तस्वीरों में-  पानी के लिए मारामारी
पानी के लिए मारामारी
 
किसानों का आरोप है की यहाँ वैसे ही जलस्तर कम था और इस पर वर्ष 1999 में कोका कोला के बॉटलिंग संयंत्र के आने के बाद उनकी मुसीबतें बढ़ गई है. जिसके पास पैसे हैं वो तो बोरवेल खुदवा सकता है पर बाकी लोग फसल उगाना ही नही चाहते क्योंकि लागत जितनी है उतनी कमाई नहीं. पर फिर भी चिड़ियों के लिए पानी का इंतजाम अब भी किया जाता है.
 
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