
तेंदुलकर चाहते हैं कि मैदान के अंपायरों की भूमिका सीमित की जाए
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट मैचों में अंपायरों की भूमिका सिर्फ़ एलबीडब्ल्यू तक सीमित करते हुए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल बढ़ाने की वकालत की है.
सचिन तेंदुलकर ने इंडिया टुडे को दिए एक साक्षात्कार में कहा, "अंपायरों के लिए नो-बॉल या कई अन्य चीज़ों का फ़ैसला करना मुश्किल होता है. नो बॉल या रन आउट जैसे फ़ैसलों के लिए लेज़र जैसी कोई व्यवस्था होनी चाहिए."
तेंदुलकर के अनुसार 'हॉट स्पॉट' जैसी प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल होना चाहिए जिसमें काफ़ी बारीक़ी से ये बताया जा सकता है कि गेंद बल्ले से लगी थी या नहीं.
उन्होंने कहा, "हम पहले ही संदिग्ध कैचों के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर रहे हैं. अब हॉट स्पॉट का इस्तेमाल बैट और पैड जैसे फ़ैसलों के लिए भी होना चाहिए जिससे मैदान में मौजूद अंपायर सिर्फ़ एलबीडब्ल्यू के फ़ैसले कर सकें."
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने अंपायरों के फ़ैसले की समीक्षा की प्रणाली ट्रायल के तौर पर लागू की है. इसके तहत मैदान में मौजूद अंपायरों के फ़ैसले की समीक्षा के लिए खिलाड़ी अपील कर सकते हैं.
टेलिविज़न से प्रभावित नहीं
हम पहले ही संदिग्ध कैचों के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर रहे हैं. अब हॉट स्पॉट का इस्तेमाल बैट और पैड जैसे फ़ैसलों के लिए भी होना चाहिए जिससे मैदान में मौजूद अंपायर सिर्फ़ एलबीडब्ल्यू के फ़ैसले कर सकें
सचिन तेंदुलकर
आईसीसी का मानना है कि खेल पर इससे सकारात्मक असर पड़ा है.
मगर तेंदुलकर उससे कोई ख़ास प्रभावित नहीं हैं क्योंकि उनके अनुसार एक अंपायर टेलीविज़न के रीप्ले के ज़रिए फ़ैसले देता है.
उनका कहना था कि टेलिविज़न पर कैमरे के अलग-अलग ऐंगल से वह संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि वे पूरी तरह सही फ़ैसला सुनिश्चित नहीं करते और यही वजह है कि पहली बार जब ये प्रणाली लागू की गई तो वे उससे ख़ास प्रभावित नहीं थे.
पिछले साल श्रीलंका के विरुद्ध भारत की शृंखला में इस तरीक़े का इस्तेमाल किया गया था.















