भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) एक अप्रत्याशित फ़ैसले में इंडियन क्रिकेट लीग (आईसीएल) के खिलाड़ियों पर लगा प्रतिबंध हटाने पर सहमत हो गया है.

बीसीसीआई आईसीएल को मान्यता नहीं देता
इसके लिए आईसीएल से जुड़े खिलाड़ियों को उससे अपने संबंध तोड़ने होंगे.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ बीसीसीआई के अध्यक्ष शशांक मनोहर ने बताया कि यह फ़ैसला तब लिया गया जब आईसीएल के कुछ खिलाड़ियों और सहायक कर्मचारियों ने बोर्ड सदस्यों से मिलकर आईसीएल से जुड़ने को अपनी भूल बताया.
खिलाड़ियों को आईसीएल छोड़ने के लिए 31 मई अंतिम तारीख़ तय की गई है.
स्वागत
मुंबई में हुई बीसीसीआई की कार्यसमिति की बैठक के बाद शशांक मनोहर ने संवाददाताओं से कहा, "हमने आईसीएल के खिलाड़ियों को माफ़ी देने और बीसीसीआई में उनकी वापसी का स्वागत करने का फ़ैसला किया है."
हमने आईसीएल के खिलाड़ियों को माफ़ी देने और बीसीसीआई में उनकी वापसी का स्वागत करने का फ़ैसला किया है
शशांक मनोहर, बीसीसीआई अध्यक्ष
उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों को सज़ा के तौर पर एक साल तक किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेलने के लिए नहीं भेजा जाएगा लेकिन वे घरेलू प्रतियोगिताओं में खेल सकते हैं.
आईसीएल के स्थापना मीडिया समूह ‘ज़ी ग्रुप’के मालिक सुभाष चंद्रा ने 2007 में वेस्टइंडीज़ में खेले गए एकदिवसीय मैचों के विश्वकप से भारत के बाहर होने के बाद की थी.
आईपीएल से कपिल देव जैसे भारतीय खिलाड़ी के अलावा ब्रायन लारा, इंज़माम-उल हक़, क्रिस हैरिस, अज़हर महमूद, इमरान फ़रहत, लांस क्लूज़नर और निकी बोए जैसे विदेशी खिलाड़ी जुड़े हुए हैं.
इनके अलावा दिनेश मोंगिया, जेपी यादव, दीप दासगुप्ता और रतिंदर सिंह सोढ़ी जैसे देसी खिलाड़ी भी इससे जुड़े हुए हैं.
आईसीएल की स्थापना के बाद बीसीसीआई ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) शुरु की थी.
बीसीसीआई ने आईसीएल को मान्यता नहीं दी और इसमें खेलने वाले खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगा दिया था.














