अल क़ायदा के बड़े नेता
 
ओसामा बिन लादेन
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

ओसामा बिन लादेन

 


ओसामा बिन लादेन

'मोस्ट वांटेड' के अमरीकी ख़िताब के लिए ओसामा बिन लादेन का दुनिया में कोई सानी नहीं है, वहीं कई लोग उन्हें एक योद्धा और नायक के रूप में देखते हैं.

दुनिया ओसामा बिन लादेन के विचारों के बारे में उनके ऑडियो-वीडियो टेपों और मीडिया के दफ़्तरों में भेजे गए फ़ैक्सों के माध्यम से ही जानती है, ग्यारह सितंबर 2001 के हमले के साढ़े तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी वे अमरीकी गिरफ्त से बचे रहे हैं.

ग्यारह सितंबर सहित कई बड़े जानलेवा हमलों के मुख्य अभियुक्त माने जाने वाले ओसामा बिन लादेन से मिल चुके लोगों का कहना है कि वे बहुत ही मृदुभाषी और सज्जन व्यक्ति हैं, मेहमानों का ख़ास ख़याल रखते हैं.

सऊदी अरब में 1957 में जन्मे ओसामा देश के सबसे बड़े रईसों में से एक मोहम्मद बिन लादेन के बेटे हैं और अरबों डॉलर के साम्राज्य के वारिसों में से एक हैं लेकिन अपने परिवार से उनका नाता टूट चुका है.

ओसामा बिन लादेन ख़ासे पढ़े-लिखे और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की भरपूर जानकारी रखने वाले व्यक्ति हैं लेकिन शुरू से ही उनका झुकाव इस्लाम की ओर रहा है.

अफ़ग़ानिस्तान में सोवियत सेना के नियंत्रण के बाद 1979 में पहली बार ओसामा पाकिस्तान पहुँचे जहाँ उन्होंने सोवियत सेना से लड़ रहे विद्रोहियों को संगठित करने का काम शुरू कर दिया.

ओसामा बिन लादेन ने इसके बाद अफ़ग़ानिस्तान के कई दौरे किए, मुजाहिदीन के लिए हथियार-रसद पहुँचाने का काम किया और मुजाहिदीन के लिए कैंप बनाए.

इन कैंपों को उन्होंने नाम दिया अल क़ायदा, अरबी के इस शब्द का मतलब है--आधार. यहीं से उनके संगठन का ही नाम अल क़ायदा हो गया.

अल क़ायदा को सोवियत सेना से लड़ने के लिए अमरीकी सहायता भी मिली लेकिन सोवियत सेना के लौटने के कुछ समय बाद ही ओसामा ने अमरीका को अपना अगला निशाना बनाया.
 
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