भारतीय अर्थव्यवस्था
 
 
 
 
 
 
पैकेज का सहारा
 
 
 
 
भारतीय अर्थव्यवस्था - 2008

पैकेज का सहारा

 

भारत सरकार ने वैश्विक आर्थिक संकट से पैदा स्थिति के मद्देनजर देश में आर्थिक गतिविधियों को तेज़ करने के लिए लगभग 20,000 करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की है.

सरकार ने आधारभूत ढांचे से जुड़े उद्योंगों से लेकर निर्यातकों और आवास सेक्टर से जुडे लोगों को कई सुविधाएँ देने की घोषणा की है.

मांग को बढ़ाने के लिए टैक्स में कटौती की गई है और बुनियादी ढांचे की अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए अतिरिक्त धन आवंटन करने का फ़ैसला किया है.

विश्वास बहाली

सरकार की तरफ़ से दिसंबर के शुरु में जारी बयान के अनुसार इस राहत पैकेज की प्राथमिकता आम लोगों का वित्तीय व्यवस्था की स्थिरता और बैंक में जमा राशियों की सुरक्षा के बारे में विश्वास बहाल करना है.

आर्थिक मंदी के गहराते संकट से निपटने के लिए भारत सरकार ने पिछले कुछ दिनों में कई क़दम उठाए हैं. ये क़दम ऐसे समय पर उठाया गया है जब देश की अर्थव्यवस्था में नक़दी संकट देखा जा रहा है.

सरकार ने मूल्य संवर्धित कर या वैट में चार प्रतिशत की कमी की है तो ऐड वेलोरम रेट में भी कटौती की गई है.

कपड़ा क्षेत्र के लिए अतिरिक्त 1,400 करोड़ रुपए दिए हैं. जबकि निर्यात को बढ़ावा देने लिए अनेक क़दम उठाते हुए केंद्र ने निर्यात प्रोत्साहन के लिए 350 करोड़ रुपए अतिरिक्त कोष की घोषणा की है.

तेज़ी से घटते निर्यात को सहारा देने के लिए भी बड़े क़दम उठाए गए हैं. सरकार ने टर्मिनल आबकारी कर की वापसी के लिए 1100 करोड़ रुपयों का प्रावधान किया है.

सेनवेट में कमी की गई है. इस वित्त वर्ष के बचे हुए समय के लिए सरकार ने सेनवेट में चार फीसदी तक की कमी सभी उत्पादों के लिए की है. ये कमी पेट्रोलियम उत्पादों पर नहीं लागू होंगी क्योंकि इन उत्पादों पर सेनवेट पहले से ही चार प्रतिशत से कम है.

मंदी की चपेट में जा रहे निर्यात क्षेत्र के लिए भी कई घोषणाएं की गई हैं. शनिवार को ही भारतीय रिज़र्व बैंक ने कई कदम उठाए थी ताकि बैंक लोगों को ज़्यादा कर्ज़ उपलब्ध करा सकें.

दिल्ली में योजना आयोग के उपाध्यक्ष मॉन्टेक सिंह अहलूवालिया का कहना था कि टैक्स की कटौती से आम लोगों के पास पैसा बचेगा और इससे आर्थिक स्थिति बेहतर होगी.
 
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