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रविवार, 13 अप्रैल, 2003 को 02:09 GMT तक के समाचार डोपिंग के जाल में खिलाड़ी
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 सुनीता रानी पर भी प्रतिबंधित दवाएँ लेने का आरोप लगा था
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मलय नीरव
"गले में पदक पड़ा और फिर उतार लिया गया." अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इक्का-दुक्का भारतीय खिलाड़ियों के साथ ऐसे मिलते-छिनते तमग़ों की कहानी, हम सभी ने सुनी है.
सीमा आन्तिल से लेकर सुनीता रानी तक. सुनीता रानी को तो पदक वापस भी मिला लेकिन कलंक के गहरे दाग़ सबसे ज़्यादा भारोत्तोलकों के माथे पर लगे.
बहरहाल, इस बार तो प्रतिबंधित दवाओं के सेवन या डोपिंग की कहानी का खुलासा राष्ट्रीय मंच पर ही हो रहा है.
 सतीश राय पर भी आरोप हैं | हैदराबाद में संपन्न हुए राष्ट्रीय खेलों में भाग लेने वाले 22 खिलाड़ी डोप टेस्ट में पकड़े गए.
भारतीय ओलंपिक संघ के महासचिव अपने ज़माने के जाने माने निशानेबाज़ रणधीर सिंह कहते हैं, "22 के 22 खिलाड़ियों के ए सैंपल टेस्ट हुए, एक का बी सैंपल भी हुआ और बी सैंपल भी पॉजिटिव मिला और बाकी के 21 के टेस्ट हो रहे हैं. "
"हमने फेडरेशन और खिलाड़ियों को 21 तारीख़ तक का समय दिया है कि वो रिपोर्ट वापस करें. 23 तारीख़ को चिकित्सा आयोग की बैठक होगी, जिसमें फैसला किया जाएगा."
इन 22 खिलाड़ियों के नाम किसी से छिपे नहीं हैं लेकिन अधिकारी अब भी उनके नाम बताने को तैयार नहीं हैं- शायद इसलिए कि खेल संघों, महासंघों और प्राधिकरणों को यह डर है कि गाज कहीं उनके ऊपर ही न गिर जाए.
नाम न बताने का कारण एमेच्योर एथलेटिक फेडरेशन ऑफ इंडिया के सचिव ललित भनोट अपने ढंग से बताते हैं
ललित कहते हैं, "एक विधि है, एक प्रक्रिया है, जिसके अनुसार काम करना पड़ता है और जब तक हम किसी का पूरा केस फ़ाइनल न कर दें, उसका दोष साबित न कर दें, तो उससे पहले उसका नाम बाहर देना या सार्वजनिक करना, इस प्रक्रिया का उल्लंघन होगा."
लेकिन जिस खिलाड़ी ने प्रतिबंधित दवा ली, उसके कोच भी उसकी इस हरकत से बेख़बर हैं.
'खिलाड़ी ज़िम्मेदार'
सीमा आन्तिल के कोच रह चुके जसवंत सिंह का कहना है कि इसमें किसी कोच की कोई भूमिका नहीं हो सकती, यह ख़ुद एथलीटों पर निर्भर करता है. कोई कोच अपने एथलीट को नहीं कहता कि आप ड्रग लो.
कोच और खेल अधिकारी तो यह भी कह रहे हैं कि खिलाड़ियों को भी नहीं पता कि क्या खाएँ, क्या न खाएँ.
रणधीर सिंह ने कहा, "इनमें कोई दम नहीं है. ये सब किस्से कहानियाँ हैं. खिलाड़ी सब जानते हैं कि कौन सी दवा खानी है. वे वही दवा खा रहे हैं, जिनसे मदद मिलती है."
राष्ट्रीय खेलों में एक और नई बात देखने को मिली, वो यह कि पदक पाने वालों की सबसे लंबी कतार आंध्र प्रदेश के खिलाड़ियों की थी और कहा जा रहा है कि डोप टेस्ट में सबसे बड़ी संख्या में पकड़े गए खिलाड़ी भी आंध्र प्रदेश के ही हैं.
खिलाड़ी सब जानते हैं कि कौन सी दवा खानी है. वे वही दवा खा रहे हैं, जिनसे मदद मिलती है. | | जसवंत सिंह, पूर्व एथलेटिक्स कोच | जसवंत सिंह का कहना है कि आंध्र प्रदेश ने एथलीटों को खरीदा है. तीन-तीन लाख रुपए गोल्ड की घोषणा करके बाहर से खिलाड़ियों को बुलाए. दिल्ली की एक तैराक ने तो आंध्र प्रदेश की ओर से पदक जीता.
उन्होंने कहा कि पैसे के लोभ में खिलाड़ी डोप के जाल में फँसे हैं.
लेकिन ललित भनोट का तर्क दूसरा है. उन्होंने कहा, "अगर सबसे ज़्यादा पदक आंध्र प्रदेश ने जीते हैं तो यह स्वभाविक है कि ज़्यादा खिलाड़ी आंध्र प्रदेश के ही होंगे. बाक़ी लालच तो रहता है, प्रलोभन तो है ही"
कुछ ख़बरें ऐसी भी आती रही हैं कि स्टेडियम के आसपास इस्तेमाल किए गए खाली सीरिंजों के ढेर मिले हैं. ललित भनोट का कहना है कि इससे डोपिंग का आरोप साबित नहीं होता.
बहरहाल इस पूरे प्रकरण में अधिकारियों का रवैया अब भी वही है यानि यह दावे करना कि जो पकड़ में आएगा उसे बख्शा नहीं जाएगा. |
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