एड्स: क्यों और कैसे
 
 
संक्रमण
 
 
 
 
 
एचआईवी का संक्रमण

 

एचआईवी का संक्रमण
एचआईवी उस संक्रमित व्यक्ति के ख़ून, यौन द्रव्यों और स्तन के दूध में मौजूद होता है. फिर जब ये संक्रमण दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आता है तो उस व्यक्ति तक पहुँच जाता है.

ऐसे हो सकता है एड्स

 
-संक्रमित व्यक्ति से असुरक्षित यौन संबंधों के ज़रिए
-संक्रमित व्यक्ति की इस्तेमाल की गई सुई के इस्तेमाल से
-संक्रमित ख़ून चढ़ाए जाने से
-शरीर में किसी कटी हुई जगह पर संक्रमित द्रव्य के छूने से
-एचआईवी संक्रमित महिला की संतान गर्भ और जन्म के समय या फिर स्तनपान के ज़रिए उस रोग का शिकार हो सकती है.

एचआईवी प्रभावित व्यक्ति की लार में भी होता है मगर इतना नहीं होता कि उससे संक्रमण फैल जाए. एक बार जब संक्रमित द्रव्य सूख जाए तो उससे संक्रमण फैलने का डर नहीं रहता है.
एचआईवी से बचने का सबसे अच्छा तरीक़ा ये है कि प्रभावित व्यक्ति से यौन संबंध न बनाए जाएँ या फिर लैटेक्स कॉन्डम का इस्तेमाल किया जाए.एचआईवी के आकार के अंश लैटेक्स कॉन्डम मे पार नहीं हो सकते. अगर इसका इस्तेमाल ठीक ढंग से किया जाए तो इससे संक्रमण से काफ़ी हद तक बचा जा सकता है हालाँकि आत्म संयम के अलावा और कोई भी तरीक़ा शत प्रतिशत सुरक्षित नहीं है.
इसी तरह संक्रमित सुइयों के इस्तेमाल से बचकर एचआईवी से भी बचा जा सकता है.

एचआईवी के बारे में भ्रांतियाँ
एचआईवी नहीं होता-

 
-हवा से, खाँसी से या छींक से
-चुंबन से, छूने से या हाथ मिलाने से
-एक ही बर्तन के इस्तेमाल से
-एक ही शौचालय के इस्तेमाल से
-मच्छरों के काटने से
-एक साथ तैरने से
-एचआईवी संक्रमित व्यक्ति का बनाया खाना खाने से
 
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