, “पांच बार की विश्व विजेता बनने के लिए आपमें कुछ अलग ही प्रतिभा होनी चाहिए. लेकिन मेरी लंबाई और पहुंच मेरे लिए मददगार होगी. मैं अपना पूरा अनुभव उनके खिलाफ इस्तेमाल करुंगी. मुझे पूरा भरोसा है कि मैरी जो कुछ भी रिंग पर आजमाएँगी, मैं उसका तोड़ निकाल लूंगी.”

"मेरी लंबाई और पहुंच मेरे लिए मददगार होगी. मैं अपना पूरा अनुभव उनके खिलाफ इस्तेमाल करुंगी. मुझे पूरा भरोसा है कि मैरी जो कुछ भी रिंग पर आजमाएगी, मैं उसका तोड़ निकाल लूंगी"

निकोला एडम्स, ब्रितानी बॉक्सर

निकोला बुल्गारिया की स्तोयका पेट्रोवा को 16-7 से हरा कर सेमीफाइनल में पहुंची हैं.

निकोला की इस ओलंपिक तक की यात्रा काफी रोचक है.

2001 में 18 साल की उम्र में निकोला इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली महिला बनी थीं. आयरलैंड की बॉक्सर के खिलाफ निकोला की वह बाउट इतिहास का हिस्सा है.

2003 में वह पहली बार इंग्लिश एमेच्यर चैंपियन बनीं और इस पर उनका लगातार तीन बार कब्जा रहा.

लेकिन निकोला को सबसे बड़ी पहचान 2007 में मिली जब उन्होंने इंग्लैंड के लिए बॉक्सिंग में कोई मेडल जीतने वाली पहली महिला होने को गौरव हासिल किया. इस साल यूरोपीयन चैंपियनशिप में उनके गले में 54 किलोग्राम भार वर्ग का सिल्वर मेडल था.

2009 उनके कैरियर का सबसे बुरा दौर था. पीठ की चोट के कारण वह काफी महीने खेल से बाहर रहीं. लेकिन ठीक अगले साल ब्रिटेन की पहली एमेच्यर चैंपियनशिप जीत कर वापसी की.

2011 की यूरोपीय यूनियन एमेच्यर चैंपियनशिप भी उनके नाम है.

ओलंपिक मे

दरअसल ओलंपिक में महिला मुक्केबाज़ी पहली बार शामिल की गई है मगर ये मुक़ाबला तीन ही वर्गों में हो रहा है.

ओलंपिक में महिलाओं को 51, 60 और 75 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण के लिए भिड़ना है.

इससे पहले तक मैरीकॉम 48 किलोग्राम वर्ग में विश्व चैंपियन रही हैं इसलिए उन्हें ओलंपिक के लिए इस वर्ग में आना पड़ा है. वहीं निकोला 54 किलोग्राम वर्ग से नीचे उतरकर 51 किलो वर्ग में आई हैं.

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