खेल जगत: 2008
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
धोनी इफ़ेक्ट
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
धोनी इफ़ेक्ट
धोनी इफ़ेक्ट

महेंद्र सिंह धोनी को पिछले साल जब ट्वेन्टी 20 विश्व कप के लिए भारतीय टीम की कप्तानी सौंपी गई थी तो किसी ने यह सोचा नहीं था कि धोनी बेहतरीन कप्तान साबित होने जा रहे हैं.

धोनी भारत के सर्वश्रेष्ठ कप्तान हैं या नहीं- इस पर बहस साल भर चलती रही. अब तो टेस्ट टीम की कमान भी उनके हाथ में हैं. कई पूर्व क्रिकेटरों ने कहा कि अभी धोनी को सर्वश्रेष्ठ कप्तान बनने के लिए बहुत कुछ साबित करना होगा, तो कई क्रिकेटरों ने धोनी को सर्वश्रेष्ठ करार दे भी दिया.



टेस्ट क्रिकेट में धोनी की कप्तानी भी ख़ूब जम रही है. ट्वेन्टी 20 और एक दिवसीय मैचों में तो वे अपने को साबित कर ही चुके हैं. कप्तान के रूप में मैदान पर उनका संयम देखने लायक़ होता है.

लेकिन संयम के साथ-साथ आक्रामक भी हैं धोनी. धोनी की क्रिकेट की समझ भी मैदान पर नज़र आती है. खिलाड़ियों पर उनका भरोसा और नए खिलाड़ियों को मौक़ा देने की प्राथमिकता के कारण भारत को कई बेहतरीन प्रदर्शन देखने को मिले हैं.

ट्वेन्टी-20 विश्व कप के फ़ाइनल मैच में जोंगिदर शर्मा को अहम मौक़े पर गेंदबाज़ी सौंपना. सुरेश रैना जैसे खिलाड़ी को फिर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना- धोनी ने कई बार युवा खिलाड़ियों को पहचानने में और उन्हें मौक़ा देने में अपनी सूझ-बूझ साबित की है.

धोनी की कप्तानी में भारत को उस समय एक और बड़ी सफलता मिली जब ऑस्ट्रेलिया में त्रिकोणीय एक दिवसीय प्रतियोगिता सीबी सिरीज़ में भारत ने मेज़बान देश को बुरी तरह परास्त किया.

बेस्ट ऑफ़ थ्री फ़ाइनल में तीसरे फ़ाइनल की आवश्यकता ही नहीं पड़ी. भारत ने दूसरे फ़ाइनल में ही ऑस्ट्रेलिया को हराकर प्रतियोगिता जीत ली. पहली बार भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसकी ज़मीन पर वनडे प्रतियोगिता में मात दी.



कप्तान के रूप में धोनी की जम कर तारीफ़ हुई. लेकिन उनकी कप्तानी में भारतीय टीम एशिया कप हार गई. फ़ाइनल में श्रीलंका के हाथों भारत को शिकस्त मिली.

भारत की टीम टेस्ट खेलने श्रीलंका गई, तो धोनी ने आराम करने का फ़ैसला किया. उनका कहना था कि लगातार क्रिकेट खेलने से वे थक गए हैं.

उनके फ़ैसले की आलोचना तो हुई लेकिन ज़्यादातर लोग ख़ुलकर धोनी के समर्थन में आए. भारत टेस्ट सिरीज़ हार गया लेकिन वनडे में कप्तानी करने पहुँचे धोनी ने श्रीलंका को श्रीलंका में हराने का गौरव हासिल किया.

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ चार टेस्ट मैचों की सिरीज़ में दो टेस्ट में धोनी ने कप्तानी की और दोनों में भारत को जीत मिली. धोनी ने अपने को हर चीज़ में साबित किया है, लेकिन विदेशी धरती पर उन्हें इसी तरह की सफलता हासिल करके अपने को और साबित करना है.
 
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