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![]() सलाखों में साध्वी एक हिंदूत्ववादी संगठन से जुड़ी साध्वी और सेना के एक अधिकारी की गिरफ़्तारी के बाद चरमपंथ पर भारत में एक नई तरह की बहस शुरू हुई.
महाराष्ट्र पुलिस की आतंकवाद निरोधक शाखा (एटीएस) ने मालेगाँव में हुए बम विस्फोट के सिलसिले में भारतीय सेना के लेफ़्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित और हिंदूत्ववादी संगठनों से जुड़ी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत अब तक दस लोगों को गिरफ़्तार किया. 29 सितंबर, 2008 में मालेगाँव में हुए धमाके में पाँच लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हुए थे. इसके बाद हुई जाँच में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सबसे पहले गिरफ़्तार किया गया था. उसके बाद सेना के अधिकारी भी जाँच के दायरे में आए. एटीएस ने अब तक इन लोगों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल नहीं की है लेकिन अदालत में वह कई बार कह चुकी है कि ये लोग मालेगाँव में हुए धमाके में शामिल थे. साध्वी के परिवार वाले उन्हें बेकसूर मानते हैं, उनका मानना है कि एक धर्म की बदनाम करने के लिए उन्हें फंसाया जा रहा है. 'हिंदू चरमपंथी', ये दो शब्द 29 सिंतबर को मालेगाँव में हुए बम धमाके से पहले इस अंदाज़ में इस्तेमाल नहीं किए जाते थे. लेकिन 10 हिंदुओं की गिरफ़्तारी के बाद ऐसा लगता है कि इन शब्दों का इस्तेमाल नहीं रुकेगा. ये शब्द सुर्खियों से ज़्यादा गहरे हैं या नहीं, इसका पता अदालत के फ़ैसले के बाद ही चल पाएगा. |
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