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![]() नैनो का इंतज़ार वर्ष 2008 की शुरुआत में ही टाटा की चिर प्रतीक्षित 'लखटकिया' कार लोगों के सामने आई. ख़ुद रतन टाटा ने दिल्ली के प्रगति मैदान में सैंकड़ों देसी-विदेशी पत्रकारों के समक्ष इसे लॉंच किया.
दुनिया भर में इस कार पर चर्चा हुई. आख़िर तिपहिया ऑटो से भी सस्ते इस कार का इंतज़ार लाखों लोगों को था. हालाँकि इसकी सही क़ीमत एक लाख रूपए नहीं बल्कि एक लाख तीस हज़ार लगाई गई है. नैनो के दर्शन को उमड़ी भीड़ गुजरात में बनेगी नैनो लेकिन राजनीति ने ऐसा गुल खिलाया कि ये अब तक जनता के बीच नहीं पहुँच सकी है. नैनो कार फैक्ट्री पश्चिम बंगाल के सिंगुर में बनाई जा रही थी लेकिन तृणमूल कांग्रेस की अगुआई में हुए हिंसक आंदोलन के आगे कंपनी ने घुटने टेक दिए. आख़िरकार अक्तूबर में रतन टाटा ने इस परियोजना को गुजरात स्थानांतरित करने का फ़ैसला किया. अब उम्मीद की जा रही है कि नैनो की बुकिंग वर्ष 2009 में किसी समय शुरु होगी. |
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