भारतीय बल्लेबाज़ों ने फिर घुटने टेके

 शुक्रवार, 27 जनवरी, 2012 को 15:58 IST तक के समाचार
ऑस्ट्रेलियन टीम

भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमों के बीच कितना बड़ा अंतर आ गया है यह एडिलेड में एक फिर साबित हो गया.

ऑस्ट्रेलिया के 500 रनों की चुनौती के सामने, बल्लेबाज़ी के लिए बेहतरीन पिच पर भारतीय बल्लेबाज़ों ने फिर घुटने टेक दिए.

भारतीय टीम इस सिरीज़ को चार शून्य से हारने के डरावने सपने को सच करते हुए शर्मनाक हार से सिर्फ़ एक कदम की दूरी तक पहुँच गई है.

मैच के चौथे दिन ऑस्ट्रेलिया ने 50 रन पर तीन विकेट से आगे खेलना शुरु किया और लंच के कुछ ओवरों बाद 499 रनों की बढ़त पर पारी घोषित कर दी.

पोंटिंग ने नाबाद अर्धशतक बनाया. सिरीज़ से पहले पोंटिंग खराब फ़ॉर्म में थे और जिस तरह कड़े मेहनत और प्रयास के बाद वो रनों के बीच लौटे वो भारतीय बल्लेबाज़ों के लिए भी सबक था.

लेकिन भारतीय बल्लेबाज़ ये सबक ले नहीं सके और उनके आउट होने का सिलसिला बदस्तूर जारी रहा.

पैवेलियन लौटने का सिलसिला

दिन का खेल खत्म होने तक गंभीर, सहवाग, द्रविड़, सचिन, लक्ष्मण और कोहली पैवेलियन लौट चुके थे.

द्रविड़, सचिन और लक्ष्मण का शायद ये आखिरी ऑस्ट्रेलियाई दौरा है और दर्शकों ने उनके आउट होने के बाद खड़े होकर तालियों के साथ उन्हें विदाई दी.

"क्रिकेट एक टीम गेम है. इसमें सिर्फ़ बल्लेबाज़ या सिर्फ़ गेंदबाज़ को दोष नहीं दिया जा सकता. बल्लेबाज़ों ने रन नहीं बनाए और गेंदबाज़ों ने सही समय पर विकेट नहीं लिया. यह पूरी टीम की असफलता है, किसी एक की नहीं"

रवि अश्विन

इन सभी बल्लेबाज़ों में सिर्फ़ सहवाग कुछ रन बना सके. उन्होंने आते के साथ ही शॉट्स खेलना शुरु कर दिया और पचास रन पूरा किया.

लेकिन नेथन लॉयन की आसान फ़ुलटॉस गेंद पर सहवाग कैच थमा बैठे.

सहवाग पहली पारी में भी फ़ुलटॉस गेंद पर आउट हुए थे और मैच के बाद लॉयन ने कहा कि इस विकेट के लिए उन्हें पोंटिंग से ख़ास सलाह मिली थी.

उन्होंने कहा, “वो एक फुलटॉस गेंद थी जो मेरी सबसे अच्छी गेंद नहीं है. लेकिन सहवाग को उसे खेलना था और उन्होंने कैच थमा दिया. दरअसल गेंद से पहले पोंटिंग मेरे पास आए औऱ कहा कि फुलटॉस फेंको और कमाल देखो, और कमाल हो गया.”

वहीं भारत की तरफ से एक बार फिर रवि अश्विन संवाददाता सम्मेलन में आए. उन्होंने कहा कि टीम के प्रदर्शन पर किसी एक खिलाड़ी को दोष देना ठीक नहीं और ये पूरी टीम की असफलता है.

उन्होंने कहा, “क्रिकेट एक टीम गेम है. इसमें सिर्फ़ बल्लेबाज़ या सिर्फ़ गेंदबाज़ को दोष नहीं दिया जा सकता. बल्लेबाज़ों ने रन नहीं बनाए और गेंदबाज़ों ने सही समय पर विकेट नहीं लिया. यह पूरी टीम की असफलता है, किसी एक की नहीं.”

शनिवार को भारत के आखिरी चार बल्लेबाज़ कोशिश करेंगे कि पूरा दिन खेल जाए और मैच किसी तरह बचा लें. लेकिन जिस तरह से टीम इस सिरीज़ में खेली है, दर्शकों को उनसे उम्मीदें टूट गई हैं.

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