
सचिन तेंदुलकर गावस्कर को अपनी प्रेरणा बताते हैं
क्रिकेट की दुनिया में 20 सालों तक भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए सबसे पहले मेरी ओर से सचिन को मुबारकबाद पेश है. मैं आशा करता हूँ कि कुछ और सालों तक वह भारत का प्रतिनिधित्व करते रहेंगे.
बीस साल तक मैदान पर अपना करिश्मा दिखाने वाले खिलाड़ी बहुत कम लोग होते हैं. सर ब्रैडमैन ने 1928 से 1948 तक क्रिकेट खेला था लेकिन उनका दुर्भाग्य था कि इस बीच द्वितीय विश्व युद्ध भी हुआ था जिस दौरान खेल का आयोजन बाधित रहा.
सर गैरी सोबर्स ने भी 1954 से 1974 के बीच 20 वर्षों तक खेला था और अब सचिन 20 साल पूरे कर उन महान खिलाड़ियों की श्रेणी में आ गए हैं.
दुनिया मानती है कि डॉन ब्रैडमैन और सोबर्स उत्तम कोटि के खिलाड़ी रहे हैं और अब सचिन भी उसमें शामिल हैं, जो कि भारत और मेरे लिए भी गर्व की बात है.
सबसे बड़ी बात यह है कि 20 साल से खेल रहे सचिन में आज भी जोश की कमी नहीं है. उनमें बच्चों जैसा जुनून है जो कि बहुत ही अच्छी बात है.
रोलमॉडल
मेरी नज़र में सचिन एक खिलाड़ी ही नहीं बल्कि बहुत ही अच्छा इंसान है और युवा पीढ़ी के लिए रोलमॉडल है.
मैदान पर उनका बर्ताव काफ़ी शालीन रहता है हालाँकि उन्होंने कामयाबी की बुलंदी को पा लिया. इससे ज़ाहिर होता है कि उनसे बेहतर रोलमॉडल मिलना मुश्किल है.

गावस्कर का मानना है कि तेंदुलकर युवाओं के लिए रोलमॉडल हैं
ये सुनकर बहुत ही अच्छा लगता है कि इतना बड़ा खिलाड़ी अपनी उपलब्धियों के बावजूद दूसरों को इसका श्रेय देना चाहता है. ये उनकी महानता है कि वह इन उपलब्धियों के सिलसिले में मेरा नाम लेते हैं.
जब भी सचिन ने मेरे रिकॉर्ड तोड़े हैं दिल से दुआ ही निकली है और ये देखकर ख़ुशी होती है कि एक भारतीय ने ही मेरा रिकॉर्ड तोड़ा. शायद ये रिकॉर्ड किसी दूसरे देश का खिलाड़ी तोड़ता तो इतना अच्छा नहीं लगता.
जब अपने देश का इतना महान खिलाड़ी मेरा रिकॉर्ड तोड़ता है तो बुरा बिल्कुल नहीं लगता. ये बात सही है कि थोड़े समय के लिए दिल को दुःख होता है कि मेरा रिकॉर्ड टूट रहा है लेकिन ये पहले से पता होता है कि कोई मेरे रिकॉर्ड के क़रीब आ गया है.
मैं कामना करता हूँ कि सचिन और खेले और बेहतरीन खेल का प्रदर्शन कर टेस्ट और वनडे दोनों में पचास-पचास शतक बनाए. इस तरह 100 शतक बनाने वाले वह शायद अकेले खिलाड़ी बनें.
(बीबीसी के लिए आदेश गुप्ता से बातचीत पर आधारित)














