BBC navigation

मैं इस लम्हे के लिए तैयार था: विजय कुमार

 शुक्रवार, 3 अगस्त, 2012 को 23:52 IST तक के समाचार

भारतीय निशानेबाज़ विजय कुमार ने लंदन ओलंपिक में शुक्रवार को रजत पदक जीतकर भारत के लिए दूसरा पदक हासिल किया.

विजय कुमार ने 25 मीटर रैपिड फ़ायर में 130 के स्कोर के साथ रजत पदक जीता. इस मुकाबले में क्यूबा के ल्यूरिस प्यूपो 134 अंको के साथ स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब रहे.

पदक हासिल करने के बाद भारतीय निशानेबाज़ विजय कुमार ने कहा कि उन्होंने अपने आप को इस लम्हे के लिए तैयार किया था.

विजय कुमार ने जीत के बाद कहा, “मैंने अपने आप को इस लम्हे के लिए तैयार किया था. सेना में होने के नाते मैं मानसिक तौर पर मज़बूत हूं और इसी बात का मुझे फायदा मिला. मैने जो पाने की योजना बनाई थी वो हासिल किया.”

"ने अपने आप को इस लम्हें के लिए तैयार किया था. सेना में होने के नाते मैं मानसिक तौर पर मज़बूत हूं और इसी बात का मुझे फायदा मिला. मैने जो पाने की योजना बनाई थी मैंने वो हासिल किया"

विजय कुमार, भारतीय निशानेबाज़

ओलंपिक पदक उनके लिए क्या मायने रखता है इसके जवाब में उन्होंने कहा, “ओलंपिक मेडल मेरे लिए सपना रहा है. मैंने कई अंतरराष्ट्रीय खेलों में पदक जीते लेकिन ओलंपिक मेडल की कमी मैं महसूस कर रहा था.”

विजय स्वीकार करते हैं कि फाइनल राउंड में उन पर दबाव था,“मैंने खास कोशिश की थी कि मैं शांत रहूं. लेकिन आप ये कभी नहीं भूल सकते कि आप ओलंपिक खेलों में हिस्सा ले रहे हैं लेकिन मैं अपना ध्यान केंद्रित करने में कामयाब रहा. ये मेरा पहला ओलंपिक था मैं जानता था कि मुझे अपने आप पर काबू रखना है.”

फ़ाइनल मुकाबले में विजय ने लगातार सटीक निशाने लगाते हुए रजत पदक को भेदा. आखिरी सीरीज़ में वो पांच में से दो निशाने ही सटीक लगा पाए लेकिन ये प्रदर्शन रजत पदक हासिल करने के लिए काफी था.

विजय कुमार भारत के हिमाचल प्रदेश से आते हैं माना जाता हैं कि निशानेबाज़ी अमीरों का खेल हैं लेकिन विजय कुमार एक औसत भारतीय परिवार से आते हैं. उन्होंने सेना में भर्ती होने के बाद निशानेबाज़ी शुरु की थी.

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने विजय कुमार को हिमाचल सरकार की ओर से एक करोड़ रुपए ईनाम देने की घोषणा की है.

विजय कुमार के पिता रिटायर्ड सुबेदार बांकूराम ने बीबीसी बातचीत में कहा, ''मैं बेहद खुश हूं कि मरे बेटे ने ये कारनामा कर दिखाया है. इस वक्त मेरे घर में ढोल नगाड़े के साथ 400 से ज़्यादा लोग मौजूद हैं और वो सब अपनी खुशी का इज़हार कर रहे हैं.मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक गांव का बेटा वहां तक पहुंचेगा.''

इस जीत के लिए विजय कुमार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रक्षा मंत्री एके एंटनी ने बधाई दी है.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

इसी विषय पर और पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.