ग्लैमर और पैसे ने बदल दी आईपीएल की दिशा

 शुक्रवार, 18 मई, 2012 को 20:41 IST तक के समाचार

आईपीएल पैसे और ग्लैमर की वजह से भी खासा चर्चित है

आईपीएल मैच के बाद मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में शाहरुख खान और एमसीए अधिकारियों के बीच जो भी घटना हुई उसके दो पहलू दिख रहे हैं. एक ओर शाहरुख खान का पक्ष है कि उन्होंने गालियां बाद में तब दीं जब बच्चों के साथ दुर्व्यवहार हुआ.

दूसरी ओर मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के अधिकारी कह रहे हैं कि शाहरुख खान ने शराब पी रखी थी और उन्होंने नशे में सुरक्षा गार्डों को गालियां दीं.

बहरहाल क्या सही था, क्या गलत ये तो जांच के बाद पता चलेगा. लेकिन एक बात तो सही है, शाहरुख खान ने भी स्वीकार किया है कि उन्होंने गालियां दीं.

तो इसके लिए उन्हें माफी माँग लेनी चाहिए. एक सम्मानित नागरिक होने के नाते. लेकिन प्रेस कांफ्रेंस में उनका ये कहना कि उन्होंने जो भी किया, ठीक किया. ये ठीक नहीं है.

दूसरे एक बात और, इस आईपीएल में अक्सर खिलाड़ी पर्दे के पीछे चले जाते हैं. कुछ समझ में नहीं आता कि टीम के मालिक, कोच, खिलाड़ी इन सबकी क्या सीमा है.

इंग्लिश प्रीमियर लीग

यहां ये बताना जरूरी है कि फुटबॉल में इंग्लिश प्रीमयर लीग में किसी को पता नहीं होता कि किस टीम का मालिक कौन है. ये लोग कहते हैं कि उसी की तर्ज पर आईपीएल शुरू हुआ है तो उससे इन्हें सीख लेनी चाहिए.

दरअसल इस खेल में ग्लैमर, क्रिकेट, कॉर्पोरेट और पैसे का जो संगम हुआ है, वो इसको गलत दिशा में ले जा रहा है.

"इस आईपीएल में अक्सर खिलाड़ी पर्दे के पीछे चले जाते हैं. कुछ समझ में नहीं आता कि टीम के मालिक, कोच, खिलाड़ी इन सबकी क्या सीमा है."

प्रदीप मैगजीन, वरिष्ठ खेल पत्रकार

आईपीएल में अमरीकी नकल पर इन्होंने चीयरलीडर्स को बुलाना शुरू किया है. लेकिन अमरीका में इस तरह नहीं होता. वहां पूरी तरह से प्रशिक्षित चीयरलीडर्स होती हैं और सिर्फ लड़कियां ही नहीं बल्कि लड़के भी चीयरलीडर होते हैं.

जबकि यहां तो लगता है कि लड़कियों को बुलाने का और डांस कराने का मतलब सिर्फ भीड़ को आकर्षित करना है.

सबसे ज्यादा नुकसान आईपीएल का यही है कि इसने स्पोर्ट्स, ग्लैमर और बॉलीवुड को मिक्स करके और पैसे कमाने के चक्कर में खेल की मूल भावना को नष्ट कर दिया है.

यहां तक कि खेल के दौरान खिलाड़ी अपनी चोट तक छिपा ले जाते हैं. और इसका असर कई बार राष्ट्रीय टीम पर भी दिखा है.

ये ठीक है कि मनोरंजन के लिए आईपीएल क्रिकेट का एक बढ़िया तरीका है, लेकिन ये नहीं होना चाहिए कि इसमें जो हो रहा है, वही असली क्रिकेट मालूम पड़े. और असली क्रिकेट की ओर से लोगों का ध्यान ही चला जाए.

प्रतिबंध लगाने में जल्दबाजी?

जहां तक मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन यानी एमीसीए का शाहरुख खान के ऊपर प्रतिबंध लगाने का सवाल है, तो ये काम तब होना चाहिए था जबकि वो दोषी ठहराए जाते.

यदि वाकई वो दोषी हैं तो सजा मिलनी चाहिए. लेकिन तब तक एमसीए को इंतजार करना चाहिए था.

लगता नहीं कि इस तरह का कोई दूसरा भी उदाहरण होगा कि किसी के मैदान में घुसने पर ही प्रतिबंध लगा हो, वो भी किसी सेलिब्रिटी पर. कम से कम भारत में तो ऐसा नहीं हुआ है.

एक बात और, आईपीएल से पहले सेलिब्रिटीज इस तरह से मैच देखने भी नहीं आते थे. एक शालीन तरीके से आते थे और मैच देखकर चले जाते थे.

आईपीएल में चूंकि इस तरह के लोग टीम के मालिक हैं और इस तरह का व्यवहार करते हैं जैसे इन्हीं की वजह से क्रिकेट जिंदा है, तो ये सब तो आईपीएल की वजह से ही हो रहा है.

वैसे लगता नहीं कि ये प्रतिबंध ज्यादा समय तक रहेगा. रहना भी नहीं चाहिए. एक चीज और बीसीसीआई को भी फ्रेंचाइजी के नियम और उनकी सीमाएं तय करनी होंगी. ताकि आगे ऐसी कोई स्थिति न आने पाए.

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