मुंबई में जीत के बाद महाजश्न

जश्न में डूबी मुंबई

मुंबई की सड़कों पर हज़ारों की संख्या में लोगों ने भारत के विश्व विजेता बनने का जश्न मनाया

शनिवार देर रात जैसे ही वानखेड़े स्टेडियम में भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने निर्णायक शॉट खेला सारा स्टेडियम ख़ुशी में झूम उठा. पर स्टेडियम के बाहर सड़कों पर जिस तरह की ख़ुशी की आंधी चल रही थी, वो स्टेडियम के भीतर की तुलना में कहीं ज़्यादा थी.

वानखेड़े स्टेडियम के विभिन्न गेट से लेकर पांच किलोमीटर तक की दूरी पर लोगबाग सड़कों के किनारे भारतीय तिरंगा लिए खड़े थे और वंदे मातरम के शोर से जैसे सारी मुंबई गूंजायमान हो उठी थी.

एक कहावत कई बार सुनी थी कि मुंबई शहर कभी सोता नहीं है लेकिन शनिवार की रात और रविवार की सुबह इस कहावत को अपनी आँखों से सच होते देखा. चाहे वो अमिताभ और अभिषेक बच्चन हों या फिर अन्य फ़िल्मी सितारे, क़रीब-क़रीब पूरा बॉलीवुड और अनेकों राजनेता अपनी-अपनी गाड़ियों से बाहर निकलकर सड़कों पर उतर आए.

किसी भी बड़ी शख़्सियत को सुरक्षा वगैरह की ज़रा भी परवाह नहीं थी और वे किसी भी आम आदमी से पूरी सहजता से मिल रहे थे, हाथ हिला रहे थे और 28 साल बाद मिली इस भारतीय जीत का जश्न मन रहे थे.

मुंबई की मशहूर मरीन ड्राइव पर तो मीलों तक गाड़ियों की कतार थी, जिनपर बच्चे, बूढ़े़ और जवान सवार थे और तिरंगा लहरा रहे थे.

जश्न में डूबे लोग

मुंबई की सड़कों पर जगह-जगह ऐसा ही नज़ारा था

शहर में हर तरफ से जश्न की खबरें आ रही थीं, पटाखों की आवाज़ से मुंबई गूंज उठी थी और माहौल एकदम अद्भुत था. जैस ही भारतीय टीम की बस स्टेडियम से होटल की ओर चली, लोगों ने हज़ारों की तादाद में गेटवे ऑफ इंडिया पर स्थित ताज होटल का भी रुख किया. होटल के आसपास शायद ही कोई ऐसा पेड़ बचा था, कोई ऐसी इमारत बची थी, जिसपर लोगबाग चढ़ कर इस ऐतिहासिक रात का आनंद नहीं ले रहे थे.
जीत के जश्न का ये जुनून रविवार सुबह तक भी जारी था.

क्रिकेट के सैकड़ों दीवाने ऐसे भी थे जो अपनी चहेती टीम के होटल के सामने अगला दिन भी बिताने की मंशा रखते थे.
सुबह दस बजे के क़रीब मुंबई में निकला तो हर नुक्कड़, चौराहे और चाय की दुकान पर शनिवार की ऐतिहासिक जीत के ही चर्चे थे.

शहर के स्थानीय अख़बारों के सत्तर फ़ीसदी पन्ने सिर्फ जीत को ही समर्पित थे और रेडियो पर मां तुझे सलाम और सबसे आगे होंगे हिंदुस्तानी जैसे गानों का बोलबाला था.

हर तरफ बात टीम की जीत की, खिलाड़ियों के लिए लगातार की जा रही इनामी राशि की घोषणाओं की और इंतज़ार एक विजय जुलूस का.
हो भी क्यों न. भारत जैसे देश में जहां क्रिकेट को मज़हब की तरह देखा जाता है, उस देश के खिलाड़ियों ने क्रिकेट के महानतम खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर को विश्व कप का सबसे नायाब तोहफ़ा जो दिया था.

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