खेल: 2010

हॉकी

भारतीय पुरुष हॉकी टीम

राष्ट्रमंडल खेलों में हॉकी टीम ने पहली बार कोई पदक जीता

खेलों के लिहाज़ से वर्ष 2010 भारत के लिए काफ़ी अहम रहा. साल की शुरुआत से ही माना जा रहा था कि इस साल क्रिकेट के अलावा बाक़ी खेलों को भी भारत में एक पहचान मिलेगी. भारत साल 2010 में हॉकी विश्व कप और राष्ट्रमंडल खेलों की मेज़बानी करने वाला था.

भारत हॉकी में जब 2008 में बीजिंग ओलंपिक के लिए क्वॉलिफ़ाई भी नहीं कर सका तो देश में काफ़ी हाय-तौबा मची, ऐसे में साल के शुरू में दिल्ली में ही आयोजित हो रहे विश्व कप को लेकर काफ़ी उत्साह था.

दिल्ली का मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम भारत के मैचों में भरा रहा मगर मुक़ाबले में भारत कहीं पीछे छूट गया.

राष्ट्रमंडल खेलों के फ़ाइनल और एशियाड के सेमीफ़ाइनल में पहुँची भारतीय टीम फ़िलहाल लंदन ओलंपिक के लिए क्वॉलिफ़ाई नहीं कर सकी है और इस बीच भारत को एक कोच की तलाश है.

विश्व कप के पहले ही मैच में भारत ने पाकिस्तान को 4-1 से हराकर प्रशंसकों के मन में उम्मीद जगाई थी मगर उसी मैच में शिवेंद्र सिंह को दो मैचों के लिए निलंबित कर दिया गया जिसका असर भारत के अगले प्रदर्शनों पर पड़ा.

भारत पाकिस्तान को हराने के बाद लगातार तीन मैच हरा जहाँ उसे पहले ऑस्ट्रेलिया ने फिर स्पेन ने और उसके बाद इंग्लैंड ने हराया. भारत अंतिम लीग मैच दक्षिण अफ़्रीका से 3-3 से ड्रॉ करा सका. अर्जेंटीना के विरुद्ध भारत 4-2 से हार गया और आठवें स्थान पर रहा.

राष्ट्रमंडल खेल

भारत ने इसके बाद मलेशिया में सुल्तान अज़लान शाह हॉकी प्रतियोगिता में ऑस्ट्रेलिया की बी टीम के साथ ही पाकिस्तान को भी हराया. मगर फ़ाइनल में बारिश की वजह से भारत और दक्षिण कोरिया को संयुक्त विजेता घोषित किया गया.

भारत के लिए अगली चुनौती राष्ट्रमंडल खेलों की थी. भारत ने अच्छा प्रदर्शन किया, उसे सेमीफ़ाइनल में जगह बनाने के लिए पाकिस्तान को हराना था जो उसने आसानी से 7-4 से किया और इंग्लैंड के साथ सेमीफ़ाइनल मैच तय हुआ.

सेमीफ़ाइनल में इंग्लैंड मज़बूत टीम मानी जा रही थी मगर भारत ने पेनल्टी शूट आउट में इंग्लैंड को 5-4 से हराकर राष्ट्रमंडल खेलों के हॉकी मुक़ाबले के फ़ाइनल में जगह बनाई.

पाकिस्तान हॉकी टीम

पाकिस्तान टीम ने एशियाड का स्वर्ण जीतकर ओलंपिक में जगह पक्की कर ली

फ़ाइनल तय हुआ ऑस्ट्रेलिया के साथ और उम्मीद थी कि भारत डटकर ऑस्ट्रेलिया का मुक़ाबला करेगा मगर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और 8-0 से भारत को हार मिली.

एशियाड

उस हार से उबरकर भारत को एशियाड में अच्छा प्रदर्शन करना था और वो ख़िताब का प्रबल दावेदार भी था.

भारत ने टूर्नामेंट की अच्छी शुरुआत भी की लीग स्टेज में पाकिस्तान को फिर हराया मगर सेमीफ़ाइनल में मलेशिया से भारत हार गया, जबकि पाकिस्तान ने टूर्नामेंट जीत लिया.

ओलंपिक में जगह बनाने के लिए एशियाड में स्वर्ण ज़रूरी था मगर उसकी जगह दक्षिण कोरिया को हराकर भारत ने काँस्य पदक जीता.

भारतीय महिला टीम के लिए ये वर्ष उतार चढ़ाव भरा रहा पहले तो यौन शोषण के आरोपों के बाद कोच एमके कौशिक को इस्तीफ़ा देना पड़ा और फिर टीम एक के बाद एक टूर्नामेंट हारती गई.

राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार भारत पदक से दूर रहा जबकि एशियाड में भी कहानी कुछ वैसी ही थी. महिला टीम ने पिछली बार राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता था और वो एक बार पहले स्वर्ण तक जीत चुका था.

महिला टीम विश्व कप में भारत नौंवें स्थान पर रही.

वर्ष ख़त्म होने के साथ ही भारतीय पुरुष टीम के कोच होज़े ब्रासा का कॉन्ट्रैक्ट ख़त्म हुआ और अभी टीम को एक कोच की तलाश है.

फ़ुटबॉल

विश्व कप के साथ आंद्रेस इनिएस्ता

आंद्रेस इनिएस्ता के गोल के साथ ही स्पेन ने विश्व कप अपने नाम कर लिया

फ़ुटबॉल विश्व कप हमेशा से ही खेल प्रेमियों के बीच काफ़ी उत्साह पैदा करता है और इस बार दक्षिण अफ़्रीका में हो रहे विश्व कप के साथ भी वैसा ही हुआ.

दक्षिण अफ़्रीका में हो रहे विश्व कप के आयोजन को लेकर काफ़ी लोगों में शंका थी मगर बेहद सफल ढंग से ये आयोजन हुआ.

विश्व कप से पहले और उसके दौरान गायिका शकीरा का गाना वाका-वाका काफ़ी लोकप्रिय हुआ और उसने भी इस आयोजन की सफलता में एक बड़ी भूमिका अदा की.

इससे पहले कि खेल प्रेमी मैचों और टीमों के प्रदर्शन पर चर्चा शुरू करते एक अन्य मसला वहाँ चर्चा का केंद्र बना और वो था- वुवुज़ेला.

इस भोंपू की आवाज़ को लेकर कभी खिलाड़ियों ने शिकायत की तो कभी टीवी कमेंटेटरों ने. मसला ऊपर तक पहुँचा मगर इसे इस विश्व कप की पहचान मानते हुए इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.

वुवुज़ेला के उसी शोर में खेल आगे बढ़ा और मेज़बान दक्षिण अफ़्रीका पहले ही दौर में बाहर हो गया.

बड़ी-बड़ी टीमों से लोगों को काफ़ी उम्मीदें थीं और ख़ासकर अर्जेंटीना से क्योंकि इस बार डिएगो माराडोना उस टीम के कोच के तौर पर विश्व कप में शामिल थे.

माराडोना पर फ़ोकस

डिएगो माराडोना

माराडोना इस बार विश्व कप में अर्जेंटीना के कोच बनकर पहुँचे

अर्जेंटीना के हर मैच में किनारे खड़े माराडोना की गोल पर ख़ुशी और नहीं हो पाने पर झुंझलाहट लोगों को याद रह गई.

फ़्रांस के बुरे प्रदर्शन के बाद कोच रेमंड डोमनेक ने जब स्ट्राइकर निकोलस एनेल्का को वापस भेजा तो उसकी वजह से टीम के अंदर काफ़ी खींचतान भी हुई और टीम की ख़राब हालत और ख़राब हो गई.

पाँच अफ़्रीकी टीमें तो पहले ही दौर में टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी थीं बची हुई घाना की टीम क्वॉर्टर फ़ाइनल तक पहुँची जहाँ उसे उरुग्वे ने हराया.

उरुग्वे इस बार अच्छा प्रदर्शन करने की वजह से चर्चा में रही और उसके खिलाड़ी डिएगो फ़ोरलान को 'गोल्डन बूट' से भी नवाज़ा गया मगर टीम जर्मनी से हारकर चौथे स्थान पर रह गई.

पॉल की चर्चा

ऑक्टोपस पॉल

ऑक्टोपस पॉल ने स्पेन के जीतने की भविष्यवाणी की थी

लगातार दूसरे साल जर्मनी को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा.

जर्मनी ने क्वॉर्टर फ़ाइनल में अर्जेंटीना को हराया था और उस हार के बाद ही माराडोना को पद भी छोड़ना पड़ा.

इस पूरे टूर्नामेंट के दौरान चर्चा थी एक ऑक्टोपस पॉल की भी. ये ऑक्टोपस लगातार जर्मनी के मैचों की सही भविष्यवाणी करता आ रहा था.

फ़ाइनल मैच था स्पेन और हॉलैंड के बीच और ऑक्टोपस का मत स्पेन के साथ था.

मैच रोमाँचक रहा और इनिएस्ता के एकमात्र गोल की मदद से स्पेन ने पहली बार विश्व कप पर क़ब्ज़ा कर लिया.

वैसे रोचक बात ये भी रही कि पूरे टूर्नामेंट में स्पेन ने सिर्फ़ आठ गोल किए.

क्रिकेट

ऐशेज़ के साथ स्ट्रॉस

इंग्लैंड ने 24 साल बाद ऐशेज़ अपने पास बरक़रार रखने में क़ामयाबी हासिल की

क्रिकेट में आम तौर पर ये साल कई रोमाँचक शृंखलाओं से भरा रहा. भारत जहाँ इस साल टेस्ट में नंबर एक की टीम होने का ख़िताब बचाने में क़ामयाब हो गया तो इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया में जाकर उसे हराते हुए ऐशेज़ पर क़ब्ज़ा बरक़रार रखा.

साल की शुरुआत में भारतीय टीम का मुक़ाबला दक्षिण अफ़्रीका के विरुद्ध दो टेस्ट में था और भारत अगर सिरीज़ हार जाता तो दक्षिण अफ़्रीका नंबर एक की कुर्सी पा सकता था.

पहला टेस्ट दक्षिण अफ़्रीका नागपुर में जीत भी गया मगर उसके बाद कोलकाता में भारत ने एक पारी और 58 रनों से दक्षिण अफ़्रीका को हराकर टेस्ट में बादशाहत क़ायम रखी.

वनडे सिरीज़ में भारत ने 2-1 से जीत हासिल की और इसी सिरीज़ के ग्वालियर वनडे में सचिन तेंदुलकर ने दोहरा शतक जड़ा.

आईपीएल

सिरीज़ के बाद तैयारी थी इंडियन प्रीमियर लीग के तीसरे सीज़न की. इस साल ये टूर्नामेंट फिर भारत लौटा था क्योंकि पिछले साल आम चुनाव के चलते सुरक्षा कारणों से टूर्नामेंट दक्षिण अफ़्रीका में हुआ था.

इस बार मुंबई इंडियंस ने ज़बरदस्त प्रदर्शन किया और चेन्नई सुपरकिंग्स के साथ वो फ़ाइनल में पहुँची मगर जीत हासिल हुई महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्त्व वाले चेन्नई को.

इस बार के टूर्नामेंट में किंग्स एलेवन पंजाब का प्रदर्शन सबसे ख़राब रहा क्योंकि 14 में से वो टीम सिर्फ़ चार ही मैच जीत पाई और टीम के मालिकों में से एक प्रीति ज़िंटा का मायूस चेहरा बार-बार टेलिविज़न स्क्रीन पर आता रहा.

चेन्नई सुपर किंग्स

चेन्नई सुपर किंग्स आईपीएल के तीसरे सीज़न में विजेता बना

इस टूर्नामेंट के दौरान ही दो नई टीमों की घोषणा हुई जबकि सहारा की टीम ने पुणे की और रॉन्देवू स्पोर्ट्स ग्रुप ने कोच्चि की टीम ख़रीद ली.

उसके बाद आईपीएल के चेयरमैन ललित मोदी ने एक बार सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर कोच्चि के मालिकाना हक़ के बारे में सवाल उठाया और तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर का नाम भी उस विवाद में घसीटा गया.

उसके बाद थरूर को इस्तीफ़ा देना पड़ा और एक तरफ़ जहाँ आईपीएल का विजेता घोषित हो रहा था तो दूसरी ओर ललित मोदी को पद से हटाए जाने की तैयारी हो रही थी.

आईपीएल के इस कीचड़ की छींटें अब भी उछल रही हैं और मामला पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है.

आईपीएल के अनुभव से निकलकर भारतीय टीम ने तुरंत रुख़ किया वेस्टइंडीज़ की ओर जहाँ ट्वेन्टी-20 का विश्व कप होना था.

गंभीर का करिश्मा

भारतीय टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और इंग्लैंड ने पाकिस्तान को हराकर क्रिकेट का कोई प्रमुख टूर्नामेंट बड़े समय बाद जीता.

गौतम गंभीर

गंभीर की कप्तानी में भारतीय टीम ने न्यूज़ीलैंड को वनडे सिरीज़ में 5-0 से धो दिया

पाकिस्तान के लिए क्रिकेट के लिहाज़ से ये साल एक बार फिर निराशाजनक ही रहा. किसी भी अंतरराष्ट्रीय टीम ने पाकिस्तान का रुख़ नहीं किया और उसे घरेलू शृंखला खेलने के लिए विदेश जाना पड़ा.

मगर इंग्लैंड में जाकर ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध पाकिस्तान ने सिरीज़ खेली और वो 1-1 से बराबर रही. उसके बाद इंग्लैंड के विरुद्ध पाकिस्तान ने जब टेस्ट शृंखला खेली तो उसमें लगे स्पॉट फ़िक्सिंग के आरोपों ने क्रिकेट को हिला दिया.

इस साल भारत ने श्रीलंका में हुए एशिया कप में ख़िताबी जीत हासिल की.

राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान ही भारत आई ऑस्ट्रेलियाई टीम और भारत ने दोनों टेस्ट में उसे धूल चटा दी.

न्यूज़ीलैंड की टीम की इस साल हालत काफ़ी ख़राब रही क्योंकि उन्हें लगातार नौ वनडे में हार का सामना करना पड़ा. पहले बांग्लादेश गई न्यूज़ीलैंड की टीम को मेज़बानों ने 4-0 से हराया.

मुरलीधरन का संन्यास

मुरलीधरन

मुथैया मुरलीधरन ने 800वाँ टेस्ट विकेट अपने करियर की अंतिम गेंद पर लिया

उसके बाद जब टीम भारत पहुँची तो भारत ने कई वरिष्ठ खिलाड़ियों को आराम देते हुए गौतम गंभीर को कप्तानी सौंपी गई. इस टीम ने पाँच वनडे की सिरीज़ में 5-0 से जीत हासिल की.

मगर इसी साल स्पिन के महान जादूगर मुथैया मुरलीधरन ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया.

उन्होंने 22 जुलाई को भारत के विरुद्ध अपना 800वाँ टेस्ट विकेट लिया. वो मुरलधीरन का 133वाँ मैच था और उन्होंने कहा था कि उस मैच के बाद वह संन्यास ले लेंगे.

उस मैच में प्रज्ञान ओझा को मुरलधीरन ने आउट किया और वो ही उस मैच का अंतिम विकेट था यानी अपने टेस्ट करियर की अंतिम गेंद पर विकेट लेकर मुरलधीरन ने 800 टेस्ट विकेट पूरे कर लिए.

ओझा का वो कैच महेला जयवर्द्धने ने पकड़ा.

सचिन तेंदुलकर

तेंदुलकर

सचिन तेंदुलकर ने साल के अंत में दक्षिण अफ़्रीका के विरुद्ध टेस्ट करियर का 50वाँ शतक लगाया

क्रिकेट की इस साल की चर्चा में सबसे पहले निस्संदेह सचिन तेंदुलकर का नाम आएगा.

साल की जब शुरुआत हुई तो सचिन तेंदुलकर को टेस्ट जगत में 50 टेस्ट शतक पूरा करने के लिए सात शतकों की ज़रूरत थी.

भारत का साल का पहला दौरा बांग्लादेश के विरुद्ध था और सचिन ने 18 जनवरी को चटगाँव टेस्ट में नॉट आउट रहते हुए 105 रन बनाए.

उसी दौरे पर सचिन ने एक हफ़्ते बाद मीरपुर में फिर शतक जड़ा और 143 रन बनाए. उनके आलोचकों ने कहना शुरू कर दिया कि सचिन तो कमज़ोर टीम के विरुद्ध अपना रिकॉर्ड मज़बूत कर रहे हैं.

मगर उसके बाद भारत पर आई दक्षिण अफ़्रीका के विरुद्ध सचिन ने दो और शतक ठोंककर उन आलोचकों का मुँह बंद कर दिया.

पहले तेंदुलकर ने नागपुर में 100 और फिर कोलकाता में 106 रन बनाए.

पहला दोहरा शतक

इसके बाद उन्होंने आलोचकों का मुँह 24 फ़रवरी को ग्वालियर में इतिहास रचकर पूरी तरह बंद कर दिया.

दक्षिण अफ़्रीका के विरुद्ध भारत वनडे खेलने उतरा था और सचिन तेंदुलकर ने 147 गेंदों का सामना करते हुए 25 चौके और तीन छक्के लगाकर वनडे का पहला दोहरा शतक जमा दिया.

सचिन तेंदुलकर

सचिन ने साल की शुरुआत में दक्षिण अफ़्रीका के विरुद्ध वनडे में पहला दोहरा शतक जमाया

ग्वालियर के लोग इतिहास के गवाह बने. भारत ने 401 रन बनाए और दक्षिण अफ़्रीका को 153 रनों से हरा दिया.

वनडे में उनकी ये उपलब्धि चमत्कारिक थी.

उन्होंने इसके बाद श्रीलंका जाकर 48वाँ और भारत में ही ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध खेलत हुए टेस्ट में अपना 49वाँ शतक लगाया.

वर्ष का भारत का अंतिम दौरा दक्षिण अफ़्रीका का था और उस दौरे के पहले ही मैच में उन्होंने शतक जमाकर टेस्ट में 50 शतक पूरे कर लिए.

ब्रैडमैन से तुलना

अब तो स्थिति कुछ यूँ है कि तेंदुलकर शायद हर मैच में एक नया रिकॉर्ड बना देते हैं. उन्होंने अक्तूबर में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध हुई सिरीज़ के दौरान ही टेस्ट में 14 हज़ार रन पूरे कर लिए.

सचिन ने पहली बार इस साल आईसीसी का क्रिकेटर ऑफ़ द ईयर पुरस्कार जीता तो भारतीय वायु सेना ने उन्हें मानद ग्रुप कैप्टन बनाया.

वनडे और टेस्ट ही नहीं सचिन क्रिकेट के सबसे नए फ़ॉर्मेट ट्वेन्टी-20 में भी चमके जबकि इंडियन प्रीमियर लीग में उन्होंने टीम की सफल कप्तानी की और उसे फ़ाइनल में पहुँचाया.

इस टूर्नामेंट में सर्वाधिक रन बनाने का रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम रहा, हालाँकि उनकी टीम फ़ाइनल में महेंद्र सिंह धोनी की चेन्नई सुपर किंग्स से हार गई.

सचिन के इस तरह के प्रदर्शन के बाद अब उनकी तुलना महान डॉन ब्रैडमैन से भी होने लगी है और बड़े पैमाने पर लोगों ने सचिन को सर डॉन से बेहतर बताना शुरू भी कर दिया है और उन्हें भारत रत्न देने की माँग ज़ोर पकड़ रही है.

राष्ट्रमंडल खेल

साइना नेहवाल

नेहवाल ने राष्ट्रमंडल खेलों के अंतिम दिन स्वर्ण जीतकर भारत को पदक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुँचाया

राष्ट्रमंडल खेलों ने और उसके एक ही महीने के भीतर हुए एशियाड ने भारत में ओलंपिक की स्पर्द्धाओं वाले खिलाड़ियों को एक अलग पहचान दी और वे खिलाड़ी भी स्टार हो गए.

राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय निशानेबाज़ों ने बेहतरीन निशाना साधा और सर्वाधिक पदक भारत को वहीं से मिले.

पहला स्वर्ण पदक अभिनव बिंद्रा और गगन नारंग की जोड़ी ने दिलाया और उसके बाद पदकों की बौछार हो गई.

भारत को 14 स्वर्ण सहित कुल 30 पदक हासिल हुए पर यही निशानेबाज़ जब एशियाई खेलों में गए तो वहाँ सिवाय रोंजन सोढ़ी के कोई भी निशानेबाज़ सोने का तमग़ा नहीं पा सका.

एथलेटिक्स में आश्चर्य

भारत के लिए इस साल एथलेटिक्स ने कुछ सुखद आश्चर्य प्रस्तुत किए. राष्ट्रमंडल खेलों में खचाखच भरे जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में महिलाओं के डिस्कस थ्रो में जब पदक बाँटने के बाद झंडे ऊपर चढ़े तो तीनों झंडे भारत के ही थे.

कृष्णा पूनिया ने स्वर्ण, हरवंत कौर ने रजत और सीमा एंतिल ने काँस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया.

डिस्कस थ्रो के भारतीय विजेता

राष्ट्रमंडल खेलों में डिस्कस थ्रो में कृष्णा, हरवंत और सीमा ने तीनों पदक जीत लिए

एथलेटिक्स में ही महिलाओं की चार गुणा चार सौ मीटर में अगला इतिहास बना जब भारतीय महिलाओं ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता.

भारतीय तीरंदाज़ राष्ट्रमंडल खेलों में चमके जहाँ उन्होंने तीन स्वर्ण सहित आठ पदक जीते. महिलाओं के एकल में दीपिका कुमारी ने और पुरुषों के एकल में राहुल बनर्जी ने स्वर्ण जीता.

मुक्केबाज़ी में राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को तीन स्वर्ण और चार काँस्य मिले.

मनोज कुमार, सुरंजय सिंह और परमजीत समोटा स्वर्ण जीतने में क़ामयाब हुए मगर भारत को सबसे ज़्यादा उम्मीद थी विजेंदर से.

विजेंदर इस बार भी सेमीफ़ाइनल में ही हार गए और उन्हें काँस्य से संतोष करना पड़ा.

भारत को इस साल जिम्नास्टिक्स में भी पहली बार पदक मिला जबकि आशीष कुमार ने राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीता.

कुश्ती में बेहतरीन प्रदर्शन

राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती ने भी भारतीय पदक तालिका में बड़ा योगदान दिया. भारतीय पुरुष और महिला पहलवानों ने 10 स्वर्ण, पाँच रजत और चार काँस्य पदक जीते.

सुशील कुमार

सुशील कुमार का मुक़ाबला देखने के लिए स्टेडियम खचाखच भरा था

सुशील कुमार का फ़ाइनल मुक़ाबला देखने के लिए स्टेडियम खचाखच भरा था. महिला वर्ग में बबीता, गीता और अलका तोमर रातों-रात स्टार खिलाड़ी बन गए.

भारत को राष्ट्रमंडल खेलों में टेनिस से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले मगर सोमदेव देववर्मन् ने एकल का स्वर्ण पदक जीता.

सानिया मिर्ज़ा को फ़ाइनल में हारकर रजत पर रुकना पड़ा.

राष्ट्रमंडल खेलों से पहले भारतीय दल की अपेक्षा 100 पदक जीतने और पदक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुँचने की थी.

टेबल टेनिस में भारत के अचंता शरद कमल और शुभजीत साहा की जोड़ी ने युगल मुक़ाबले का स्वर्ण जीता जबकि पिछले बार एकल का स्वर्ण जीतने वाले अचंता को इस बार काँस्य से संतोष करना पड़ा.

खेलों के अंतिम दिन 14 अक्तूबर को साइना नेहवाल ने बैडमिंटन में एकल का स्वर्ण जीतकर भारत का पदक तालिका में दूसरा स्थान सुनिश्चित किया.

इससे पहले अश्विनी पोनप्पा और ज्वाला गुट्टा की जो़ड़ी ने भी भारत को स्वर्ण दिलाया.

भारत ने 38 स्वर्ण सहित कुल 101 पदक जीते.

एशियाड

प्रीजा श्रीधरन

प्रीजा श्रीधरन ने 10 हज़ार मीटर में स्वर्ण जीता

भारत के लिए ग्वांगजो एशियाई खेलों में सबसे ज़्यादा सोना लाने का काम किया एथलेटिक्स ने और सबसे ज़्यादा निराशा मिली निशानेबाज़ी में.

इसके अलावा पिछले खेलों के मुक़ाबले मुक्केबाज़ी में भारत के प्रदर्शन में सबसे ज़बरदस्त सुधार हुआ.

टेनिस में भारत के सबसे मशहूर सितारों लिएंडर पेस और महेश भूपति के नहीं होने के बावजूद भारत ने अच्छा प्रदर्शन किया और दो स्वर्ण, एक रजत और दो काँस्य पदक जीते.

पिछली बार एथलेटिक्स में सिर्फ़ महिलाओं की चार गुणा चार सौ मीटर में भारत के नाम स्वर्ण हुआ था मगर इस बार एथलेटिक्स की शुरुआत वाले दिन ही दो स्वर्ण अपनी झोली में डाल लिए.

महिलाओं की 10 हज़ार मीटर में प्रीजा श्रीधरन और फिर तीन हज़ार मीटर स्टीपलचेज़ में सुधा सिंह ने ये स्वर्ण जीते.

उनके अलावा चार सौ मीटर बाधा दौड़ में महिलाओं और पुरुषों के वर्ग में अश्विनी चिदानंद अक्कुनजी और जोसेफ़ अब्राहम का स्वर्ण पदक जीतना भारतीय खेल प्रेमियों के लिए सुखद आश्चर्य रहा.

महिलाओं की चार गुणा चार सौ मीटर की टीम ने अपना प्रदर्शन बरक़रार रखा और स्वर्ण एक बार फिर भारत को मिला.

निशानेबाज़ी में निराशा

दोहा एशियाई खेलों में निशानेबाज़ी में भारत को तीन स्वर्ण मिले थे और वो भी पिस्टल के मुक़ाबलों में जबकि ग्वांगजो में भारत को सिर्फ़ एक स्वर्ण मिला और वो भी पिस्टल या राइफ़ल में नहीं जहाँ भारत का बोलबाला रहता है बल्कि ट्रैप शूटिंग में.

विजेंदर

मुक्केबाज़ विजेंदर का काँसे का मुक्का सोने का हो गया

रोंजन सोढ़ी के स्वर्ण को छोड़कर गगन नारंग, अभिनव बिंद्रा और विजय कुमार जैसे बड़े-बड़े नाम रजत या काँस्य तक ही सिमट गए.

पिछले एशियाई खेलों में सिर्फ़ दो काँस्य पदक लाने वाले मुक्केबाज़ों ने इस बार भारत को कुल नौ पदक दिलाए और उसमें भी दो स्वर्ण थे.

अब तक काँस्य पदक जीतते आ रहे विजेंदर सिंह और 60 किलोग्राम वर्ग में विकास कृष्ण ने सोने का तमग़ा जीता.

मगर भारत को सुरंजय सिंह और एमसी मैरीकॉम के सेमीफ़ाइनल में ही हार जाने से काफ़ी निराशा भी हुई क्योंकि ये दोनों स्वर्ण के ज़बरदस्त दावेदार माने जा रहे थे.

भारत को इस बार रोइंग ने पाँच पदक दिलाए जिसमें बजरंग लाल टाखर का पुरुषों के एकल स्कल्स में स्वर्ण भी शामिल था.

पंकज आडवाणी ने बिलियर्ड्स में स्वर्ण बरक़रार रखा और इन खेलों का पहला स्वर्ण भारत को दिलाया.

शतरंज में भारत को पिछले एशियाई खेलों में जहाँ दो स्वर्ण मिले थे वहीं इस बार उसे बड़े नामों की ग़ैर-मौजूदग़ी में दो काँस्य पदकों से ही संतोष करना पड़ा.

टेनिस में स्वर्ण

सोमदेव देववर्मन्

सोमदेव देववर्मन् ने एशियाड में दो स्वर्ण जीते

टेनिस में लिएंडर पेस और महेश भूपति लंदन में मास्टर्स टूर्नामेंट के चलते ग्वांगजो नहीं पहुँचे.

ऐसे में सोमदेव देववर्मन् ने एकल और युगल की ज़िम्मेदारी बख़ूबी सँभाली. उन्होंने एकल में तो स्वर्ण जीता ही पुरुष युगल में सनम कृष्ण सिंह के साथ मिलकर भारत को एक और स्वर्ण दिलाया.

सानिया मिर्ज़ा अच्छा खेल दिखाने के बावजूद एकल में सेमीफ़ाइनल में हार गईं और मिश्रित युगल में विष्णु वर्द्धन के साथ उन्हें फ़ाइनल में हार का सामना करना पड़ा.

तीरंदाज़ी में भारतीय पुरुष और महिला टीमों को काँस्य पदक मिले मगर तरुणदीप रॉय फ़ाइनल तक पहुँचकर हार गए.

आशीष कुमार ने भारत को पहली बार एशियाई खेलों में जिम्नास्टिक्स में पदक दिलाया भले ही वो काँस्य था.

अन्य पदक

इसी तरह तैराकी में भारत को 24 साल बाद कोई पदक मिला जबकि वीर धवल खाड़े ने पुरुषों की 50 मीटर बटरफ़्लाई स्पर्द्धा में काँस्य जीता.

भारतीय हॉकी टीमें स्वर्ण जीतकर सीधे लंदन ओलंपिक के लिए क्वॉलिफ़ाई करने के इरादे से आई थीं मगर महिला टीम तो चौथे स्थान पर रही जबकि पुरुष टीम सेमीफ़ाइनल में मलेशिया से हार गई और बाद में काँस्य जीत सकी.

लिन डान

चीन के खिलाड़ियों ने एशियाड में प्रभुत्त्व बरक़रार रखा

कबड्डी पर भारत के प्रभुत्त्व को कोई चुनौती नहीं दे पा रहा है. बीजिंग एशियाड के दौरान 1990 में ये खेल शामिल हुआ था और तब से आज तक भारत ही स्वर्ण जीतता रहा है. इस बार महिलाओं के वर्ग में भी ये खेल शामिल था और वहाँ भी स्वर्ण भारत को ही मिला.

राष्ट्रमंडल खेलों में अच्छे प्रदर्शन के बाद कुश्ती से भारत को काफ़ी उम्मीदें थीं मगर अलका तोमर और सुशील कुमार जैसे प्रमुख पहलवानों की ग़ैर-मौजूदगी में भारत सिर्फ़ तीन काँस्य पदक ही जीत सका.

कुल मिलाकर भारत ने एशियाड में आज तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया और 14 स्वर्ण, 17 रजत और 33 काँस्य पदक जीतकर पदक तालिका में छठा स्थान लिया.

चीन ने इन खेलों में 199 स्वर्ण, 119 रजत और 98 काँस्य पदकों सहित कुल 416 पदक जीते.

कोई देश उसके आस-पास भी नहीं था क्योंकि दूसरे स्थान पर रहे दक्षिण कोरिया के 76 स्वर्ण, 65 रजत और 91 काँस्य पदकों सहित कुल 232 पदक थे.

माना जा रहा था कि दूसरे स्थान के लिए जापान और दक्षिण कोरिया में संघर्ष होगा मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ और जापान 48 स्वर्ण पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा.

विवाद

ललित मोदी और शिल्पा शेट्टी

ललित मोदी को आईपीएल के चेयरमैन के पद से निलंबित कर दिया गया

भारत के लिए इस साल खेल जगत की शुरुआत ही विवाद के साथ हुई.

हॉकी खिलाड़ियों ने प्रोत्साहन राशि की माँग के साथ, विश्व कप से पहले अभ्यास सत्र में शामिल होने से इनकार कर दिया.

विवाद लंबा चला और तत्कालीन हॉकी इंडिया के प्रमुख एके मट्टू को इस्तीफ़ा देना पड़ा.

मसला तब हल हुआ जब कुछ राज्यों की सरकारों ने और कुछ निजी संगठनों ने अपनी ओर से धन देने की बात कही.

खिलाड़ियों को मनाने भारतीय ओलंपिक संघ के प्रमुख सुरेश कलमाड़ी पहुँचे तब जाकर कहीं बात बनी.

हॉकी इंडिया के चुनाव को लेकर भी साल भर विवाद होता रहा और भारतीय हॉकी महासंघ की मान्यता रद्द किए जाने को इस साल न्यायालय ने ख़ारिज कर दिया.

अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि देश में हॉकी की राष्ट्रीय संस्था हॉकी इंडिया है या भारतीय हॉकी महासंघ.

भारतीय खेल मंत्रालय ने इस साल एक आदेश जारी करके कहा कि अब किसी भी खेल महासंघ का अध्यक्ष दो बार छह छह साल के कार्यकाल तक रह सकता है.

इस पर भी काफ़ी विवाद हुआ और अभी तक ये फ़ैसला पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है.

स्पॉट फ़िक्सिंग

सलमान बट्ट और मोहम्मद आमिर

सलमान बट्ट और मोहम्मद आमिर पर स्पॉट फ़िक्सिंग के आरोप लगे

हॉकी से आगे बढ़कर अगला विवाद क्रिकेट में इंडियन प्रीमियर लीग का हुआ जहाँ दो नई टीमों को इस बार शामिल किए जाने के बाद तत्कालीन चेयरमैन ललित मोदी ने जब ट्विटर पर शशि थरूर का नाम कोच्चि की टीम से जोड़ा तो एक नया विवाद उठ खड़ा हुआ.

थरूर को तो इस्तीफ़ा देना ही पड़ा गाज़ मोदी पर भी गिरी और चिरायु अमीन ने आईपीएल का काम सँभाला.

नई गवर्निंग काउंसिल ने किंग्स एलेवन पंजाब और राजस्थान रॉयल्स को आईपीएल के चौथे सीज़न से बाहर करने की कोशिश की मगर अदालत ने गवर्निंग काउंसिल की इन कोशिशों पर पानी फेर दिया.

मगर क्रिकेट का इस साल का सबसे बड़ा विवाद सामने आया स्पॉट फ़िक्सिंग के रूप में.

आरोपों के घेरे में आए पाकिस्तान के तीन प्रमुख खिलाड़ी सलमान बट्ट, मोहम्मद आसिफ़ और मोहम्मद आमिर.

गेंदबाज़ों पर आरोप था कि उन्होंने पहले से तय ओवर और गेंद पर नो बॉल फेंकी और इस जानकारी का सट्टेबाज़ों ने लाभ उठाया.

खिलाड़ी ख़ुद को निर्दोष बता रहे हैं मगर उनके विरुद्ध आईसीसी की जाँच जारी है और ये खिलाड़ी निलंबित हैं.

राष्ट्रमंडल खेल

सुरेश कलमाड़ी

कलमाड़ी के घर पर साल के अंत में सीबीआई ने छापे मारे हैं

इस साल का सबसे बड़ा विवाद हुआ राष्ट्रमंडल खेलों से पहले.

कभी ये चर्चा कि स्टेडियम समय से तैयार नहीं हो पा रहे हैं तो कभी ये कि खेलों के आयोजन में भ्रष्टाचार हुआ है.

आयोजक ये मानने को तैयार ही नहीं दिखे कि स्टेडियम तैयार करने में देर हो रही है जबकि जगह-जगह से तैयार हुए स्टेडियम से भी पानी टपकने को लेकर काफ़ी हाय-तौबा मची.

सबसे ज़्यादा बदनामी तब हुई जब खेलों से कुछ ही दिन पहले मीडिया में खेल गाँव की गंदगी की तस्वीरें आ गईं.

राष्ट्रमंडल खेल महासंघ के मुख्य कार्यकारी माइक हूपर के इस बयान के बाद भारत में हलचल मच गई कि खेल गाँव तो रहने के लायक़ ही नहीं है.

भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया खेलों की आयोजन समिति के महासचिव ललित भनोट के उस बयान पर आश्चर्यचकित रह गए जहाँ उन्होंने सफ़ाई के स्तर का ज़िक्र किया.

भनोट और कलमाड़ी

ललित भनोट के बयान पर देश और विदेश में कड़ी प्रतिक्रिया हुई

भनोट ने कहा, “आप अगर ये पूछते हैं कि ये कमरा साफ़ है या नहीं तो मेरे हिसाब से ये साफ़ होगा मगर उन लोगों को सफ़ाई का एक स्तर चाहिए और वो स्तर मेरे या आप के स्तर से अलग हो सकता है. मगर अब हमने उनके स्तर की साफ़-सफ़ाई कराने की व्यवस्था कर दी है.”

लोग इन खेलों की आयोजन समिति के प्रमुख सुरेश कलमाड़ी से कुछ इस क़दर नाराज़ थे कि उदघाटन और समापन समारोह में उन्होंने कलमाड़ी की काफ़ी हूटिंग की.

इसके बाद साल ख़त्म होते तक सीबीआई ने कलमाड़ी के घरों पर छापे भी मारे.

यानी ऐसे खेल जो विश्व में भारत के बढ़ते प्रभुत्व का डंका बजाने वाले थे लोगों को शर्मसार कर गए.

भारत की साख को धक्का लगा और आगे ओलंपिक आयोजन की आगे की किसी आशा पर भी चोट लगी.

BBC navigation

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.