डोपिंग में पकड़े गए दो भारतीय पैरालंपिक खिलाड़ी

 गुरुवार, 19 जुलाई, 2012 को 01:17 IST तक के समाचार
लंदन ओलंपिक में डोपिंग रोकने के पुख्ता इंतजाम

लंदन ओलंपिक में डोपिंग को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.

लंदन में ओलंपिक खेल शुरू भी नहीं हुए हैं कि पैरालंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने वाले दो भारतीय खिलाड़ी शरत कुमार और हितेश सचदेव डोपिंग टेस्ट में पकड़े गए हैं और उन्हें पैरालंपिक खेलों के लिए अयोग्य करार दे दिया गया है.

इन विकलांग खिलाड़ियों के मैनेजर और कोच ने बीबीसी को बताया कि डोपिंग परीक्षण में उन्हें प्रदर्शन बेहतर करने वाली प्रतिबंध दवाएं लेने का दोषी पाया गया है.

पोलियो ग्रस्त शरत कुमार के कोच के अनुसार ऊंची कूंद में उनकी पहली रैंकिंग है. डोपिंग में पकड़े गए अन्य गोला फेंक खिलाड़ी दृष्टिहीन हितेश सचदेव हैं. डोपिंग में पॉजिटिव पाए जाने के बाद दोनों खिलाड़ियों को पैरालंपिक के लिए तैयारी कर रहे खिलाड़ियों की सूची से हटा दिया गया है.

उनके कोच मोहम्मद निजामुद्दीन ने बीबीसी की तमिल सेवा को बताया, “ये बड़े दुख की बात है और भारत की पैरालंपिक टीम के लिए बड़ा झटका है क्योंकि ऊंची कूद में शरत कुमार का स्वर्ण पदक पक्का माना जा रहा था.”

लापरवाही से इनकार

इन दोनों खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) की ओर से कराए गए परीक्षणों में पॉजिटिव पाया गया.

भारतीय पैरालंपिक टीम के कोच और मैनेजर के अनुसार सरकार और ओलंपिक समिति इस बारे में बहुत गंभीर है कि लंदन खेलों को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय खेल प्रशिक्षण शिविरों में हिस्सा ले रहे खिलाडियों का परीक्षण होना चाहिए कि कहीं वे कोई प्रतिबंधित दवाएं तो नहीं ले रहे हैं.

"ये बड़े दुख की बात है और भारत की पैरालंपिक टीम के लिए बड़ा झटका है क्योंकि ऊंची कूद में शरत कुमार का स्वर्ण पदक पक्का माना जा रहा था."

मोहम्मद निजामुद्दीन, कोच

शरत कुमार के ए और बी, दोनों नमूनों में स्टैनोजोलोल मिला जबकि हितेश सचदेव के ए नमूने में नैंड्रोनोल पाया गया है. नाडा ने हितेश को बी नमूने के परीक्षण के लिए बुलाया है.

निजामुद्दीन ने बताया, “अगर लंदन पैरालंपिक के बाद ये खिलाड़ी डोपिंग के दोषी पाए जाते तो ये राष्ट्रीय शर्म होती.”

उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया कि अधिकारी और कोचों की ओर से पूरी निगरानी नहीं बरती जाती है जिसके चलते खिलाड़ी प्रतिबंधित दवाएं ले रहे हैं.

'दवाओं के शिकार'

पोलियो ग्रस्त ऊंची कूद के खिलाड़ी शरत कुमार का छह महीने पहले दिल्ली के एक नामी अस्पताल में बड़ा ऑपरेशन हुआ था और कोच का कहना है कि बार बार आग्रह किए जाने के बावजूद अस्पताल ने ये जानकारी नहीं दी है कि इस दौरान उन्हें कौन कौन सी दवाएं दी गईं.

कोच के मुताबिक, “हमें ये संदेह है कि वो दवाओं के शिकार बने हैं.”

डोपिंग

हाल के वर्षों में डोपिंग खेलों की एक बड़ी समस्या के तौर पर उभरी है.

उन्होंने कहा कि अस्पताल की रिपोर्ट के बाद बहुत से शक दूर हो सकते हैं.

हालांकि गोला फेंक खिलाड़ी हितेश को डेंगू बुखार होने पर उनका इलाज करने वाले डॉक्टर ने कोच को बताया कि उन्हें नैंड्रोलोन दवा दी गई.

डॉक्टर के मुताबिक हितेश बहुत कमजोर थे इसलिए उन्हें ये दवा दी गई और डॉक्टर को उनके खिलाड़ी होने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

निजामुद्दीन के अनुसार हितेश के डॉक्टर नाडा के सामने भी ये बयान देने को तैयार हैं.

कोई महिला खिलाड़ी नहीं

खेलों से पहले भारतीय पैरालंपिक टीम को लगे इस झटके के बादवजूद पांच भारतीय खिलाड़ी लंदन पैरालंपिक में हिस्सा लेंगे.

पांच दौड़ स्पर्धाओं के अलावा भारतीय खिलाड़ी पावर लिफ्टिंग, फेंसिंग और तैराकी की स्पर्धाओं में उतरेंगे.

लंदन पैरालंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने वाले खिलाड़ियों के डोपिंग टेस्ट के नतीजे ओलंपिक समिति और सरकार के पास पहुंचने के बाद आधिकारिक तौर पर जल्द भारतीय पैरालंपिक टीम की घोषणा होने की उम्मीद है.

किसी भारतीय महिला पैरालंपिक खिलाड़ी ने लंदन खेलों के लिए क्वॉलिफाई नहीं किया है.

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