
रूस में क्रिकेट धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रहा है.
क्रिकेट का बुख़ार अब धीरे-धीरे दुनिया भर में फैलता जा रहा है और इसमें शामिल हो गया है रूस भी. वहां अब एक क्रिकेट लीग भी है जिसका नाम है रशिया युनाइटेड क्रिकेट लीग, आरयूसीएल और फिलहाल इसमें सात क्लब शामिल हैं.
शुरुआत
आरयूसीएल के अध्यक्ष भारतीय मूल के बिज़नेसमैन अश्विनी चोपड़ा हैं. उनका कहना है कि जब वो 1989 में रूस पढ़ने के लिए गए थे तब वहां किसी को क्रिकेट के बारे में नहीं पता था. उस समय कुछ भारतीय, पाकिस्तानी और श्रीलंकाई छात्र टेनिस की बॉल और लकड़ी के फट्टे से क्रिकेट खेलते थे.
जब मैं 1989 में रशिया पढ़ने के लिये गया था तब यहां किसी को क्रिकेट के बारे में नहीं पता था. उस समय कुछ भारतीय, पाकिस्तानी और श्रीलंकन छात्र टैनिस की बॉल और लकड़ी के फट्टे से क्रिकेट खेलते थे.
अश्विनी चोपड़ा, अध्यक्ष. आरयूसीएल
1995 में पाकिस्तानी छात्र टेप बॉल क्रिकेट लेकर आये जिसमें टैनिस बॉल पर टेप लगाकर क्रिकेट खेला जाता है. फिर रूस में ब्रितानी और ऑस्ट्रेलियाई दूतावासों की कोशिशों से क्रिकेट के किट भी खिलाड़ियों को उपलब्ध हुए.
स्वरुप
वर्ष 2000 में पहली बार एक मिनी टूर्नामेंट आयोजित किया गया जिसमें रुस में रह रहे भारतीय, ऑस्ट्रेलियाई, ब्रिटिश और वर्ल्ड टीम्स ने हिस्सा लिया. ये टूर्नामेंट वर्ल्ड इलेवन ने जीता और फिर 2001 में ये टीम्स क्ल्बस में परिवर्तित हो गई जो हर साल राष्ट्रीय चैंपियनशिप में हिस्सा लेते हैं.
आरयूसीएल में हर साल एक क्लब बढ़ता है. आरयूसीएल के ज्वाइंट सेक्रेटरी बॉबी सिंह ने बीबीसी को बताया कि इस लीग में तीस-तीस ओवर के मैच खेले जाते हैं. इसके अलावा ट्वेन्टी 20 ओवर्स का एक मिनी टूर्नामेंट भी खेला जाता है.
लेकिन रूस में अब भी क्रिकेट का सामान आसानी से नहीं मिलता. इस वजह से बॉल पाकिस्तान से और बाकी सामान भारत से मंगाया जाता है.

लोकप्रियता
इस साल चैंपियनशिप जीती है ओमेगा टीम ने. इस टीम के सुमित हूडा का कहना है कि क्रिकेट में रूसियों की दिलचस्पी बढ़ाने के लिये हर टीम में कम से कम एक रुसी खिलाड़ी का होना ज़रुरी किया गया है. इसके अलावा टीवी पर इस साल आईसीसी टी 20 वर्ल्ड और चैंपियन्स लीग के मैचस का भी प्रसारण हुआ जिसकी कमेंटरी रूसी भाषा में की गई.
क्रिकेट में रशियन्स की दिलचस्पी बढ़ाने के लिये हर टीम में कम से कम एक रुसी खिलाड़ी का होना ज़रुरी है.
सुमित हूडा, ओमेगा टीम
अश्विनी चोपड़ा कहते हैं, ‘हमने कुछ स्कूल्स में भी प्रेज़ेन्टेशन दिया है जिसमें कई रुसी छात्रों ने दिलचस्पी दिखाई. अगले महीने से हम चार चुने हुए स्कूलों में ट्रेनिंग कैंप लगाएंगे. अगर सब ठीक रहा तो अगले साल आरयूसीएल में केवल रूसी खिलाड़यों की दो जूनियर और एक सीनियर टीमें हिस्सा लेंगी.
भविष्य
चोपड़ा का सपना है कि रूस की अपनी नेशनल टीम हो. और इस दिशा में काम भी शुरु हो गया है. इसके लिये अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद से एफिलियेशन के लिये अर्ज़ी दी जा चुकी है. उन्हें उम्मीद है कि अगले साल तक रशिया आईसीसी का एफिलियेट सदस्य बन जायेगा.













