
वर्ष 1999 के विश्व कप में जावेद मियाँदाद ने अपना आख़री मैच खेला था
पाकिस्तान के क्रिकेटर जावेद मियाँदाद का कहना है कि अच्छा खिलाड़ी हमेशा सीखता रहता है और ये सिलसिला कभी ख़त्म नहीं होता. सचिन में अच्छी बात ये है कि कामयाबी के शिखर पर पहुँचने के बाद भी वह सीखने की कोशिश कर रहे हैं.
उनसे बीबीसी संवाददाता लक्ष्मी अरुमुगम् की बातचीत के अंश:-
सचिन तेंदुलकर ने वनडे मुक़ाबलों में 17 हज़ार रन पूरे कर लिए हैं. आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या है.
सचिन की इस कामयाबी को देखकर बहुत ही ख़ुशी हुई थी. बहुत ही अच्छी बात है कि इतने बड़े खिलाड़ी ने एक नया कीर्तिमान क़ायम किया.
उनकी ये सफलता भारत के लिए भी एक सम्मान है. जब भी क्रिकेट में भारत की बात होती है तो सुनील गावस्कर और कपिल देव की बात होती है. सचिन के इस नए कीर्तिमान से क्रिकेट की दुनिया में भारत का मुक़ाम और ऊँचा हुआ है.
वनडे क्रिकेट में सचिन के इस कीर्तिमान के पीछे सबसे अधिक रन के साथ श्रीलंका के खिलाड़ी सनत जयसूर्या हैं. लेकिन अंतर काफ़ी बड़ा है. आपकी नज़र में कौन खिलाड़ी इस रिकॉर्ड को तोड़ सकता है?
ये बात सही है कि रिकॉर्ड हमेशा बनते हैं टूटने के लिए, लेकिन इस समय कुछ भी कहना मुश्किल है, क्योंकि सचिन अभी खेल रहे हैं और ये तय है कि उनके रन 17 हज़ार से और आगे जाएँगे.
क्रिकेट में रिटायर्डमेंट जैसी बात नहीं होती. खेलते रहने के लिए एक ही शर्त है अच्छा प्रदर्शन. मैं समझता हूँ कि जबतक कोई खिलाड़ी अच्छा खेल रहा है और फ़िट है तो संन्यास की बात नहीं होनी चाहिए.
जावेद मियाँदाद
किसी के रिकॉर्ड को तोड़ने की बात तो तब होगी जब लक्ष्य साफ़ हों. इसलिए पहले हमें इंतज़ार करना चाहिए कि सचिन कब संन्यास लेते हैं और कितने का लक्ष्य छोड़ जाते हैं. आजकल जिस तेज़ी से क्रिकेट खेला जा रहा है उस आधार पर कहा जा सकता है कि कुछ भी हो सकता है, लेकिन रिकॉर्ड तोड़ने के लिए किसी भी खिलाड़ी को 17 से 18 सालों का करियर भी चाहिए.
सचिन की पुरानी यादें, विशेषकर जब उन्होंने 16 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय मंच पर बल्ला थामा था.
जी मुझे आज भी याद है, जब उन्होंने अपने पहले वनडे मैच में पचास रन बनाए थे. उनकी तकनीक काफ़ी अच्छी थी. देखने वालों ने उसी समय समझ लिया था कि वो आगे जाएँगे. मैंने भी जब अपनी पहली पारी खेली थी तो शतक जड़े थे. तब हर आदमी ने मेरी तारीफ़ की और बाद में वो चीज़ें हमें साबित करनी पड़ी.
देखिए जब कोई पहली बार अच्छी पारी खेलता है तो सभी तारीफ़ करते हैं, लेकिन बाद में उसे साबित करना होता है. सचिन ने साबित कर दिखाया है कि वो कितने बड़े खिलाड़ी हैं और उनका रिकॉर्ड ये सब बोल रहा है.
आपने अपना आख़िरी मैच 1999 के विश्व कप में खेला था, उसमें सचिन आपके विरुद्ध में थे. क्या यादें हैं उसकी?
मेरे लिए आख़री मैच था लेकिन हम भारत से हार गए थे. मेरी ये ही कोशिश थी कि जितना बेहतर प्रदर्शन हो सके करूँ. लेकिन सबसे अहम बात ये है कि मैच की समाप्ति के बाद दोनों टीम के सभी सदस्य मेरे पास आए और उस दौरान सचिन मुझसे क्रिकेट के बारे में पूछ रहे थे.
मैंने कहा कि आपने अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन उनका जवाब था आप गुरू हो. यहाँ सबसे बड़ी बात ये है कि अच्छा खिलाड़ी हमेशा सीखता रहता है जो सिलसिला कभी ख़त्म नहीं होता. सचिन में अच्छी बात ये थी कि एक कामयाब खिलाड़ी होने के बावजूद भी वो मुझसे सीखने की कोशिश कर रहे थे.
आपकी नज़र में सचिन की एक बेहतरीन पारी, कुछ यादें हैं?

जावेद मियाँदाद के मुताबिक़ सचिन एक अच्छे खिलाड़ी के साथ बेहतरीन इंसान भी हैं
सचिन ने इतनी बेहतरीन पारियाँ खेली हैं कि उनमें से एक को चुनना काफ़ी मुशकिल है. ये सचिन ही बता सकते हैं क्योंकि हर आदमी की राय अलग-अलग होती है. पाकिस्तान में फ़ैसलाबाद की उनकी पारी भी बेहतरीन रही है.
सचिन 20 सालों से खेल रहे हैं ऐसे में संन्यास की बात की जा सकती है, इस बारे आपका में क्या ख़्याल है.
क्रिकेट में रिटायरमेंट जैसी बात नहीं होती. खेलते रहने के लिए एक ही शर्त है अच्छा प्रदर्शन. मैं समझता हूँ कि जब तक कोई खिलाड़ी अच्छा खेल रहा है और फ़िट है तो संन्यास की बात नहीं होनी चाहिए. अब सचिन इसके बारे में ख़ुद ही फ़ैसला कर सकते हैं.
मेरी यही दुआ है कि वो आगे भी खेलते रहें.
मेरा ख़्याल है कि जीवन में किसी इंसान की इंसानियत का भी ज़िक्र होना चाहिए. सचिन एक क्रिकेटर के साथ एक अच्छे इंसान भी हैं. उनका स्वभाव विनम्र हैं.















