एड्स: क्यों और कैसे
 
एचआईवी वायरस
 
 
 
 
 
 
एचआईवी वायरस

 

एचआईवी वायरस
एचआईवी यानी ह्यूमन इम्यूनोडेफ़िसिएन्सी वायरस मुख्य रूप से प्रतिरक्षा प्रणाली को निशाना बनाता है और यही वो प्रणाली है जो सामान्य तौर पर शरीर को बाहरी संक्रमणों से बचाती है.
ये वायरस श्वेत रक्त कणिकाओं या डब्ल्यूबीसी की एक ख़ास तरह की सीडीफ़ोरप्लस कोशिकाओं को निशाना बनाता है. ये उस कोशिका पर नियंत्रण कर लेता है और उसके बाद उस कोशिका के डीएनए में अपना जीन डाल देता है. इस तरह ये वायरस और वायरसों को बनाने में उस कोशिका का इस्तेमाल करता है और ये प्रक्रिया चल पड़ती है.
इसके बाद वह सीडीफ़ोरप्लस कोशिका ख़त्म हो जाती है हालाँकि वैज्ञानिक आज तक नहीं जान पाए हैं कि ऐसा कैसे होता है.
जैसे-जैसे सीडीफ़ोरप्लस कोशिकाएँ ख़त्म होती जाती हैं रोगों से लड़ने की शरीर की क्षमता भी ख़त्म होती जाती है. ये तब तक होता है जब तक स्थिति नियंत्रण से बाहर नहीं हो जाती और फिर रोगी को बता दिया जाता है कि उसे एड्स हो चुका है.
एचआईवी एक ख़ास तरह का वायरस है जिसे रेट्रोवायरस भी कहते हैं. हालाँकि ये वायरस अन्य वायरसों से साधारण तो होता है मगर इसे पछाड़ना आसान नहीं होता. ये जिस भी कोशिका को निशाना बनाते हैं उसके डीएनए में अपने जीन्स छोड़ देते हैं और इस तरह उस कोशिका से जो भी नई कोशिकाएँ बनती हैं वे उसके जीन्स ले जाती हैं.
रेट्रोवायरस भी उन कोशिकाओं में अपने जीन्स छोड़ देते हैं. इसके साथ ही एचआईवी काफ़ी तेज़ी से बढ़ने लगता है. इसी तरह एचआईवी वायरस ठीक उसी तरह की कोशिकाओं में छिपे होते हैं जो स्वस्थ मानव कोशिकाओं जैसी हों. इसे देखते हुए प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए स्वस्थ कोशिकाओं और वायरस वाली कोशिकाओं को पहचानना कठिन हो जाता है.

एचआईवी कैसे बढ़ता है

वायरस का जुड़ना-

 
वायरस के अंश से बाहर की ओर निकले प्रोटीन का हिस्सा जिस कोशिका को निशाना बना रहा हो उसके सीडीफ़ोर प्रोटीन से जुड़ जाता है.
जीन की प्रतिलिपि-

 
एचआईवी वायरस अपने ही आनुवांशिक पदार्थों की प्रतिलिपि या कॉपी बना लेता है.
वायरस का बढ़ना-

 
वायरस अपने जीन्स की ये कॉपी उस कोशिका के डीएनए में डाल देता है. जब वह कोशिका प्रजनन शुरू करती है तो वह एचआईवी वायरस के अंश भी उसी के साथ बनाती है.
मुक्त करना-

 
फिर वायरस के अंश कोशिका की दीवार के निकट इकट्ठे होने लगते हैं और वे वहाँ पर एक कली की शक़्ल अख़्तियार कर लेते हैं जो कि टूट कर एचआईवी का नया अंश बना लेती है.
 
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