खेल जगत: 2008
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
इंडियन प्रीमियर लीग
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
इंडियन प्रीमियर लीग
इंडियन प्रीमियर लीग

क्रिकेट की दुनिया में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की शुरुआत एक अहम मोड़ थी. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने धूम-धड़ाके से लीग की शुरुआत की. जिस ट्वेन्टी-20 मुक़ाबले का भारतीय बोर्ड शुरू से ही विरोध करता था, उसकी पहले तो पैरवी और फिर आईपीएल जैसी बड़ी प्रतियोगिता का आयोजन ये साबित करने के लिए काफ़ी था कि अब ट्वेन्टी-20 मुक़ाबलों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.

इंडियन प्रीमियर लीग पर बीबीसी हिंदी विशेष

ट्वेन्टी-20 के प्रति भारतीय क्रिकेट बोर्ड का प्रेम उस समय जगा जब भारत ने ट्वेन्टी-20 विश्व कप में ख़िताबी जीत हासिल की. फिर तो क्रिकेट की आर्थिक महाशक्ति इसका अर्थशास्त्र भी समझने लगी. ज़ी-समूह के इंडियन क्रिकेट लीग (आईसीएल) ने बीसीसीआई को वो मौक़ा जल्द ही दे दिया. अगर आईसीएल नहीं होती, तो शायद बोर्ड आईपीएल लाने से पहले कुछ सोचता, योजना बनाता, सलाह-मशविरा करता.



लेकिन बोर्ड के आका ये समझ गए थे कि अगर देर हुई तो ट्वेन्टी-20 क्रिकेट की लोकप्रियता कहीं आईसीएल को क्रिकेट की दुनिया में स्थापित ही न कर दे, जिस पर बोर्ड ने पाबंदी लगा रखी है.

तो फिर फटाफट क्रिकेट के लिए आयोजन भी फटाफट हुआ. युद्धस्तर पर काम हुआ. टीमें बनीं, टीमों की बोली लगी और फिर खिलाड़ी भी नीलाम हुए. आईपीएल के बाज़ार में दुनिया के शीर्ष खिलाड़ी बिकने को तैयार थे. क्या रिकी पोंटिंग, क्या शोएब मलिक, क्या मैथ्यू हेडन और क्या एंड्रयू साइमंड्स.

इन सब खिलाड़ियों की बोली लगी, लेकिन बाज़ी मारी भारतीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने. चेन्नई सुपरकिंग्स ने धोनी को सबसे ज़्यादा छह करोड़ में ख़रीदा. दूसरे स्थान पर रहे विवादित एंड्रयू साइमंड्स. आईपीएल शुरू होने से पहले भज्जी विवाद के कारण भारत में विलेन बन चुके साइमंड्स भी अभिभूत हुए. भारत में क्रिकेट के भविष्य पर उन्होंने भाषण भी दिया और तमाम ख़तरों को पीछे छोड़ भारत आए और अपना बल्ला भी चलाया.

टीम ख़रीदने वालों में भी सितारों का ताँता लगा. शाहरुख़ को कोलकाता की टीम मिली तो प्रीति ज़िंटा ने पंजाब की टीम को ख़रीदा. मुकेश अंबानी के हिस्से में मुंबई की टीम आई, तो विजय माल्या ने बंगलौर की टीम पर दाँव लगाया.

टीम और खिलाड़ियों की ख़रीदारी के बाद सारा ध्यान आयोजन पर टिका था. मीडिया, मार्केटिंग, टीवी राइट्स, प्रायोजक और विज्ञापन. लगा जैसे भारत में क्रिकेट की आँधी चलने लगी हो. आईपीएल शुरू हुआ. मैच हुए और खिलाड़ियों के विस्फोटक प्रदर्शन भी हुए.



चीयर लीडर्स को लेकर विवाद हुआ, तो श्रीसंत को थप्पड़ मारकर भज्जी ने अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली. विजय माल्या ने बीच प्रतियोगिता से अपने टीम के सीईओ को निकाल दिया. सचिन भी ट्वेन्टी-20 के मैदान पर उतरे, तो धोनी ने भी ख़ूब पसीना बहाया. दर्शकों का प्यार आईपीएल को कितना मिला, इस पर बहस हो सकती है. लेकिन प्रतियोगिता के बाद आईपीएल के चेयरमैन ने दावा किया कि कुल मिलाकर बोर्ड और टीमों के मालिकों को ख़ूब लाभ हुआ और खिलाड़ी तो पहले से ही मालामाल थे.

हाँ, आईपीएल का ख़िताब जीता सबसे सस्ती टीम राजस्थान रॉयल्स ने. राजस्थान रॉयल्स ने फ़ाइनल में धोनी की चेन्नई सुपर किंग्स को मात दी.

लेकिन आईपीएल की धूम के बीच एक ऐसा तबका भी था जो इसमें असली क्रिकेट यानी टेस्ट क्रिकेट का नुक़सान देख रहा था. मीडिया में इस पर भी बहस हुई. लेकिन पैसे की आँधी में ऐसी बहस का क्या कोई मतलब था. शायद बीसीसीआई के लिए तो नहीं. बीसीसीआई ने एक क़दम आगे बढ़कर यूरोप में क्लब फ़ुटबॉल की प्रतियोगिता चैम्पियंस लीग की तर्ज पर ट्वेन्टी-20 चैम्पियंस लीग की पहल की और अन्य देशों की ट्वेन्टी-20 प्रतियोगिता की चैम्पियन टीमों को दावत दी. मुंबई हमलों के कारण प्रतियोगिता स्थगित हो गई है.

वर्ष 2009 में आईपीएल की असली परीक्षा होगी और इससे यह भी पता चलेगा कि ट्वेन्टी-20 की आँधी में टेस्ट और वनडे कितने प्रभावित होते हैं.
 
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