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सोमवार, 06 अक्तूबर, 2003 को 19:27 GMT तक के समाचार
कितनी तेज़ मुनाफ़ की गेंदें
मुनाफ़ गुजरात के भरूच ज़िले के एक ग्रामीण परिवार से हैं
मुनाफ़ गुजरात के भरूच ज़िले के एक ग्रामीण परिवार से हैं



कुछ दिन पहले की बात है जब पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान चेन्नई में कुछ नवयुवकों के साथ ऐसे ही हाथ आज़मा रहे थे.

वॉ कुछ युवाओं की गेंदों पर अपनी बल्लेबाज़ी के कौशल दिखा रहे थे.

मगर छह फ़ीट तीन इंच लंबे और छरहरे बदन वाले लड़के की गेंदों की गति ने उन्हें चक्कर में डाल दिया.

उन्होंने बल्ला परे रख सवाल दागा- कौन है ये लड़का. कितने मैच खेले हैं इसने.


हमारा जो तरीक़ा है उससे हमें लगता है कि बहुत जल्दी वह 145 से 150 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ़्तार से गेंदें फेंक सकते हैं

टीए शेखर
ये सवाल आज हर कोई जानना चाह रहा है कि आख़िर कौन है ये लड़का जिसे कोई ऑस्ट्रेलियाई तूफ़ान ब्रेट ली का जवाब बता रहा है तो कोई कह रहा है कि ये रावलपिंडी एक्सप्रेस शुएब अख़्तर को पीछे छोड़ देगा.

मुनाफ़ पटेल नाम है इस चमत्कारी लड़के का और ये गुजरात के भरूच ज़िले के गाँव इकहर के रहने वाले हैं.

20 साल के इस लड़के पर आज भारतीय क्रिकेट ने उम्मीद की निगाहें लगाई हुई हैं.

पूर्व क्रिकेटर टीए शेखर मुनाफ़ को ट्रेनिंग दे रहे हैं.

टीए शेखर कहते हैं, "ये लड़का वाक़ई प्रतिभाशाली है और मुझे लगता है कि ये काफ़ी आगे जाएगा."

मुनाफ़ की तेज़ी देखकर ही पिछले दिनों उसे भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने बंगलोर में भारतीय क्रिकेट टीम के कोचिंग कैंप में बुलाया जहाँ उन्होंने भारतीय बल्लेबाज़ों को अपनी तेज़ गेंदों पर अभ्यास करवाया.

मोरे की खोज

मुनाफ़ शायद गुमनाम ही रह जाते अगर पिछले साल पूर्व विकेटकीपर किरण मोरे की नज़र उन पर नहीं पड़ती.


देखिए चयनकर्ता होने के कारण मैं उनके खेल के बारे में तो कुछ नहीं कह सकता मगर ये सच है कि मैं ही उन्हें लेकर आया

किरण मोरे
किरण मोरे ने पिछले साल एक स्थानीय मैच में मुनाफ़ का खेल देखा और फिर उसे वडोदरा में अपनी क्रिकेट अकादमी में बुलाया.

मोरे अभी भारतीय क्रिकेट बोर्ड के चयनकर्ताओं में से एक हैं और साथ ही वड़ोदरा क्रिकेट बोर्ड के सचिव भी.

उन्होंने कहा, "देखिए चयनकर्ता होने के कारण मैं उनके खेल के बारे में तो कुछ नहीं कह सकता मगर ये सच है कि मैं ही उसे लेकर आया."

किरण मोरे ने मुनाफ़ में संभावना देखी और उसे लेकर चेन्नई स्थित एमआरएफ़ पेस फ़ाउंडेशन ले गए जहाँ से पिछले नौ साल में नौ गेंदबाज़ों ने भारतीय टीम में जगह बनाई है.

1987 में स्थापित इस फ़ाउंडेशन में पूरे देश से चुनकर आए कुछ युवा प्रतिभाओं को पूर्व ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ डेनिस लिली और टीए शेखर प्रशिक्षण देते हैं.

शेखर कहते है, "लिली को लगा कि इस लड़के में क्षमता है, बशर्ते इसकी फ़िटनेस पर ध्यान दिया जाए और उसे मानसिक तौर पर भी मज़बूत बनाया जाए."

प्रशिक्षण

टीए शेखर ने बताया कि मुनाफ़ जब उनके पास आया तो फ़ाउंडेशन के हिसाब से उसकी उम्र ज़्यादा होने के बावजूद उसकी प्रतिभा देख उन्होंने उसे प्रशिक्षण देने का फ़ैसला किया.


मुनाफ़ की फ़िटनेस पर काफ़ी ध्यान दिया जा रहा है
शेखर कहते हैं, "जब वह आए तो हमने पाया कि उसकी रनअप तिरछी है और बोलिंग एक्शन भी एक जैसी नहीं है".

मुनाफ़ को फिर कुछ बदलाव करने के सुझाव दिए गए और उसपर साल भार ध्यान दिया गया.

अब फ़ाउंडेशन उन्हें अगले साल मार्च में ऑस्ट्रेलिया भेजेगा जहाँ उसकी फ़िटनेस की व्यापक तौर पर जाँच की जाएगी.

शेखर ने बताया कि ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड के साथ एक समझौते के तहत फ़ाउंडेशन हर साल अपने लड़कों को ऑस्ट्रेलिया भेजता है.

उन्होंने कहा, "हम उन्हें अगस्त में ही भेजना चाहते थे मगर उनका पासपोर्ट ही नहीं बन सका था."

मुनाफ़ ने अभी तक प्रथम श्रेणी का कोई मैच नहीं खेला है और शेखर के अनुसार इस साल उनके वड़ोदरा या मुंबई की तरफ़ से खेलने की संभावना है.

तेज़ी

मुनाफ़ की गेंदें क्या वाकई ब्रेट ली और शुएब की गेंदों की धार कुंद कर सकती हैं? इसपर शेखर अभी कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते.


हमने उसकी गति नहीं मापी है मगर निश्चित तौर पर हमारे फ़ाउंडेशन में अबतक आए लड़कों में सबसे तेज़ है

टीए शेखर
शेखर कहते हैं, "हमने उसकी गति नहीं मापी है मगर निश्चित तौर पर हमारे फ़ाउंडेशन में अबतक आए लड़कों में सबसे तेज़ है."

शेखर ने बताया कि ज़हीर ख़ान जब फ़ाउंडेशन में थे तो उस वक़्त वह जितनी तेज़ गेंद फेंका करते थे अब उससे भी तेज़ गेंदें फेंक रहे हैं.

उन्होंनें कहा, "हमारा जो तरीक़ा है उससे हमें लगता है कि बहुत जल्दी वह 145 से 150 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ़्तार से गेंद फेंक सकते हैं."

फ़िलहाल मुनाफ़ को लेकर भारतीय क्रिकेट जगत में एक उत्सुकता बनी हुई है मगर भारतीय क्रिकेट का अतीत देखा जाए तो तेज़ गेंदबाज़ आते तो हैं मगर लंबे समय तक टिक नहीं पाते.

एमआरएफ़ पेस फ़ाउंडेशन से ही पिछले दस साल में भारतीय टीम तक नौ गेंदबाज़ पहुँचे.

ये हैं - जवागल श्रीनाथ, वेंकटेश प्रसाद, ज़हीर ख़ान, विवेक राज़दान, सुब्रतो बैनर्जी, देबाशीष मोहंती, डेविड जॉन्सन, टी कुमारन और टीनू योहानन.

इनमें श्रीनाथ और प्रसाद ही भारतीय टीम की गेंदबाज़ी की कमान लंबे समय तक संभाल सके हैं जबकि ज़हीर ख़ान अभी न्यूज़ीलैंड दौरे में भारत के प्रमुख गेंदबाज़ हैं.
 
 
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