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![]() विश्वासमत की क़ीमत भारत में परमाणु मुद्दे पर वाम मोर्चे की समर्थन वापसी के बाद जुलाई, 2008 में लोक सभा में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह विश्वास प्रस्ताव लाए और उस पर ज़ोर-शोर से बहस हुई.
भारतीय संसद का ये 12वाँ विश्वास मत प्रस्ताव था और इसका सामना करनेवाले मनमोहन सिंह देश के छठे प्रधानमंत्री थे. हालांकि मनमोहन सरकार ने 19 मतों से ये विश्वासमत जीत लिया था. मनमोहन सिंह के नेतृत्ववाली यूपीए सरकार को भारत अमरीका परमाणु समझौते पर पैदा हुए राजनीतिक गतिरोध के बाद यह विश्वास मत हासिल करना पड़ा था. ये विश्वास प्रस्ताव कई अन्य कारणों से याद किया जाएगा. इस दौरान नए राजनीतिक समीकरण सामने आए, बहुजन समाज पार्टी जहाँ वामपंथियों के साथ खड़ी दिखाई दी, वहीं समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया. विश्वासमत के दौरान भाजपा के तीनों सांसदों ने लोकसभा में एक करोड़ रुपए के नोटों की गड्डियां लहरा कर सनसनी फैला दी. तीनों सांसदों ने आरोप लगाया था कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस नेताओं ने विश्वास मत में हिस्सा न लेने के बदले रुपए देने की पेशकश की थी. जबकि इन नेताओं ने आरोपों से इनकार किया. भाजपा का कहना था कि तीनों सांसदों को विश्वासमत में हिस्सा न लेने के लिए नौ करोड़ रुपए की राशि देने की पेशकश की गई थी और एडवांस के रूप में एक-एक करोड़ रुपये दिए गए थे. दिलचस्प तथ्य ये था कि ये पूरा हंगामा लोक सभा टीवी चैनल पर लाइव चल रहा था. इसके कारण संसद की कार्यवाही कई बार बाधित हुई और फिर लोकसभा अध्यक्ष ने इस मामले की जाँच का आश्वासन दिया. इसकी जाँच के लिए समिति भी गठित की गई लेकिन नतीजा वही रहा ढाक के तीन पात. |
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