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बुधवार, 30 जुलाई, 2003 को 14:49 GMT तक के समाचार बदतमीज़ी से दुखी गावसकर
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 गावसकर अपने समय के महान सलामी बल्लेबाज़ थे
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भारत के लिटिल मास्टर सुनील गावसकर ने क्रिकेट के मैदान पर बढ़ते अभद्र व्यवहार पर चिंता जताई है.
गावसकर ने क्रिकेट बोर्डों से अपील की है कि वे इस तरह की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए.
गावसकर मंगलवार को लॉर्ड्स में कॉलिन काउड्रे लेक्चर में हिस्सा ले रहे थे.
गावसकर तीसरे नंबर पर बोलने आए. गावसकर से पहले रिची बेनो और बैरी रिचर्ड्स ने भाषण दिए.
चौवन वर्षीय सुनील गावसकर ने 1987 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था. उनके नाम 34 शतकों का रिकॉर्ड दर्ज है.
चिंता
अपने भाषण में क्रिकेट के मैदान पर खिलाड़ियों के व्यवहार पर गावसकर ने चिंता जताई.
सेटेलाइट टीवी के दौर में हर टीम किसी भी क़ीमत पर जीतना चाहती है, लेकिन इन सबके बीच खेल भावना ख़त्म हो गई है | | | गावसकर ने कहा, "इस समय क्रिकेट का व्यवसायीकरण हो गया है. सेटेलाइट टीवी के दौर में हर टीम किसी भी क़ीमत पर जीतना चाहती है. लेकिन इन सबके बीच खेल भावना ख़त्म हो गई है. "
गावसकर ने कहा कि आजकल क्रिकेट मैच दिखाने के लिए टीवी राइट्स के लिए मारा-मारी होती है और पुरस्कार भी अच्छे-ख़ासे मिल रहे हैं, जो बुरा नहीं.
लेकिन इससे खेल का जज़्बा कहीं न कहीं बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
अब यह कम ही देखने को मिलता है कि गेंदबाज़ बल्लेबाज़ के अच्छे शॉट की प्रशंसा करते हैं या फिर बल्लेबाज़ अच्छी गेंदबाज़ी पर सिर हिलाकर उसके प्रति सम्मान प्रकट करता है.
गावसकर ने कहा, "आज क्रिकेट में आचार संहिता भी है, लेकिन मैदान पर गाली गलौज पर कम ही कार्रवाई हो पाती है. अगर ज़ल्द ही इस पर कार्रवाई न हुई, तो जिस खेल को हम जानते हैं, उसका नाम बदनाम हो जाएगा."
प्रभाव
गावसकर ने स्कूल स्तर पर भी क्रिकेट में बढ़ते गाली-गलौज पर खेद जताया.
दुर्भाग्य से टेस्ट क्रिकेट में मैदान पर जो अभद्र व्यवहार होते हैं, उसमें ज़्यादातर चैंपियन टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी हैं और इससे यही संकेत जाता है कि क्रिकेट जीतने का यही तरीक़ा है | | | उन्होंने कहा कि टीवी पर मैच देखकर स्कूल स्तर के खिलाड़ी भी वही अपना रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि जब उनके आदर्श खिलाड़ी भी यही कर रहे हैं, तो उन्हें इससे क्यों परहेज करना चाहिए.
गावसकर ने गाली-गलौज करने वाले खिलाड़ियों पर कार्रवाई की वकालत की और कहा कि खिलाड़ी अगर अंपायर को कुछ कह देते हैं, तो उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई हो जाती है, तो खिलाड़ी के एक दूसरे खिलाड़ी के प्रति अभद्र व्यवहार को क्यों जाने दिया जाता.
गावसकर ने माना कि टेस्ट क्रिकेट में गाली गलौज उतनी नहीं होती, जितना वनडे मैचों में.
गावसकर ने कहा, "लेकिन दुर्भाग्य से टेस्ट क्रिकेट में मैदान पर जो अभद्र व्यवहार होते हैं, उसमें ज़्यादातर चैंपियन टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी हैं और इससे यही संकेत जाता है कि क्रिकेट जीतने का यही तरीक़ा है."
गावसकर ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या 1948 की चैंपियन टीम ऑस्ट्रेलिया के कप्तान डॉन ब्रैडमैन ने यह तरीक़ा अपनाया, वे नहीं जानते.
लेकिन वे निश्चित रूप से यह कह सकते हैं कि 70 और 80 के दशक की क्लाइव लॉयड की चैंपियन वेस्टइंडीज़ की टीम ने मैदान पर विपक्षी खिलाड़ियों को एक भी शब्द नहीं कहा.
गावसकर ने कहा, "हम सभी इस खेल के पहरेदार हैं और अगर हम इसे बेहतर बनाएँगे, तो खेल में सदभावना बनी रहेगी." |
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