अल क़ायदा के बड़े नेता
 
 
 
अबू मुसाब अल ज़रकावी
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

अबू मुसाब अल ज़रकावी

 

अबू मुसाब अल ज़रकावी

अबू मुसाब अल ज़रकावी को इराक़ में अमरीकी सेना के ख़िलाफ़ लड़ने वाले अल क़ायदा छापामारों का सबसे बड़ा नेता माना जाता है.

जॉर्डन के अल ज़रका शहर से ताल्लुक रहने वाले अबू मुसाब को अहमद अल ख़लील के नाम से भी जाना जाता है.

ज़रकावी को अमरीकी सैनिकों ने इराक़ में 'मोस्ट वांटेड' की सूची में सबसे ऊपर रखा है.

फ़रवरी 2004 में अमरीकी सेना ने एक पत्र जारी किया था, कहा गया था कि यह पत्र ज़रकावी ने लिखा है जिसमें अल क़ायदा से इराक़ में सांप्रदायिक तनाव फैलाने के लिए मदद माँगी गई थी.

ज़रकावी को कई आत्मघाती बम हमलों और विदेशी नागरिकों के अपहरण तथा हत्या के सीधे-सीधे ज़िम्मेदार माना जाता है.

ज़रकावी पर ढाई करोड़ अमरीकी डॉलर का इनाम रखा गया है, विशेषज्ञ बताते हैं कि इराक़ी चरमपंथियों के बीच ज़रकावी का सिक्का चलता है और कई चरमपंथी उन्हें प्रेरणास्रोत के रूप में देखते हैं.

अब तक ज़रकावी को पकड़ने की हर अमरीकी कोशिश नाकाम रही है, अमरीकी सैनिकों का कहना है कि कई बार घिर जाने के बाद भी ज़रकावी हाथ नहीं आए हैं.

जॉर्डन ने ज़रकावी की ग़ैर मौजूदगी में उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाकर उन्हें मौत की सज़ा सुनाई है.

ज़रकावी का कार्यक्षेत्र सिर्फ़ इराक़ रहा हो ऐसा नहीं है, मोरक्को और तुर्की में हुई कई चरमपंथी घटनाओं के लिए उन्हें ज़िम्मेदार माना जाता है.

जर्मनी की अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी इकाई के प्रमुख चेतावनी दे चुके हैं कि ज़रकावी को ज़हरीले रसायनों के इस्तेमाल की पूरी जानकारी है और यूरोप में हमले की साज़िश रच सकते हैं.

अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंट मानते हैं कि ज़रकावी ग्यारह सितंबर के हमलों के बाद भी दुनिया के कई हिस्सों में घूमते रहे हैं, उन्होंने जिन देशों की यात्रा की है उनमें सीरिया, लेबनान, पाकिस्तान और तुर्की शामिल हैं.
 
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